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Hindi News महाराष्ट्रसदन से सड़क तक मुश्किलों में घिरे मनोज जारांगे: CM शिंदे की सख्त चेतावनी- झूठे आरोप नहीं करेंगे बर्दाश्त 

सदन से सड़क तक मुश्किलों में घिरे मनोज जारांगे: CM शिंदे की सख्त चेतावनी- झूठे आरोप नहीं करेंगे बर्दाश्त 

Maharashtra Politics: मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए हैं। महाराष्ट्र के बीड जिले में बिना अनुमति के समर्थकों के विरोध प्रदर्शन करने और दो अलग-अलग स्थानों पर सड़क बंद

सदन से सड़क तक मुश्किलों में घिरे मनोज जारांगे: CM शिंदे की सख्त चेतावनी- झूठे आरोप नहीं करेंगे बर्दाश्त 
Pramod Kumarयोगेश नाइक, हिन्दुस्तान टाइम्स,मुंबईTue, 27 Feb 2024 02:15 PM
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन करने वाले मराठा कार्यकर्ता मनोज जारांगे को चेतावनी देते हुए कहा है कि जो कोई भी निचले स्तर तक गिरकर झूठे आरोप लगा रहा है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, सीएम ने मनोज जारांगे का नाम नहीं लिया लेकिन मंगलवार को शिंदे ने विधान परिषद में ये बातें तब कहीं, जब सदन में बीजेपी के विधायकों ने जारंगे के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा, "हमने बिना किसी वर्ग के साथ अन्याय किए मराठों को अलग से 10 फीसदी आरक्षण दिया है लेकिन कुछ लोग कह रहे हैं कि अगर इस आरक्षण को चुनौती दी गई तो यह अदालत में टिक नहीं पाएगा। इसका कोई आधार नहीं है।" 

उन्होंने कहा, "हमने मराठा समुदाय के उन लोगों को आरक्षण का लाभ दिया है, जिनका उल्लेख कुनबी जाति के रूप में था। इस काम के लिए लगभग 2.5 लाख कर्मचारियों को काम पर लगाया था।" उन्होंने कहा कि मराठों ने अतीत में आरक्षण के लिए बड़े मोर्चे निकाले थे और वे शांतिपूर्ण रहे थे। जारांगे पर निशाना साधते हुए शिंदे ने कहा कि जारांगे पाटिल की मांगें बदलती रहीं है। वह सभी मराठों के लिए कुनबी जाति के तहत आरक्षण चाहते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जारांगे ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा मराठों को दिया गया आरक्षण अदालतों में नहीं टिक पाएगा। इसके अलावा जारांगे ओबीसी कोटा के तहत ही मराठों को आरक्षण देने की मांग कर रहे थे, जबकि सरकार ने मराठों को लिए 10 फीसदी अलग से आर7ण दिया है। सीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने यह साबित किया है कि मराठा आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े थे। इसके अलावा कई मराठों में भी भूमिहीन, छोटे भूमि धारक, डब्बेवाला और मथाडी श्रमिक भी शामिल हैं। इसलिए सामाजिक-आर्थिक तौर पर पिछड़े होने के आधार पर उन्हें भी आरक्षण दिया गया है।

शिंदे ने कहा कि कई दलों के नेताओं के पास मराठों को आरक्षण देने का मौका था, लेकिन उन्होंने उनके लिए कुछ नहीं किया और मराठों के नाम का उपयोग करके राजनीतिक मलाई खाते रहे। शिंदे ने कहा, ''मैंने छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर शपथ ली थी कि मैं ओबीसी के आरक्षण को छुए बिना आरक्षण दूंगा।'' उन्होंने 2014 से 2019 के बीच देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा शिक्षा में दी गई कई रियायतों की भी चर्चा की।शिंदे ने कहा कि उनमें हाल ही में 5000 मराठों को कोटा में रोजगार देने का साहस है और कहा कि अगर कोई अदालत जाएगा तो वह उनका समर्थन करेंगे।

शिंदे ने कहा कि उन्होंने आंदोलन के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाते हुए और प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए दो बार जारांगे से मुलाकात की लेकिन आंदोलनकारियों ने विधायकों और राजनेताओं के घरों को जला दिया और राज्य परिवहन की बसों में आग लगा दी। ऐसे में वह चुपचाप नहीं रह सकते थे।

इस बीच, मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए हैं। महाराष्ट्र के बीड जिले में बिना अनुमति के समर्थकों के विरोध प्रदर्शन करने और दो अलग-अलग स्थानों पर सड़क बंद करने के लिए मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी।

एक अधिकारी ने बताया कि दोनों घटनाओं में जरांगे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे, लेकिन उनके समर्थक उनकी अपील पर सड़कों पर उतर आए थे, इसलिए उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए। लगभग 80 लोगों के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 135 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारी ने बताया कि शनिवार को शिरूर गांव के जतनंदूर फाटा और बीड जिले के पटोदा में बीड-अहमद नगर रोड पर विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए थे और सड़कें अवरुद्ध कर दी गईं। अधिकारी ने कहा, "चूंकि जरांगे की अपील पर विरोध प्रदर्शन किया गया था, इसलिए उनका नाम भी अन्य लोगों के साथ आरोपी के रूप में शामिल किया गया है।"

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