ईरान तनाव के बीच नेतन्याहू ने ब्रिटेन को बताया 'इस्लामिक रिपब्लिक';तेहरान को लेकर कड़ा संदेश
ईरान में जारी तनाव और तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की इजरायल की कोशिशों के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यूनाइटेड किंगडम को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' करार दिया है। नेतन्याहू ने यह बात एक अन्य इस्लामी देश के परमाणु हथियार हासिल करने के खतरे पर चर्चा करते हुए कही।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहे तनाव और गाजा में जारी संघर्ष के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यूनाइटेड किंगडम ( UK) पर एक चौंकाने वाली टिप्पणी की है। उन्होंने ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कहकर संबोधित किया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिटेन और इजरायल के बीच राजनयिक और रणनीतिक संबंधों में तनाव दिखाई दे रही है। दरअसल, नेतन्याहू ने यह बात ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की संभावना पर चर्चा करते हुए कही। उन्होंने एक अन्य इस्लामी देश के संदर्भ में चेतावनी देते हुए कहा कि आप ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कह सकते हैं। उन्होंने आगे जोड़ा कि किसी ने कहा था कि परमाणु हथियार वाला पहला इस्लामी गणराज्य इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, भले ही यह कमेंट मजाकिया अंदाज में किया गया है, लेकिन इसके पीछे इजरायल की गहरी चिंताएं साफ झलक रही हैं। नेतन्याहू ईरान के परमाणु कार्यक्रम को इजरायल के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते रहे हैं। उन्होंने बार-बार जोर दिया है कि तेहरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार बनाने से रोका जाना चाहिए। उनकी इस ताजा टिप्पणी में ब्रिटेन की आंतरिक सामाजिक-राजनीतिक स्थिति और ईरान के खतरे को जोड़कर एक तीखा संदेश दिया गया है।
ईरान पर फोकस और नेतन्याहू की रणनीति
इजरायल पिछले कई वर्षों से ईरान के परमाणु ठिकानों पर संभावित सैन्य कार्रवाई की धमकी देता रहा है। नेतन्याहू की सरकार का मानना है कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है तो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा। शायद यही कारण है कि उन्होंने परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामी गणराज्य' वाले बयान को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार संपन्न देश नहीं बनने देगा।
वहीं जानकारों का कहना है कि नेतन्याहू की ब्रिटेन पर यह टिप्पणी सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि लंदन की मौजूदा नीतियों के प्रति नाराजगी का भी संकेत है। ब्रिटेन में मुस्लिम आबादी की बढ़ती संख्या और कुछ कट्टरपंथी तत्वों की गतिविधियों को लेकर इजरायली पक्ष में लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। नेतन्याहू ने इसी भावना को अपने बयान में शामिल किया।
ब्रिटेन-इजरायल संबंधों में गहराता तनाव
नेतन्याहू की यह टिप्पणी ऐसे मौके पर आई है जब ब्रिटेन में नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के नेतृत्व में सरकार इजरायल के प्रति अपेक्षाकृत सख्त रुख अपना रही है। दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से मजबूत रणनीतिक साझेदारी रही है। रक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और उच्च तकनीक के क्षेत्र में गहरे संबंध हैं। हालांकि, कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इजरायल की नीतियों, वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों के विस्तार और दो-राज्य समाधान के भविष्य को लेकर मतभेद लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
गाजा में युद्ध छिड़ने और वेस्ट बैंक में बसने वालों की हिंसा में तेजी आने के बाद ब्रिटेन सरकार ने मई 2025 में इजरायल के साथ प्रस्तावित नए मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत स्थगित कर दी थी। साथ ही 2030 रोडमैप के तहत दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक समीक्षा का ऐलान किया गया। जून 2026 में ब्रिटेन ने एक और कदम उठाया। उसने ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और नॉर्वे जैसे सहयोगी देशों के साथ मिलकर वेस्ट बैंक में बसने वालों की हिंसा को आर्थिक सहायता देने या बढ़ावा देने वाली कंपनियों तथा एक व्यक्ति पर प्रतिबंध लगा दिए। ब्रिटेन सरकार ने अपने व्यावसायिक दिशानिर्देशों को भी सख्त बना दिया और ब्रिटिश नागरिकों तथा कंपनियों को अवैध बस्तियों में किसी भी तरह की आर्थिक गतिविधि से दूर रहने की चेतावनी दी।
ब्रिटेन का क्या है रुख?
दरअसल, लंदन लगातार दो-राज्य समाधान का समर्थन करता रहा है। ब्रिटिश सरकार ने बार-बार युद्धविराम, मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति और सभी बंधकों की तत्काल रिहाई की मांग की है। गाजा में नागरिकों की भारी तबाही और मानवीय संकट को लेकर ब्रिटेन की आलोचना इजरायल के लिए असहज करने वाली रही है। इजरायली पक्ष का मानना है कि पश्चिमी देश, खासकर ब्रिटेन, ईरान के खतरे को पर्याप्त गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और साथ ही इजरायल पर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं।


