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Hindi News महाराष्ट्रबिना राम के सीता की प्रतिमा, अयोध्या से पहले यहां बना मंदिर: बेहद खास है सदियों पुराना मंदिर

बिना राम के सीता की प्रतिमा, अयोध्या से पहले यहां बना मंदिर: बेहद खास है सदियों पुराना मंदिर

यावतमल जिले का रावेरी में सीता जी के मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है और नई मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की गई है। यहां सीताजी के साथ श्रीराम नहीं है। इसके पीछे भी एक वजह है।

बिना राम के सीता की प्रतिमा, अयोध्या से पहले यहां बना मंदिर: बेहद खास है सदियों पुराना मंदिर
Ankit Ojhaलाइव हिंदुस्तान,नागपुरSat, 11 Nov 2023 07:27 AM
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अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी को होना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। उससे पहले महाराष्ट्र के यावतमल जिले में एक अनोखे मंदिर का जीर्णोद्धार करवा दिया गया है। मंदिर को अब बेहद भव्य रूप दे दिया गया है। खास बात यह है कि इस मंदिर में सीता जी की प्रतिमा बिना श्री राम के है। दरअसल इस मंदिर में सीता माता को वनवास गमन के बाद की स्थिति में दिखाया गया है। उनके साथ लवऔर कुश भी मौजूद हैं। शायद यह ऐसा इकलौता ही मंदिर है जहां बिना राम-लक्ष्मण के सीता जी की मूर्ती है और उन्हीं की पूजा होती है। यहां के लोगों का कहना है कि यह मंदिर ममत्व का परिचायक है। 

सात नवंबर को जीर्णोद्धार के बाद इस मंदिर में दोबारा मूर्ति स्थापित की गई और प्राण प्रतिष्ठा की गई। सदियों पुराने इस मंदिर की मूर्ति भी जर्जर हो गई थी। अब पुरानी मूर्ति को हटाकर नई मूर्ति भी स्थापित की गई है। शेटकारी संगठन के एक किसान नेता वामनराव चातप ने कहा, एक तरफ सारा ध्यान अयोध्या की तरफ है और दूसरी तरफ हमने सीता जी के मंदिर को पुनः बनवा दिया है। इस संगठ के संस्थापक शरद जोशी ने इस मंदिर की विशेषता को 2001 में सार्वजनिक तौर पर रखा था और एक तस्वीर जारी की थी जिसमें सीता माता का सिंगल मदर के तौर पर दिखाया गया था। 

चातप ने कहा, हम इस मंदिर से प्रेरणा लेते हैं। यहां से पता चलता है कि एक मां में कितनी शक्ति होती है। इस मंदिर को इसीलिए दोबारा बनाया गया क्योंकि य साहस का प्रतीक है। यह सभी सिंगल मदर्स के लिए एक प्रेरणा भी है। खासकर किसान परिवारों में जो विधवाएं हैं. यह उनको शिक्षा देता है। बता दें कि देश में सीता जी के कई मंदिर हैं लेकिन लवकुश के साथ इसी मंदिर में  उनकी मूर्ति है। अयोध्या में भी एक सीतामंदिर है जिसे भव्य रूप दिया जा रहा है। 

वाराणसी के अस्सी घाट में भी एक सीता जी का मंदिर है। बारिश के मौसम में यह मंदिर पानी से ही घिरा रहता है। यहां भी सिर्फ सीता जी की ही मूर्ति विराजमान है। कहा जाता है कि सीता जी यहीं से धरती में समा गई थीं। इस मंदिर का निर्माम 17वीं शताब्दी में करवाया गया गया था। वहीं मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के मुंगावली में एक सीता जी का मंदिर है। मान्यता है कि यहीं लव कुश का जन्म हुआ था। 

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