अड़ गया हमास... हथियार डालने से किया इनकार; सीजफायर के बीच नया ऑफर, क्या करेंगे ट्रंप?
गाजा में जारी युद्धविराम और इजरायल के कब्जे के बीच हमास ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि निरस्त्रीकरण कोई विकल्प नहीं है। हमास के विदेशी राजनीतिक नेता खालिद मशाल ने दोहा में अल जजीरा फोरम में बोलते हुए निरस्त्रीकरण की मांगों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

गाजा में जारी युद्धविराम और इजरायल के कब्जे के बीच हमास ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि निरस्त्रीकरण कोई विकल्प नहीं है। हमास के विदेशी राजनीतिक नेता खालिद मशाल ने दोहा में अल जजीरा फोरम में बोलते हुए निरस्त्रीकरण की मांगों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कब्जे के दौर में हथियार छोड़ना फिलिस्तीनियों को इजरायल के लिए 'आसान शिकार' बना देगा। मशाल ने प्रतिरोध को 'राष्ट्रों का अधिकार' बताते हुए जोर दिया कि जब तक कब्जा रहेगा, प्रतिरोध जारी रहेगा। मशाल का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल गाजा में हमास के व्यापक निरस्त्रीकरण पर जोर दे रहे हैं, लेकिन हमास लंबे युद्धविराम (5-10 साल) का प्रस्ताव रखकर हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन से परहेज करने की बात कर रहा है।
इजरायल के अधीन हमारे लोग
खालिद मशाल ने कहा कि अभी हमारे लोग उनके ( इजरायल) कब्जे के अधीन हैं, ऐसे में निरस्त्रीकरण की बात करना हमारे लोगों को इजरायल द्वारा आसानी से खत्म किए जाने और नष्ट करने का प्रयास है, जो सभी अंतरराष्ट्रीय हथियारों से लैस है। उन्होंने आगे कहा कि यदि इस मुद्दे पर बात करनी है, तो पहले ऐसा माहौल बनाना जरूरी है जिसमें पुनर्निर्माण और राहत कार्य हो सकें तथा गाजा और जायोनी सत्ता के बीच युद्ध दोबारा न भड़के। हमास ने कतर, तुर्की और मिस्र जैसे मध्यस्थों के माध्यम से तथा अमेरिकियों के साथ अप्रत्यक्ष संवाद के जरिए इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है या सहमति बना ली है। लेकिन इसके लिए बहुत प्रयासों की जरूरत है, निरस्त्रीकरण के दृष्टिकोण की नहीं।
लंबे युद्धविराम का प्रस्ताव
मशाल ने कहा कि समस्या यह नहीं है कि हमास और गाजा में प्रतिरोधक बल कोई गारंटी नहीं देते; समस्या इजरायल है, जो फिलिस्तीनी हथियार छीनकर उन्हें मिलिशिया के हाथों में सौंपकर अराजकता फैलाना चाहता है। इस दौरान मशाल ने हमास द्वारा अपने सैन्य विंग को भंग करने के बजाय लंबे समय तक शांति बनाए रखने के प्रस्तावों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि हमास ने 5 से 7 या 10 साल के लिए युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है। यह हथियारों के इस्तेमाल न करने की गारंटी है। मध्यस्थ राष्ट्र, जिनके हमास के साथ गहरे संबंध हैं, इसकी गारंटी दे सकते हैं।
दरअसल, पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास के 'व्यापक' निरस्त्रीकरण को लक्ष्य बनाया था और ऐसा न करने पर फिलिस्तीनी समूह को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। दूसरी ओर हमास ने उस वक्त भी साफ-साफ कहा था कि जब तक इजरायल गाजा पर अपना कब्जा बनाए रखेगा, हमास हथियार छोड़ने से इनकार करता रहेगा। पिछले साल अक्टूबर में इजरायल और हमास के बीच अमेरिका की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण में वाशिंगटन का कहना है कि वह हमास के निरस्त्रीकरण और एक अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की तैनाती जैसे मुद्दों पर विचार करेगा।
युद्धविराम के बीच हमले जारी
दूसरी ओर युद्धविराम के बीच इजरायल गाजा में लगभग हर दिन हमला कर रहा है। उसने पूर्वी गाजा में तथाकथित 'पीली रेखा' (Yellow Line) से पीछे हटने से अभी तक इनकार कर दिया है, जो एक अनौपचारिक सीमा है और गाजा पट्टी के आधे से अधिक हिस्से को, जो अभी भी इजरायली सैन्य नियंत्रण में है, शेष पट्टी से अलग करती है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम शुरू होने के बाद से इजरायली हमले में 576 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है, जबकि 1543 घायल हैं, जिनका स्थानीय अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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