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Hindi News महाराष्ट्रन केवल हमारा चुनाव चिह्न छीना, हमारी पार्टी भी दूसरों को दे दी; शरद पवार का छलका दर्द

न केवल हमारा चुनाव चिह्न छीना, हमारी पार्टी भी दूसरों को दे दी; शरद पवार का छलका दर्द

शरद पवार ने कहा कि आयोग का फैसला आश्चर्यजनक था। क्योंकि आयोग ने उन लोगों के हाथों से पार्टी को छीन लिया, जिन्होंने इसे बनाया और उसे किसी और को थमा दिया। 

न केवल हमारा चुनाव चिह्न छीना, हमारी पार्टी भी दूसरों को दे दी; शरद पवार का छलका दर्द
Gaurav Kalaपीटीआई,पुणेSun, 11 Feb 2024 07:41 PM
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एनसीपी पर कुछ दिन पहले निर्वाचन आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए पार्टी का चिह्न और नाम अजीत पवार के पास थमा दी। उधर, शरद पवार सिर्फ देखते रह गए। आयोग के फैसले ने शरद पवार को बैचेन कर दिया है। अब उनका कहना है कि फैसला आश्चर्यजनक था। क्योंकि आयोग ने उन लोगों के हाथों से पार्टी को छीन लिया, जिन्होंने इसे बनाया और उसे किसी और को थमा दिया। 

बता दें कि इस महीने की शुरुआत में निर्वाचन आयोग ने एनसीपी को लेकर बड़ा फैसला लिया। आयोग ने आधिकारिक रूप से एनसीपी का नाम और अलार्म घड़ी अजीत पवार को थमा दी। आयोग के मुताबिक, चाचा शरद पवार और भतीजे अजीत पवार के बीच एनसीपी में वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी। इस मामले में छह महीने के दरम्यान 10 बार की सुनवाई हुई और आयोग ने एनसीपी अजीत पवार को थमा दी। आयोग के मुताबिक, अजीत के पास पार्टी के विधायकों का ज्यादा समर्थन था। 

इस प्रकरण पर हालांकि शरद पवार खेमा सुप्रीम कोर्ट में अपील कर चुका है। लेकिन, शरद पवार आयोग के इस फैसले से बैचेन हैं। शरद पवार ने रविवार को कहा कि अजीत पवार के नेतृत्व वाले समूह को एनसीपी का नाम और चुनाव चिह्न आवंटित करने का चुनाव आयोग का निर्णय "आश्चर्यजनक" था क्योंकि चुनाव आयोग ने उन लोगों के हाथों से पार्टी को "छीन" लिया है, जिन्होंने इसे स्थापित किया था। 

उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि लोग चुनाव आयोग के फैसले का समर्थन नहीं करेंगे, जिसके खिलाफ हमने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।" उन्होंने कहा, चुनाव आयोग ने न सिर्फ हमारा चुनाव चिह्न छीना बल्कि हमारी पार्टी भी दूसरों को सौंप दी।

1999 में एनसीपी की स्थापना करने वाले शरद पवार ने कहा, "चुनाव आयोग ने उन लोगों के हाथों से पार्टी छीन ली जिन्होंने इसे स्थापित किया और इसे बनाया और इसे दूसरों को दे दिया। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।"

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