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गाजा की सत्ता छोड़ने का इरादा नहीं! हमास ने अपने ही लोगों को लाइन में बैठाकर गोलियों से भूना

गाजा की सत्ता छोड़ने का इरादा नहीं! हमास ने अपने ही लोगों को लाइन में बैठाकर गोलियों से भूना

संक्षेप:

सीजफायर समझौते के बाद गाजा से सामने आई एक भयावह वीडियो ने झकझोर कर रख दिया है। इस वीडियो में कथित तौर पर फिलिस्तीनियों को घुटनों पर बैठाकर गोलियों से भूनते हुए दिखाया गया है।

Oct 14, 2025 02:52 pm ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, गाजा
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्यस्थता किए गए शांति समझौते के तहत सभी जीवित बंधकों की रिहाई के कुछ ही घंटों बाद गाजा पट्टी में एक नया संकट पैदा हो गया है। हमास ने कथित 'इजरायली सहयोगियों' और 'गद्दारों' को सार्वजनिक रूप से गोलियों से भून डाला। इससे समझौते की पहली कड़ी ही खतरे में पड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हमास सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगा है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि यदि हमास ने शर्तों का पालन नहीं किया तो 'नर्क जैसी तबाही' का सामना करना पड़ेगा।

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ट्रंप की 20-सूत्री योजना का स्वागत, लेकिन विवादास्पद शुरुआत

ट्रंप की प्रस्तावित योजना 3 अक्टूबर को सार्वजनिक की गई थी। इसमें तत्काल युद्धविराम, सभी इजरायली बंधकों की रिहाई (जीवित और मृत), इजरायली कैदियों के बदले सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई और गाजा से इजरायली सेना की आंशिक वापसी शामिल थी। हमास ने योजना के कुछ हिस्सों को स्वीकार करते हुए कहा था कि वह सभी बंधकों को मुक्त करने को तैयार है, लेकिन गाजा के भविष्य और हथियार डालने पर 'फिलिस्तीनी एकता' के आधार पर बातचीत जारी रखना चाहता है।

8 अक्टूबर को मिस्र में अप्रत्यक्ष वार्ताओं के बाद इजरायल और हमास ने योजना के पहले चरण पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे 'मध्य पूर्व में शांति का नया दौर' बताते हुए कहा, "यह युद्ध का अंत नहीं, बल्कि आतंक और मौत के युग का अंत है।" इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कैबिनेट ने भी इसे मंजूरी दी और 13 अक्टूबर को सभी 20 जीवित बंधकों की रिहाई हो गई। इजरायल ने बदले में 250 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया, जिनमें से कई जीवन कैद की सजा काट रहे थे।

हमास की सत्ता पर कब्जे की कोशिश

सीजफायर समझौते के बाद गाजा से सामने आई एक भयावह वीडियो ने झकझोर कर रख दिया है। इस वीडियो में कथित तौर पर फिलिस्तीनियों को घुटनों पर बैठाकर गोलियों से भूनते हुए दिखाया गया है। माना जा रहा है कि यह घटना हमास के लड़ाकों द्वारा की गई है, जिसने इजरायल-हमास के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, वीडियो में सात लोगों को एक पंक्ति में घुटनों के बल बैठा हुआ देखा जा सकता है। उनके पीछे हथियारबंद नकाबपोश लोग खड़े हैं। कुछ हमलावरों ने हमास की हरी पट्टी जैसे सिर पर बंधे हेडबैंड पहन रखे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति आगे आकर कैदियों पर कुछ कहता है और कुछ ही क्षणों बाद गोलियों की आवाज गूंजती है। कुछ सेकंड में सभी सात व्यक्ति जमीन पर गिर जाते हैं, जबकि भीड़ ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाती सुनाई देती है।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को गाजा में सोमवार को शूट किया गया बताया जा रहा है। हालांकि, ब्रिटिश समाचार पत्र डेली मेल ने यह स्पष्ट किया है कि वीडियो की वास्तविकता, स्थान या इसमें शामिल लोगों की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।

हमास पर बढ़ते आरोप और डर का माहौल

कई सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहे बंदूकधारी हमास के सदस्य हैं, जिन्होंने कथित ‘सहयोगियों’- यानी इजरायल से सहयोग करने वाले फिलिस्तीनियों को मार डाला। पिछले महीने भी हमास-नियंत्रित प्रशासन ने तीन लोगों को ‘इजरायल से सहयोग’ के आरोप में फांसी देने की बात स्वीकार की थी। अब यह नया वीडियो संकेत देता है कि हमास शायद फिर से भय और हिंसा के जरिए नियंत्रण कायम करने की कोशिश कर रहा है।

शांति समझौते पर संकट के बादल

यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों ने मिस्र में इजरयल और हमास के बीच एक 20-सूत्रीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का उद्देश्य गाजा में दो वर्षों से जारी खूनी संघर्ष को समाप्त करना था।

समझौते के अनुसार,

  • गाजा को निरस्त्र किया जाएगा।
  • हमास शासन से बाहर रहेगा और गाजा का प्रशासन एक अस्थायी, तकनीकी विशेषज्ञों की सरकार संभालेगी।
  • हमास को अपने हथियार छोड़ने और राजनीतिक रूप से पीछे हटने की शर्त माननी थी।

लेकिन इस ताजा घटना ने यह आशंका बढ़ा दी है कि हमास अब भी सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं है और हिंसा के जरिए अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है।

बंधकों के शवों को लेकर बढ़ा आक्रोश

शांति समझौते से पहले हमास ने सभी जीवित बंधकों को रिहा कर दिया था, लेकिन 28 मृत बंधकों में से केवल 4 के शव ही लौटाए गए हैं। इससे इजरायल में आक्रोश फैल गया है। कई परिवार, जो अपने प्रियजनों की वापसी की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें यह खबर मिली कि उनके परिजन अब जीवित नहीं हैं।

मानवाधिकार संगठनों की निंदा

अतीत में भी हमास पर सार्वजनिक रूप से फांसी और गोली मारने जैसी सजाओं का आरोप लगता रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कई विश्व नेताओं ने इस तरह की बर्बरता की निंदा की है। अब, जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से फैल गया है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर गहरी चिंता जता रहा है कि अगर यह वीडियो असली साबित होता है, तो गाजा में शांति प्रक्रिया फिर से पटरी से उतर सकती है।

Amit Kumar

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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