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'जितनी मिल सकती थीं सभी लाशें लौटा दीं', हमास ने खड़े किए हाथ; गाजा सीजफायर पर संकट के बादल

'जितनी मिल सकती थीं सभी लाशें लौटा दीं', हमास ने खड़े किए हाथ; गाजा सीजफायर पर संकट के बादल

संक्षेप: सीजफायर के दूसरे चरण में हमास को हथियार डालने और सत्ता सौंपने की शर्त है, जिसे हमास ने अब तक ठुकरा दिया है। गाजा के पूर्वी शेजाय्या इलाके में इजरायली सैनिकों की वापसी के बावजूद तनाव बरकरार है।

Thu, 16 Oct 2025 12:01 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, गाजा
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इजरायल-हमास युद्ध के दो वर्षों के बाद बने हालिया सीजफायर समझौते पर अब गंभीर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हमास ने बुधवार को दावा किया है कि उसे इजरायली बंधकों की जितनी लाशें मिल सकीं, वे सभी लौटा दी हैं। संगठन के सैन्य विंग अल-कस्साम ब्रिगेड्स ने बयान जारी कर कहा, "हमने जो भी जीवित कैदियों को अपने कब्जे में था, उन्हें लौटा दिया है और जितनी लाशों तक हम पहुंच सके, उन्हें भी सौंप दिया है। बाकी लाशों को निकालने के लिए विशेष उपकरण और काफी प्रयासों की जरूरत है।" यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायल ने हमास पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए मानवीय सहायता कम करने और सीजफायर तोड़ने की धमकी दी है।

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समझौते की शर्तें और अब तक क्या हुआ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्यस्थता से बने 20-सूत्री सीजफायर समझौते के पहले चरण के तहत हमास को 72 घंटों के अंदर सभी जीवित और मृत बंधकों को लौटाना था। सोमवार को हमास ने 20 जीवित इजरायली बंधकों को रिहा किया, जबकि इजरायल ने करीब 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों को मुक्त किया। मंगलवार को रेड क्रॉस के माध्यम से हमास ने चार और लाशें सौंपीं, जिनमें से तीन की पहचान हो चुकी है- योसी शरबी, डैनियल पेरेत्ज और गाय इलूज। हालांकि, बुधवार को एक चौथी लाश की जांच में पता चला कि वह किसी गुमशुदा बंधक की नहीं, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति की है।

हमास ने कुल 28 मृत बंधकों की लाशें लौटाने का वादा किया था, लेकिन अब तक केवल सात लाशें ही प्राप्त हुई हैं। हमास का कहना है कि बाकी लाशें गाजा के मलबे के नीचे दबी हुई हैं, जहां इजरायली हवाई हमलों से शहर के बड़े हिस्से तबाह हो चुके हैं। संगठन ने कहा कि "मलबे से लाशें निकालने के लिए भारी मशीनरी और समय चाहिए, जो 72 घंटे की समय सीमा में संभव नहीं था। इजरायल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज ने हमास पर "समझौते का उल्लंघन" करने का आरोप लगाया और कहा कि अगर सभी लाशें नहीं लौटीं तो इजरायली सेना दोबारा कार्रवाई के लिए तैयार है।

इजरायल की सख्ती: सहायता पर रोक, धमकियां

इजरायल ने हमास की इस देरी को "गंभीर उल्लंघन" बताते हुए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बुधवार से गाजा में मानवीय सहायता ट्रकों की संख्या आधी कर दी गई है, और राफाह सीमा पार (मिस्र से गाजा) को बंद रखने का फैसला लिया गया है। इजरायली अधिकारियों ने कहा कि यह कदम हमास को दबाव में लाने के लिए है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी हमास को चेतावनी दी है: "उन्होंने कहा था कि वे हथियार डालेंगे, अगर नहीं डाला तो हम उन्हें डालवा देंगे- शायद जल्दी और हिंसक तरीके से।" ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर हमास ने वादा पूरा नहीं किया तो इजरायली सेना को "जब चाहें" दोबारा हमला करने की इजाजत दी जा सकती है।

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध में 67,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जबकि हजारों लाशें अभी भी मलबे में दबी हैं। सीजफायर शुरू होने के बाद से गाजा सिविल डिफेंस ने 250 लाशें निकाली हैं। इजरायल ने बदले में 45 मृत फिलिस्तीनियों की लाशें गाजा को लौटाई हैं।

हमास की सैन्य तैनाती बढ़ी

हमास ने सीजफायर के बावजूद गाजा में अपनी सैन्य पकड़ मजबूत की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मास्कधारी हमास लड़ाकों ने आठ फिलिस्तीनियों को सार्वजनिक रूप से गोली मार दी है, जिससे स्थानीय निवासियों में भय का माहौल है। हमास ने इजरायल पर भी सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाया है- गाजा के पूर्वी इलाके में इजरायली ड्रोन हमले में पांच फिलिस्तीनी मारे गए। खान यूनिस के पास एक हवाई हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई। हमास के प्रवक्ता ने कहा, "इजरायल सहायता रोककर गाजा के लोगों को सजा दे रहा है, जो समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है।"

Amit Kumar

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें

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