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Hindi News महाराष्ट्रमराठाओं को अधूरा आरक्षण नहीं चाहिए, बुधवार से पानी पीना भी बंद; हिंसक प्रदर्शनों के बीच डटे मनोज जरांगे

मराठाओं को अधूरा आरक्षण नहीं चाहिए, बुधवार से पानी पीना भी बंद; हिंसक प्रदर्शनों के बीच डटे मनोज जरांगे

मनोज जरांगे ने मराठवाड़ा क्षेत्र में मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने के फैसले पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'आरक्षण देने में चयनात्मक न हों। सभी मराठों को यह सर्टिफिकेट दें।'

मराठाओं को अधूरा आरक्षण नहीं चाहिए, बुधवार से पानी पीना भी बंद; हिंसक प्रदर्शनों के बीच डटे मनोज जरांगे
Niteesh Kumarएजेंसी,मुंबईTue, 31 Oct 2023 11:46 PM
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आरक्षण के लिए आंदोलनरत सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे अपनी मांगों पर डटे हुए हैं। उन्होंने मंगलवार को कहा कि मराठा समुदाय अधूरा आरक्षण स्वीकार नहीं करेगा और महाराष्ट्र सरकार को इस मुद्दे पर राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। उन्होंने धमकी दी कि अगर मराठा समुदाय को पूर्ण आरक्षण नहीं दिया गया तो वे बुधवार शाम से पानी पीना बंद कर देंगे। जरांगे ने कहा कि सरकार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मराठा युवाओं को परेशान नहीं करना चाहिए, नहीं तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में 25 अक्टूबर से अनशन कर रहे जरांगे ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान के लिए उनकी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा कि बीड में हिंसा के अपराधियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत आरोपों का सामना करना पड़ेगा।

जरांगे ने मराठवाड़ा क्षेत्र में मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने के राज्य मंत्रिमंडल के फैसले पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'आरक्षण देने में चयनात्मक न हों। सभी मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र दें। अधिकारियों को इन (कुनबी) प्रमाणपत्रों को वितरित नहीं करना चाहिए (जैसा कि सरकार ने घोषित किया है)। सरकार को जस्टिस शिंदे समिति की पहली रिपोर्ट स्वीकार करनी चाहिए और मराठा आरक्षण पर निर्णय लेने के लिए विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाना चाहिए।' उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बीड में गरीब मराठा युवाओं को परेशान नहीं किया जाए, नहीं तो हम उचित जवाब देंगे।

घरों को जलाने की कोशिश
गृह विभाग संभालने वाले फडणवीस ने कहा कि जिन आंदोलनकारियों ने बीड जिले में परिवार के सदस्यों के साथ घरों को जलाने की कोशिश की, उन पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया जाएगा। जरांगे ने कहा, 'हम नहीं जानते कि बीड में हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार है। ऐसा लगता है कि सरकार नहीं चाहती कि महाराष्ट्र शांतिपूर्ण रहे। आप पूर्ण आरक्षण कब देंगे? मैं बुधवार से पानी पीना बंद कर दूंगा और मुख्यमंत्री और उनके दो उपमुख्यमंत्री इस नतीजे के लिए जिम्मेदार होंगे जबकि एक उपमुख्यमंत्री (फडणवीस) इसके लिए अधिक जिम्मेदार होंगे।' जरांगे आरक्षण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उनसे फोन पर बात की और आश्वस्त किया कि मंगलवार को दिन में कैबिनेट की बैठक में मराठा समुदाय को कुनबी जाति प्रमाणपत्र दिए जाने के बारे में फैसला किया जाएगा, जिसके बाद उन्होंने जालना जिले में अपने गांव अंतरवाली सराटी में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।

कृषक समुदाय है कुनबी
कुनबी एक कृषक समुदाय है और यह समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण पाने का पहले से ही हकदार है। जरांगे ने कहा, 'मैंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से बात की है। मैंने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है कि मराठों के लिए अधूरा आरक्षण स्वीकार्य नहीं होगा। सरकार को समूचे राज्य में मराठाओं के लिए आरक्षण की घोषणा करनी चाहिए। हम (समूचे राज्य के मराठा) भाई हैं और हमारा खून का नाता है।' उन्होंने कहा कि समुदाय के केवल कुछ वर्ग को आरक्षण स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा, '60-65 प्रतिशत मराठा पहले से ही आरक्षण के दायरे में हैं। सरकार को इसे बढ़ाकर राज्य में शेष मराठाओं को भी इसमें शामिल करना चाहिए। इसके लिए सरकार को विशेष सत्र बुलाना चाहिए, विधेयक पारित करना चाहिए, इस उद्देश्य के लिए नियुक्त समिति की पहली रिपोर्ट को स्वीकार करना चाहिए और उन्हें (कुनबी) प्रमाणपत्र देना चाहिए।'

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