फोटो गैलरी

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News महाराष्ट्रमहाराष्ट्र के स्कूल सिलेबस पर बवाल, सरकार बोली- नहीं पढ़ाएंगे मनुस्मृति की पंक्तियां

महाराष्ट्र के स्कूल सिलेबस पर बवाल, सरकार बोली- नहीं पढ़ाएंगे मनुस्मृति की पंक्तियां

महाराष्ट्र में स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम में मनुस्मृति की पंक्तियां शामिल करने को लेकर बवाल हो गया। अब सरकार की तरफ से सफाई आई है कि इस ड्राफ्ट पर विचार करने के बाद ही मंजूरी दी जाएगी।

महाराष्ट्र के स्कूल सिलेबस पर बवाल, सरकार बोली- नहीं पढ़ाएंगे मनुस्मृति की पंक्तियां
Ankit Ojhaलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईTue, 28 May 2024 08:59 AM
ऐप पर पढ़ें

महाराष्ट्र में स्कूल सिलेबस को लेकर बवाल मचा हुआ है। इस बीच महाराष्ट्र सरकार की तरफ से सफाई आई है कि वह महाराष्ट्र राज्य पाठ्यक्रम ढांचे की तरफ से दी गई सारी सिफारिशों को नहीं मानेगी। राज्य के शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि ड्राफ्ट को सरकार की मंजूरी के बिना ही सार्वजनिक करके बड़ी गलती की गई है। इसी वजह से भ्रम की स्थित बनी हुई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक केसरकर ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उचित प्रक्रिया के बिना ही ड्राफ्ट को सार्वजनिक कर दिया गया। 

केसरकर ने मराठी को अनिवार्य भाषा से बाहर करने पर भी खेद जताया। उनके बयान के बाद एससीईआरटी ने बयान जारी किया और कहा कि कक्षा 1 से 10 तक मराठी और अंग्रेजी भाषा, दोनों ही अनिवार्य होंगी। कक्षा 6 से संस्कृत समेत भारतीय और विदेशी भाषाओं का विकल्प मौजूद रहेगा। इसके अलावा 11वीं और 12वीं में दो भाषाएं सीखना जरूरी होगा जिसमें से एक भारतीय और दूसरी विदेशी होनी चाहिए। 

मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केसरकर ने कहा कि 11 और 12 में अंग्रेजी को अनिवार्य भाषा से बाहर इसलिए रखा गया है क्योंकि आगे की तकनीकी शिक्षा को भी आंचलिक भाषा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। बता दें कि पिछले सप्ताह ही स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग ने महाराष्ट्र स्टेट कैरिकुलमम फ्रेमवर्क पेश किया था इसमें स्कूली शिक्षा में भारतीय ज्ञान को लाने की वकालत की गई थी। स्कूली किताबों में भगवद्गीता को भी शामिल करने का ड्राफ्ट तैयार किया गया था। 

इसके अलावा नैतिक शिक्षा का भी अध्याय जोड़ने की शिफारिश की गई थी। हालांकि मनुस्मृति की पंक्तियों को शामिल करने को लेकर बवाल खड़ा हो गया। इस फैसले को दलित और ओबीसी विरोधी बताया गया। केसरकर ने सफाई देते हुए कहा, सरकार ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी लेकिन ड्राफ्ट पहले ही सार्वजनिक हो गया। सरकार इस ड्राफ्ट के साथ आगे नहीं बढ़ने जा रही है।