खामेनेई की मौत के बाद ईरान का 'रहबर' कौन? प्रिंस पहलवी बोले- मेरा नाम चिल्ला रहे ईरानी

Mar 02, 2026 05:24 pm ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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इजरायल और अमेरिका के  हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो चुकी है। ऐसे समय में ईरान के नेतृत्व के लिए पहलवी ने अपना नाम आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि ईरान के अंदर और बाहर लाखों लोग उन्हें अपने नेता के रूप में देखते हैं।

खामेनेई की मौत के बाद ईरान का 'रहबर' कौन? प्रिंस पहलवी बोले- मेरा नाम चिल्ला रहे ईरानी

Iran America Israel War: इजरायल और अमेरिका के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मृत्यु हो गई है। इस हमले और ऐसे हालातों के लिए तैयार ईरान ने तुरंत ही तीन सदस्यी कमेटी बनाकर सुप्रीम लीडर के कार्यभार को उसके हवाले कर दिया है लेकिन ट्रंप और नेतन्याहू इतने में रुकने वाले नहीं है। ट्रंप, ईरान पर हमला करने के बाद अपने रुख को पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह सत्ता परिवर्तन और परमाणु हथियार प्रसार को रोक कर रहेंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है, तो नेता कौन होगा। इसमें, ईरान के पूर्व शाह के बेटे क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने अपना नाम आगे बढ़ा दिया है। वह इस हमले से पहले से पहले भी लगातार ईरान की जनता को संबोधित करने की कोशिश करते रहे हैं।

60 मिनिट्स को दिए एक इंटरव्यू में पहलवी ने दावा किया कि ईरान के अंदर और बाहर लाखों की संख्या में लोग उनके नाम को चिल्ला रहे हैं। वह उन्हें एक नेता के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा, "वे (ईरानी) लोग मुझ पर एक ट्रांजिशनल नेता के रूप में भरोसा करते हैं। भविष्य के राजा या भविष्य के राष्ट्रपति या कुछ और नहीं। मैं अपने जीवन के मिशन के प्रति केंद्रित हूं, मेरा मिशन है कि अपने देश को उस मुकाम पर पहुंचा पाऊं, जहां पर लोग अपना स्वतंत्र चुनाव कर सकें। मेरे लिए इतना काफी होगा कि एक दिन मैं कह पाऊं कि मेरा मिशन पूरा हुआ।"

आपको बता दें, पहलवी इजरायल और ईरान के बीच हुई 12 दिवसीय युद्ध के बाद से ही लगातार ईरानी लोगों को संबोधित करते हुए सड़क पर आने और सत्ता को उखाड़ फेंकने की अपील कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों की मानें तो, नेतृत्व के दावे के बावजूद, पहलवी का ईरान में कोई बड़ा आधार नहीं है। न ही वह कोई बड़ा प्रभावी आंदोलन खड़ा करने की स्थिति में नजर आते हैं। ईरान के जानकारों के मुताबिक, वहां के लोग इस्लामिक सत्ता और खामेनेई के शासन से नाराज हैं, इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि वह पहलवी का समर्थन करते हैं। क्योंकि वह पहलवी शासन ही था, जिसके भ्रष्टाचार और आतंक से परेशान होकर ईरानियों ने खुमैनी को सत्ता सौंप दी थी।

गौरतलब है कि ईरान की पहलवी वंश के क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी पिछले 5 दशक से ईरान के बाहर रह रहे हैं। खामेनेई की सत्ता से नाराज लोग, जो ईरान के बाहर रह रहे हैं, उन्हें एक नेता के रूप में देखते हैं, लेकिन यह समर्थन पहलवी के समर्थन से ज्यादा खामेनेई के विरोध की वजह से है। ऐसे में यह उन्हें ईरान की सत्ता के सीढ़ी तक पहुंचा पाए इतना सामर्थ्य नहीं रखता है।

ट्रंप दे रहे समर्थन?

पहलवी लगातार ट्रंप के नेतृत्व के प्रति अपनी आस्था जताते हुए नजर आए हैं। अभी कुछ महीनों पहले जब ईरान में आंदोलन हो रहा था, उस वक्त भी पहलवी ट्रंप की ही भाषा बोलते हुए नजर आए थे। इस इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति के समर्थन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह ईरान को एक धर्मनिरपेक्ष राज्य बनाना चाहते हैं। हालांकि ट्रंप ने कभी भी खुलकर उनके समर्थन में बयान नहीं दिया। एक इंटरव्यू में जब ट्रंप से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "वह (पहलवी) मुझे पसंद हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि उनके अपने देश में उनकी स्थिति कैसी होगी।"

ट्रंप ने भले ही पहलवी का खुलकर समर्थन न किया हो, लेकिन उनके मागा से जुड़े कुछ लोगों ने क्राउन प्रिंस का समर्थन किया है। ट्रंप से खुलकर समर्थन न मिलने को लेकर पहलवी ने कहा कि उन्हें ट्रंप के औपचारिक समर्थन की अपेक्षा नहीं है, लेकिन उन्होंने उनसे अपने दावे के समर्थन में खुलकर खड़े होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मेरी स्थिति में कोई व्यक्ति किसी विदेशी सरकार या नेता से आधिकारिक समर्थन की अपेक्षा करेगा। लेकिन मैं जानता हूं कि अब ईरान के अंदर और बाहर लाखों लोग मेरा नाम ले रहे हैं। वे मुझमें उस व्यक्ति को देखते हैं जो संक्रमणकालीन नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए विशिष्ट रूप से उपयुक्त है।”

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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