मुस्लिम लड़कों से जबरन 'जय श्री राम' के नारे लगवाने का आरोप, AIMIM ने गिरफ्तारी की मांग की
वारिस पठान ने कहा कि केवल FIR दर्ज करना काफी नहीं है और पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी भी करनी चाहिए। यह कानूनी कार्रवाई की शुरुआत है, लेकिन आरोपियों की पहचान कर उचित कार्रवाई करना भी जरूरी है।

मुंबई के लालबाग-परेल इलाके में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस के बाद 2 युवकों से कथित तौर पर जबरन ‘जय श्री राम’ के नारे लगवाने का वीडियो सामने आया है। इस मामले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। पठान ने शनिवार को कहा कि वायरल वीडियो में कुछ लोग दो युवकों को कथित तौर पर रोककर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने के लिए मजबूर करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि युवकों के साथ गाली-गलौज और मारपीट भी की गई। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।
वारिस पठान ने कहा कि AIMIM ने इस वीडियो को सामने लाकर मुंबई पुलिस से तत्काल FIR दर्ज करने और आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की है। उनके मुताबिक, मुंबई पुलिस की ओर से बताया गया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। हालांकि, पठान ने कहा कि केवल एफआईआर दर्ज करना काफी नहीं है और पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करना कानूनी कार्रवाई की शुरुआत है, लेकिन इसके बाद आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करना भी जरूरी है।
मारपीट और अभद्र व्यवहार का भी लगा आरोप
AIMIM नेता वारिस पठान ने सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि इसमें कुछ लोगों को कथित तौर पर दो युवकों को घेरकर धार्मिक नारे लगाने के लिए मजबूर करते देखा जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि युवकों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच करने और वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए और युवकों के साथ जबरदस्ती व मारपीट करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
यह मामला शुक्रवार को मुंबई में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस के बाद सामने आया। घटना से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे। वारिस पठान ने दोहराया कि कथित आरोपियों की गिरफ्तारी की जानी चाहिए और जांच के बाद दोष साबित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक पहचान या नारे के नाम पर किसी व्यक्ति को डराना, धमकाना या उसके साथ हिंसा करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।


