26 जुलाई की तरह फिर डूब जाएगी मुंबई? नदी-नालों से गाद निकालने के नाम पर फर्जीवाड़ा
एक वकील ने म्युनिसिपल कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज करवाते हुए कहा है कि मुंबई में जिस तरह से गाद निकालने के नाम पर धोखाधड़ी हो रह है , कहीं ऐसा ना हो कि 26 जुलाई 2005 की तरह प्रलय आ जाए।

मुंबई में बारिश के बाद कई बार जलभराव की समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि लोगों को घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के घरों तक पानी भर जाता है। पेशे से वकील रफीक गोरी ने म्युनिसिपल कमिश्नर को पत्र लिखकर बताया जार रहा है कि छोटी बरसाती नदियों से गाद निकालने के नाम पर किस तरह से अधिकारी और कॉन्ट्रैक्टर मिलकर फ्रॉड कर रहे हैं और जनता के पैसे को खुद पचाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि सड़कों और घरों के मलबे को गाद बताकर नदियों और नालों की सफाई का दावा किया जा रहा है लेकिन इसके पीछे बड़ी धोखाधड़ी छिपी हुई है।
उन्होंने कहा कि गोरेगांव, लोखंडवाला और अंधेरी वेस्ट से डंपर चलते हैं और वे मलबा लाकर गिरा देते हैं। बाद में बताया जाता है कि यह नदी और नालों की गाद है। मिड डे की रिपोर्ट के मुताबिक वकील ने बताया कि उन्होंने खुद से पता लगाया है कि गाद निकालने वाले कम से कम 8 डंपर मलबा ढो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से ज्यादातर डंपरों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगा हुआ है। वे केवल नदी नालों के पास खड़े होकर फोटो खिंचवा लेते हैं और फिर धोखाधड़ी वाले काम में लग जाते हैं।
गोरी ने दावा किया कि उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन किया है। उन्होंने देखा कि नदी के किनारे से डंपर खाली ही चला गया और इसके बाद एक प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर के काम में लग गया। यह मलबा ढोने लगा। गोरी ने बताया कि यह एक पूरा नेक्सस चल रहा है जिसमें बीएमसी के कई अधिकारी शामिल हैं। उनके कॉन्ट्रैक्टर्स से अच्छ्े संबंध हैं। ऐसे में फर्जी गाद निकालने के रिकॉर्ड और जीपीएस का रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है।
क्या है 26 जुलाई का इतिहास
बता दें कि 26 जुलाई 2005 को मुंबई में कहर बरसा था। इतनी बारिश हुई थी कि घर, दफ्तरर और फैक्ट्री तक डूब गए और लोग जहां के तहां फंस गए। स्कूल और कॉलेज बंद करने पड़े। एक ही दिन में महाराष्ट्र में 944 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। इस बारिश में कम से कम 1 हजार लोगों की जान चली गई थी। इसलिए यह दिन कोई भी भूल नहीं पाया है। वकील गोरी का कहना है कि अगर इसी तरह से फ्रॉड चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब 26 जुलाई की तरह की विभीषिका फिर झेलनी पड़ेगी।
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Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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