'जिन्हें जाना है, चले जाएं': ऑपरेशन टाइगर की चर्चा के बीच उद्धव ठाकरे की बागियों को दो टूक- 'मेरा वक्त फिर आएगा'
संजय राउत ने पार्टी सांसद संजय देशमुख के एक दिन पहले शिवसेना मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात के बाद उनके पाला बदलने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि गलत तस्वीर पेश की जा रही है और पार्टी के सभी सांसद एकजुट हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर चल रही अटकलों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने पार्टी सांसदों के साथ बैठक में एक बड़ा संदेश दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ने कहा है कि जो भी नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वो जा सकते हैं और उन्हें रोकने की कोई कोशिश नहीं की जाएगी। बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार, ठाकरे ने सांसदों से कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे आजाद हैं और वह बस उनके अच्छे भविष्य की कामना करेंगे।
2022 में हुई बगावत, जिससे शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी, उसका ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब भी उन्हें इन घटनाक्रमों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी पर भी पार्टी में बने रहने के लिए दबाव नहीं डाला था। ठाकरे ने सांसदों से कहा, “चार साल पहले पार्टी में बड़ी टूट हुई थी। चालीस विधायक चले गए थे। क्या आपको लगता है कि मुझे पता नहीं था कि क्या हो रहा है?” उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना छोड़ी, उन्हें आखिरकार अपने फैसले पर पछतावा होगा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। उन्होंने आगे कहा, “हो सकता है कि आज मेरा समय न हो, लेकिन कल जरूर मेरा समय आएगा। तब तक हमें डटे रहना होगा और हिम्मत बनाए रखनी होगी।”
संजय राउत ने किया खंडन
हालांकि, दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इन खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि वे पूरी बैठक में मौजूद थे और उद्धव ठाकरे ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया कि जो सांसद पार्टी छोड़कर जाना चाहते हैं, चले जाएं। राउत ने कहा, "उद्धव ठाकरे ऐसा कभी नहीं कह सकते। यह खबर गलत है।" उन्होंने पार्टी में किसी भी तरह की टूट की अटकलों को भी खारिज करते हुए दावा किया कि शिवसेना (UBT) के सभी नौ सांसद एकजुट हैं।
ठाकरे के नेतृत्व शैली का बचाव
ठाकरे के नेतृत्व शैली का बचाव करते हुए राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसा कोई नेता नहीं है जो शिवसेना (UBT) प्रमुख की तरह इतने सारे पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलता हो। उन्होंने कहा, "शरद पवार के बाद उद्धव ठाकरे ही ऐसे नेता हैं जो सबसे ज़्यादा लोगों से मिलते हैं। मातोश्री के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं।" राउत ने पार्टी के सांसदों के बीच मतभेद की अटकलों को भी खारिज कर दिया और कहा कि शिवसेना (UBT) के सभी नौ सांसद एकजुट हैं। अलग-अलग पार्टियों के नेताओं के बीच बातचीत की खबरों पर उन्होंने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों का मंत्रियों या राजनीतिक नेताओं से मिलना कोई असामान्य बात नहीं है।
राजनीतिक लड़ाई तो चलती रहेगी
उन्होंने कहा, “अगर संजय देशमुख प्रतापराव जाधव से मिलते हैं, तो क्या समस्या है? अगर मुझे कल कोई काम हो, तो मैं प्रधानमंत्री से मिलूंगा। प्रधानमंत्री देश के होते हैं और मुख्यमंत्री राज्य के। राजनीतिक लड़ाई तो चलती रहेगी, लेकिन जनहित के कामों के लिए होने वाली मुलाकातों को कोई और रंग नहीं दिया जाना चाहिए।”
'ऑपरेशन टाइगर' पर शिंदे गुट का दावा
दूसरी ओर, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना लगातार 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री प्रताप सरनाइक ने दावा किया कि ऑपरेशन टाइगर कोई एक बार की राजनीतिक कवायद नहीं, बल्कि सालभर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि जो कार्यकर्ता अपनी पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं, वे शिंदे और शिवसेना की विचारधारा से प्रभावित होकर उनके साथ जुड़ रहे हैं। इन अटकलों को और हवा देते हुए, शिवसेना विधायक कृपाल तुमाने ने दावा किया कि शिवसेना (UBT) के ज़्यादातर सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं। उन्होंने दावा किया कि उद्धव गुट के नौ में से सात सांसद और 16 विधायक शिंदे खेमे के संपर्क में हैं और विकास कार्यों के लिए उनके साथ काम करना चाहते हैं।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


