
मनोज जारांगे पाटिल को किस बात की आशंका? भूख हड़ताल खत्म करने से किया इनकार
Maratha: महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों ने मराठा आरक्षण विधेयक पारित कर दिया, जिसका उद्देश्य 50 प्रतिशत की सीमा को तोड़ते हुए शिक्षा और नौकरियों में मराठों को 10 प्रतिशत कोटा देना था।
मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल ने अपने गृहनगर जालना में अपनी भूख हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया है। आपको बता दें कि उनकी मांग पर मंगलवार को जल्दबाजी में बुलाए गए विशेष सत्र में एक विधेयक पारित किया गया। इसके बावजूद उनका आंदोलन जारी है। हालांकि उन्होंने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने इस बात के लिए संदेह व्यक्त किया है कि यह विधेयक कानूनी जांच से गुजरेगा।
महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों ने मराठा आरक्षण विधेयक पारित कर दिया, जिसका उद्देश्य 50 प्रतिशत की सीमा को तोड़ते हुए शिक्षा और नौकरियों में मराठों को 10 प्रतिशत कोटा देना था। यह विधेयक तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस की सरकार द्वारा पेश किए गए सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग अधिनियम, 2018 के समान है। सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा का हवाला देते हुए 2018 अधिनियम को रद्द कर दिया था।
क्यों जारी है जारांगे पाटिल का भूख हड़ताल?
जारांगे-पाटिल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में कोटा पर जोर देते हैं क्योंकि इसी तरह का विधेयक कानूनी जांच पास नहीं कर सका और 2021 में रद्द कर दिया गया था। रंगे पाटिल मांग कर रहे हैं कि सभी मराठों को कुनबी माना जाए और उसके अनुसार आरक्षण दिया जाए। सरकार ने निर्णय लिया कि केवल कुनबी प्रमाणपत्र के निजाम युग के दस्तावेज वाले लोगों को ही इसके तहत लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा, ''सरकार के द्वारा दिए गए आरक्षण से मराठा के केवल 100 -150 लोगों को लाभ होगा, हमारे लोग आरक्षण से वंचित रहेंगे। इसलिए मैं "सेज सोयरे" को लागू करने की मांग कर रहा हूं।आंदोलन के अगले दौर की घोषणा कल की जाएगी। हम आरक्षण लेंगे क्योंकि हम इसके हकदार हैं।'
उन्होंने अपने हाथ से नसों में लगने वाली ड्रिप भी हटा दी और डॉक्टरों से आगे इलाज लेने से इनकार कर दिया।
जारांगे-पाटिल की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के मंत्री शंभुराज देसाई ने कहा, ''सरकार ने मनोज जारांगे पाटिल और मराठा समुदाय की मांगों को पूरा कर दिया है। सरकार आई आपत्तियों का अध्ययन कर उन पर निर्णय लेगी।मैं उनसे अनुरोध करता हूं कि विरोध करने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार ने मराठा समुदाय के पक्ष में फैसला लिया है।”





