अमेरिकी सैनिक को मारने पर ₹2863515 रुपये, महिला को डबल; ईरान ने किया ऐलान

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अमेरिका संग जारी तनाव के बीच ईरानी सेना ने विवादित और बड़ा ऐलान किया है। कहा गया है कि अमेरिकी सैनिकों को मारने या पकड़ने वाले लोगों के लिए 30 हजार डॉलर इनाम दिया जाएगा। अगर कोई महिला अमेरिकी सैनिक को पकड़ती या मारती है, तो उसे दोगुना इनाम मिलेगा।

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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। तनाव के बीच ईरान की ओर से एक बड़ा और बेहद विवादित ऐलान किया गया है। ईरानी सेना ने अमेरिकी सैनिकों को मारने या उन्हें पकड़कर सौंपने वाले लोगों के लिए 30 हजार डॉलर यानी करीब 28,63,515 रुपये के इनाम की घोषणा की है। ईरान के सेना प्रमुख आमिर हतामी ने कहा कि अगर कोई ईरानी महिला किसी अमेरिकी सैनिक को मारती या पकड़ती है, तो उसे सामान्य इनाम से दोगुनी रकम दी जाएगी यानी 57 लाख से अधिक दिया जाएगा।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, आमिर हतामी ने कहा कि इस योजना को लेकर बड़ी संख्या में लोगों ने वित्तीय मदद में हिस्सा लेने के लिए अनुरोध किया था। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि अमेरिकी सैनिकों को कब या कहां निशाना बनाया जा सकता है। हतामी ने कहा कि जो कोई भी हमलावर अमेरिकी सेना के किसी सदस्य को मारता या पकड़कर सौंपता है, उसे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सेना की ओर से 30 हजार डॉलर के बराबर इनाम दिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई ईरानी महिला यह काम करती है, तो उसे दोगुना इनाम मिलेगा।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी है तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इजरायल की बेंजामिन नेतन्याहू सरकार के साथ मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य हिस्सों में हमले किए थे। युद्ध के पहले दिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई, जिसके बाद ईरान ने इजरायल और पड़ोसी अरब देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए।

ईरान ने इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जिसके जरिए वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके चलते ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा।

होर्मुज को लेकर दोनों आमने-सामने

लगभग 40 दिनों की लड़ाई के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता से अप्रैल में युद्धविराम हुआ। इसके बाद जून में शांति वार्ता के लिए एक रूपरेखा तैयार की गई, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया भी टूट गई। तब से ईरान और अमेरिका के बीच छिटपुट सैन्य झड़पें जारी हैं। संघर्ष मुख्य रूप से दक्षिणी ईरान और होर्मुज के आसपास केंद्रित रहा है। दूसरी ओर, यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों ने लाल सागर के समुद्री मार्ग को भी प्रभावित किया है, जिससे क्षेत्रीय संकट और बढ़ गया है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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