बड़ा खुलासा! 40 दिनों की अमेरिका-इजरायल बमबारी बेकार, ईरान के न्यूक्लियर प्लान को नहीं पहुंचा नुकसान

May 05, 2026 04:21 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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अमेरिका और इजरायल के करीब 40 दिनों के लगातार हमलों के बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि पिछले गर्मियों के बाद तेहरान के परमाणु कार्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

बड़ा खुलासा! 40 दिनों की अमेरिका-इजरायल बमबारी बेकार, ईरान के न्यूक्लियर प्लान को नहीं पहुंचा नुकसान

अमेरिका और इजरायल के करीब 40 दिनों के लगातार हमलों के बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि पिछले गर्मियों के बाद तेहरान के परमाणु कार्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। दरअसल, जून 2025 में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद कुछ एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाया था कि ईरान के परमाणु हथियार विकसित करने की समय-सीमा में कम से कम एक साल की देरी हो गई है। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए युद्ध के बावजूद इस आकलन में व्यापक परिवर्तन नहीं देखा गया है। 28 फरवरी से शुरू हुए नए हमलों में अमेरिका ने मुख्य रूप से पारंपरिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि इजरायल ने ईरान की कई महत्वपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमले किए। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम (HEU) के भंडार को नष्ट या हटाए बिना उसके परमाणु कार्यक्रम को गंभीर रूप से बाधित करना मुश्किल है।

क्या है खुफिया आकलन?

जून के 12 दिवसीय युद्ध से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने निष्कर्ष निकाला था कि ईरान बम-ग्रेड यूरेनियम का उत्पादन कर सकता है और तीन से छह महीने में एक परमाणु बम बनाने की क्षमता रखता है। नतांज, फोर्डो और इस्फहान परिसरों पर हमलों के बाद यह समय-सीमा नौ महीने से एक साल तक बढ़ गई। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी (IAEA) अभी भी लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम का पता नहीं लगा पाई है। एजेंसी का मानना है कि इसका आधा हिस्सा इस्फहान के भूमिगत सुरंग परिसर में छिपा हो सकता है। IAEA के अनुसार, अगर इस HEU को और समृद्ध किया जाए तो यह 10 परमाणु बमों के लिए पर्याप्त होगा।

वाइट हाउस का बयान

वाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने कहा कि ऑपरेशन मिडनाइट हैमर ने ईरान की परमाणु सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया, जबकि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने उसके रक्षा औद्योगिक आधार को तबाह कर दिया। राष्ट्रपति ट्रंप स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने 2 मार्च को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यही इस अभियान का लक्ष्य है।

शांति वार्ता और तनाव

7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बाद दोनों देशों के बीच शांति वार्ता शुरू हुई है, लेकिन कई मांगों को लेकर दोनों देशों के बीच अभी भी तनाव बरकरार है। इस बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को एक बार फिर बंद कर दिया है, जिस कारण फिर से और तनाव बढ़ गया है। बता दें कि होर्मुज जलमार्ग बंद होने के कारण विश्व की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। दूसरी ओर अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका का लक्ष्य बातचीत के माध्यम से सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।

क्या कह रहे एक्सपर्ट्स

परमाणु खतरे की पहल के उपाध्यक्ष और पूर्व अमेरिकी खुफिया विश्लेषक एरिक ब्रेवर ने कहा कि हाल के हमलों में परमाणु लक्ष्यों को प्राथमिकता नहीं दी गई, इसलिए आकलन में बदलाव नहीं आया। उन्होंने कहा कि ईरान के पास अपनी सारी परमाणु सामग्री अब भी मौजूद है, जो संभवतः बहुत गहरी भूमिगत जगहों पर सुरक्षित है।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व परमाणु निरीक्षक डेविड अल्ब्राइट ने इजरायल द्वारा ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि इससे ईरान की बम बनाने की तकनीकी क्षमता पर अनिश्चितता बढ़ गई है। ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश से बार-बार इनकार करता रहा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और IAEA का आकलन है कि तेहरान ने 2003 में अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम रोक दिया था, हालांकि इजरायल और कुछ विशेषज्ञ इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं करते।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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