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Hindi News महाराष्ट्रPM नरेंद्र मोदी ने लोकमान्य तिलक की विरासत से सावरकर को जोड़ा, मंच पर थे दिग्गज कांग्रेसी

PM नरेंद्र मोदी ने लोकमान्य तिलक की विरासत से सावरकर को जोड़ा, मंच पर थे दिग्गज कांग्रेसी

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकमान्य तिलक और वीर सावरकर के रिश्तों का भी जिक्र किया। स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की पढ़ाई के दिनों की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें तिलक जी ने बहुत मदद की थी।

PM नरेंद्र मोदी ने लोकमान्य तिलक की विरासत से सावरकर को जोड़ा, मंच पर थे दिग्गज कांग्रेसी
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान,पुणेTue, 01 Aug 2023 01:45 PM
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पीएम नरेंद्र मोदी को पुणे में लोकमान्य तिलक नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के बाद वह तीसरे पीएम हैं, जिन्हें यह सम्मान दिया गया है। इस मौके पर पीएम मोदी ने ऐलान किया कि वह सम्मान के साथ मिली एक लाख रुपये की राशि को गंगा जी को समर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि तिलक जी के तो नाम में ही गंगाधर था। इसलिए मैं इसे नमामि गंगे परियोजना के लिए देता हूं। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने लोकमान्य तिलक और वीर सावरकर के रिश्तों का भी जिक्र किया। स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की पढ़ाई के दिनों की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें तिलक जी ने बहुत मदद की थी।

उनकी मदद से ही वीर सावरकर जैसी शख्सियत तैयार हो सकी थी। इस मौके पर कांग्रेस के सीनियर नेता सुशील कुमार शिंदे मंच पर ही मौजूद थे। इसके अलावा आयोजनकर्ता रोहित तिलक भी कांग्रेस के नेता ही हैं। पीएम मोदी ने काफी समय तक वीर सावरकर और तिलक के रिश्तों की चर्चा की। यह इसलिए अहम है क्योंकि राहुल गांधी समेत कांग्रेस का नेतृत्व अकसर वीर सावरकर पर हमला करता रहा है। उनके नाम में वीर जोड़े जाने का भी विरोध करता रहा है। इसलिए पीएम नरेंद्र मोदी का तिलक के साथ सावरकर का रिश्ता बताना मायने रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों को कुछ क्रांतिकारियों के नाम से किसी परियोजना की पहचान होने से भी दिक्कत होती है।

तिलक ने ही दिलाई थी वीर सावरकर को स्कॉलरशिप

प्रधानमंत्री ने कहा, 'लोकमान्य तिलक इस बात को भी जानते थे कि आजादी का आंदोलन हो या राष्ट्र निर्माण का मिशन हो। भविष्य की जिम्मेदारी हमेशा युवाओं के कंधों पर होती है। वह भारत के भविष्य के लिए शिक्षित और सक्षम युवाओं का निर्माण चाहते थे। उनमें प्रतिभाओं को पहचानने की दिव्य शक्ति थी। सावरकर जी की क्षमता को तिलक जी ने ही पहचाना। वह चाहते थे कि बाहर जाकर सावरकर अच्छी पढ़ाई करें और फिर लौटकर आजादी के लिए काम करें।' पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिटेन में ऐसे ही युवाओं के लिए श्यामजी कृष्ण वर्मा स्कॉलरशिप चलाते थे। उनसे सावरकर के लिए तिलक जी ने सिफारिश की थी। 

PM मोदी ने बताया किस्सा- जब तिलक को सुनने आई भीड़ में थे सरदार पटेल

तिलक जी की इतनी लोकप्रियता थी कि जब वह अहमदाबाद गए तो 40 हजार से ज्यादा लोग आए थे। उन्हें सुनने आने वाले लोगों में सरदार पटेल भी थे। इसके बाद जब सरदार पटेल अहमदाबाद नगर पालिका के अध्यक्ष बने तो उन्होंने तिलक जी की मूर्ति लगाने का फैसला लिया। इसके लिए सरदार पटेल ने जो जगह चुनी थी, वह जगह विक्टोरिया गार्डन थी। इस गार्डन को 1857 में महारानी के सम्मान में बनाया गया था। यह मूर्ति 1929 में लगी तो महात्मा गांधी ने उसका लोकार्पण किया। अहमदाबाद में रहते हुए मैं वहां कई बार गया और तिलक जी की प्रतिमा के आगे सिर झुकाने का अवसर मिला।