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24 नवंबर, 2020|8:58|IST

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शिवसेना ने अन्य राज्यों हो रहे साधुओं पर हमले को लेकर मोदी सरकार को घेरा, एक साथ पूछे कई सवाल

sanjay raut

जब-जब धर्म की ग्लानि होती है और अधर्म का प्रभाव बढ़ता है, तब-तब मैं अवतार लेता हूं, ऐसा ईश्वर ने वचन दिया है। ये सभी को पता है। परंतु यह वचन इस कलियुग में कब सत्य होगा? आज देश में हिंदुत्ववादियों का राज है, परंतु धर्म का राज है क्या? यह सवाल ही है। मूलरूप में आपका राज्य सेकुलर क्यों नहीं? ऐसा सवाल महाराष्ट्र के राज्यपाल ने मुख्यमंत्री ठाकरे से ही पूछा है।

उत्तरप्रदेश के हाथरस में एक लड़की की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई। इस पूरे प्रकरण को पहले मीडिया ने, राजनीतिज्ञों ने दावानल की तरह भड़का दिया। अब इसे उन्होंने ही शांत किया। पालघर में दो साधुओं की हत्या भीड़ ने कर दी। इस पर देशभर में तूफान खड़ा किया गया। परंतु बीते लगभग 4 दिनों में उत्तरप्रदेश में 4 साधु और राजस्थान में एक साधु की गोली मारकर हत्या कर दी गई। राजस्थान में तो पुजारी को जिंदा जला दिया गया। मानों कुछ हुआ ही नहीं है, ऐसी स्थिति में मीडिया है। पालघर में साधुओं पर हमला हुआ तब वह अधर्म, परंतु अन्य कहीं यह होता है तब हमेशा की घटना, कैसे संभव है? और ऐसे समय में ईश्वर कहां होता है?

साधुओं की रक्षा के लिए, दुष्ट कृत्य करनेवालों का विनाश करने के लिए और धर्म स्थापना करने के लिए जब-जब आवश्यकता होगी, तब-तब दौड़ते हुए आने के संदर्भ में भगवान आपने वचन दिया है और आपका वचन अर्थात मनुष्यों को फंसाने के लिए दिया गया है, ऐसा कभी भी कोई नहीं कह सकता है। भगवान आपके द्वारा दिए गए वचन में आपने एक भी संदिग्ध शब्द नहीं डाले हैं। उसमें से प्रत्येक शब्द का अर्थ स्पष्ट है। आज कृष्ण और अर्जुन की भूमिका में जो शासक मौजूद हैं। वचन पूरा करने की जिम्मेदारी उन्हीं पर है।

संकट दूर करो!
नरेंद्र मोदी, भगवान कृष्ण और अमित शाह, अर्जुन ऐसा उनके भक्तों को लगता होगा तो उनकी कोई गलती नहीं है लेकिन वास्तव में धर्म स्थापना का, देश पर आए संकट को दूर करने का काम वे करें, इतनी ही अपेक्षा है। बालासाहेब ठाकरे लाखों लोगों के लिए ईश्वरीय अवतार सिद्ध हुए। चीन ने सीमा पर 60 हजार सैनिकों को जमा किया है। युद्ध के लिए तैयार रहो, ऐसा चीनी सैनिकों को आदेश मिला है। चीन नेपाल में घुस गया है। अब उसने नेपाल के सैनिकों पर ही हमला किया है। उसी चीन की मदद से हम कश्मीर में एक बार फिर अनुच्छेद-370 लागू करेंगे, ऐसा डॉ. फारुख अब्दुल्ला ने सरेआम कहा। या तो डॉ. अब्दुल्ला को देश से माफी मांगनी चाहिए अन्यथा केंद्र को ऐसे वक्तव्य पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। डॉ. अब्दुल्ला का बयान सिर्फ बिहार अथवा प. बंगाल के चुनाव प्रचार का मुद्दा नहीं है।

कश्मीर घाटी में किसी को तो चीन के सीधे हस्तक्षेप करने की चाह है व केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से इस पर कोई प्रतिउत्तर नहीं। अब सवाल इतना ही है कि डॉ. अब्दुल्ला जैसे नेताओं को केंद्र सरकार ने पहले जेल में डाला क्योंकि अनुच्छेद-370 हटाने को उनका विरोध था। अब वे बाहर आए तो चीन से मदद की अपेक्षा कर रहे हैं। कश्मीर से लद्दाख ढाई सौ किलोमीटर दूर है व अब लद्दाख सीमा पर चीन के 60 हजार सैनिक लाकर खड़े कर दिए गए हैं। ये सैनिक कश्मीर तक आएं और अनुच्छेद-370 एक बार फिर लागू करने में मदद करें, ऐसा बोलना सीधे राष्ट्रद्रोह ही है। देशांतर्गत हालात हाथ से बाहर जाने के ये चिह्न हैं।
 

अधर्म कहां?
जहां भाजपा का राज नहीं है वहां अधर्म हो रहा है, ऐसा प्रोपेगेंडा किया जा रहा है व जो भाजपा को अपेक्षित धर्म का राज लाने का विरोध करते हैं, उन्हें तुरंत ही निपटा देना चाहिए। ऐसा कुछ प्रमुख लोगों को लगता है। प. बंगाल में एक भाजपा पदाधिकारी की हत्या हो गई। यह दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन इसके विरोध में हजारों भाजपा कार्यकर्ताओं को जुटाकर कोलकाता स्थित मंत्रालय की ओर ले जाया गया। इससे कानून और सुव्यवस्था की चुनौती निर्माण होगी और इसका राजनीतिक लाभ विधानसभा चुनाव में लिया जा सकेगा। भाजपा की ये राजनैतिक नीति ठीक है लेकिन प. बंगाल हिंदुस्थान का ही एक हिस्सा है। इसे केंद्र भूल नहीं सकता है।

महाराष्ट्र की महाविकास आघाडी की सरकार भी आंखों में चुभती है और सरकार द्वारा लिया गया हर निर्णय उन्हें देश विरोधी लगता है। इसलिए महाराष्ट्र की सरकार दिसंबर तक बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लाद दिया जाएगा, ऐसी भविष्यवाणी प्रकाश आंबेडकर ने व्यक्त कर रखी है। इससे पहले प्रमुख नेताओं को ‘निपटा डालो’ यह नीति अमल में लानी है। मूलरूप से दिल्ली के शासकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी राज्य में भाजपा विरोधी सरकार स्थापित होना यह कोई संविधान विरोधी नहीं है लेकिन जहां आपकी विरोधी सरकारें हैं, उन राज्यों में पॉलिटिकल एजेंट की हैसियत से राज्यपाल को नियुक्त करना व राज्यपाल के कंधे पर बंदूक रखकर राज्य को अस्थिर करना, ये नीति अच्छे राज्यकर्ता को शोभा नहीं देती।

प. बंगाल में राज्यपाल धनखर, ममता बनर्जी के विरोध में रोज नया मोर्चा खोलते हैं। ममता बनर्जी भी लड़ाई में पीछे नहीं हटती हैं। दिल्ली में केजरीवाल बनाम राज्यपाल का झगड़ा है ही। पंजाब में जुझारू सिख समाज यदि आक्रोशित हो गया तो गड़बड़ हो जाएगी इसलिए वहां किसी की हिम्मत नहीं होती है। महाराष्ट्र में राज्यपाल द्वारा प्रयास करने के बावजूद ‘ठाकरे सरकार’ स्थिर है। राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार को अस्थिर करने के तमाम प्रयास विफल हो गए। यह सच्चाई है। महाराष्ट्र की तुलना में गंभीर समस्या गुजरात, हरियाणा जैसे राज्यों में खड़ी हुई।

गुजरात में भी सोमनाथ, अक्षरधाम जैसे मंदिर बंद हैं लेकिन महाराष्ट्र के मंदिर बंद हैं इसलिए राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को आलोचनात्मक पत्र लिखा। आखिर राज्य के मुख्यमंत्री के पद पर ‘ठाकरे’ हैं, इसका विस्मरण उन्हें हो गया और आगे की महाभारत हुई। एकछत्र सत्ता स्थापित करने में जो आड़े आएंगे, उन्हें जो मिले उन हथियारों से दूर कर दो। यह एक आपातकाल जैसी ही नीति साकार द्वारा की जा रही है। महाराष्ट्र में सरकार स्थापित करने में बाधा बननेवाले, शरद पवार से लेकर संजय राऊत तक सभी को ‘निपटा लो’, यह नया एजेंडा अमल में लाना है। सुशांत प्रकरण में शिवसेना के युवा नेताओं को निपटाने का प्रयास हुआ, वह उन्हीं पर उलट गया। कुछ भी हो जाए लेकिन सत्ता चाहिए व इसके लिए किसी भी स्तर पर जाना है। सीबीआई, इनकम टैक्स, ईडी आदि का उपयोग करना है। यह तो रूस, चीन से भी भयंकर चल रहा है। बिहार चुनाव के बाद नीतीश कुमार को ही निपटाया जाएगा, ऐसी स्थिति है। बिहार में चिराग पासवान की पार्टी ने स्वतंत्र चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है उसके पीछे का सूत्र यही है।

संकट ही संकट
बिहार चुनाव में क्या होगा? इसको लेकर सभी में उत्सुकता है। बिहार के चुनाव एकतरफा नहीं होंगे, यह स्पष्ट हो गया है। लालू यादव जेल में हैं लेकिन उनके पुत्र तेजस्वी यादव ने विगत कुछ महीनों में पूरे बिहार का दौरा करके माहौल तैयार किया है। चिराग पासवान ने नीतीश कुमार के ‘जदयू’ के विरोध में सर्वत्र प्रत्याशी खड़े करने का निर्णय लिया है। ऐसा हुआ तो भाजपा विधायकों की संख्या जदयू से ज्यादा हो जाएगी, यह तो तय ही है। बिहार में ऐसे समय में राजभवन ही सत्ता का केंद्र बिंदु बन सकता है व राजनैतिक विरोधियों को निपटाने के खेल में राज भवन का महत्व बढ़ जाएगा। ऐसे समय में धर्म की रक्षा के लिए परमेश्वर क्या करेंगे, यह देखना होगा। बिहार की स्थिति आज अच्छी नहीं है। पिछड़ा राज्य होने के कारण अधिक मदद मिले, ऐसी मुख्यमंत्री की मांग है। यह कैसा लक्षण है?

इस चुनाव प्रचार में मजेदार बात यह है कि नीतीश कुमार बिहार में 15 साल से राज कर रहे हैं लेकिन नीतीश कुमार लालू यादव से ‘हिसाब’ मांग रहे हैं। बिहार में अपराध बढ़ा है, इसका जवाब सुशील मोदी, राहुल गांधी से मांग रहे हैं। मुख्य बात ये है कि बीच के दौर में नीतीश कुमार और लालू यादव ने साथ में मिलकर सरकार भी बनाई थी। इस सबके बीच निपटाई गई बेचारी जनता! यह दृश्य सिर्फ बिहार का ही नहीं है, बल्कि पूरे देश का है। हिंदुस्थान के लोगों पर फिलहाल इतने संकट टूट रहे हैं कि इससे हिंदुस्थान कभी सिर बाहर निकाल पाएगा, ऐसी आशा शायद ही शेष बची है। इसमें चीन ने 60 हजार सैनिक लद्दाख सीमा पर खड़े किए हैं। युद्ध देश में व बाहर होगा। निपटाने का खेल रुकेगा, तभी देश सुरक्षित रहेगा।

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  • Web Title:Shiv Sena attacks on Modi government on attacks on sadhus in other states many questions asked simultaneously