ईरान समर्थित हूतियों का सऊदी जहाज पर मिसाइल अटैक, 2 पाकिस्तानी समेत तीन की मौत
बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने तंजानिया के झंडे वाले एक डेक कार्गो जहाज पर मिसाइल से हमला किया है। इस हमले में कम से कम तीन चालक दल के सदस्य मारे गए हैं, जिनमें दो पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल हैं।

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में एक सऊदी जहाज पर मिसाइल हमला किया है। इस हमले में कम से कम तीन लोगों के मारे जाने की खबर है। रिपोर्ट के अनुसार, मारे गए तीनों चालक दल के सदस्य थे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने अभी तक इस हमले की आधिकारिक रूप से जिम्मेदारी नहीं ली है। रिपोर्ट के अनुसार, मारे गए तीन नाविकों में दो पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल हैं। हमले का शिकार बना जहाज तंजानिया के झंडे वाला 'तिहामा; था, जो ओमान के सलालाह बंदरगाह से जिबूती की ओर जा रहा था।
बता दें कि यह घटना हूतियों द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ लाल सागर में नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा के लगभग एक महीने बाद हुई है। हूतियों ने उस समय दावा किया था कि सऊदी अरब ने यमन पर घेराबंदी कर रखी है, इसलिए वे लाल सागर में सऊदी जहाजों और उनसे जुड़े व्यापारिक मार्गों को निशाना बनाएंगे।
बाब अल-मंडेब को कहा जाता है आंसुओं का द्वार
बता दें कि बाब अल-मंडेब को अपनी बेहद खतरनाक और चुनौतीपूर्ण नौवहन परिस्थितियों के कारण सदियों से ‘आंसुओं का द्वार’ कहा जाता है। यह जलमार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। हाल के महीनों में यह क्षेत्र फिर से वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है, क्योंकि फारस की खाड़ी का होर्मुज अभी भी बंद या गंभीर रूप से प्रभावित है।
ईरान के समर्थन वाले यमनी हूती समूह ने कई बार पर बाब अल-मंडेब स्ट्रेट से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को बाधित करने की धमकी दी है। इस महत्वपूर्ण मार्ग से दुनिया भर के लगभग 12 प्रतिशत व्यापार का आवागमन होता है। ऊर्जा आपूर्ति, उपभोक्ता सामान और कंटेनर जहाजों के लिए यह मार्ग यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ने वाला प्रमुख कॉरिडोर माना जाता है।
अभी हर दिन गुजर रहे 32 जहाज
केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह बाब अल-मंडेब से हर दिन औसतन केवल 32 जहाज गुजरे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों द्वारा घोषित नाकाबंदी से पहले इस जल मार्ग से रोजाना औसतन 50 जहाज गुजरते थे। यातायात में इस गिरावट से वैश्विक शिपिंग कंपनियों, बीमा प्रीमियम और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि बाब अल-मंडेब में किसी भी तरह की अस्थिरता न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरे विश्व व्यापार को प्रभावित कर सकती है। हूतियों के बढ़ते हमलों और लाल सागर में तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय जहाज कंपनियां पहले ही वैकल्पिक लंबे मार्गों का इस्तेमाल शुरू कर चुकी हैं, जिससे यात्रा का समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं।


