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Hindi News महाराष्ट्रकिसी का होगा राजनीतिक संन्यास तो किसी को झटका, महाराष्ट्र में बहुत कुछ बदलेगा राज्यसभा चुनाव

किसी का होगा राजनीतिक संन्यास तो किसी को झटका, महाराष्ट्र में बहुत कुछ बदलेगा राज्यसभा चुनाव

महाराष्ट्र में राज्यसभा के लिए सियासी घमासान का स्टेज सेट हो चुका है। यहां शिवसेना, भाजपा और अजित पवार गुट की एनसीपी का महाराष्ट्र विकास अघाड़ी से मुकाबला है। यहां पर मुकाबला दिलचस्प होगा।

किसी का होगा राजनीतिक संन्यास तो किसी को झटका, महाराष्ट्र में बहुत कुछ बदलेगा राज्यसभा चुनाव
Deepakलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईSun, 04 Feb 2024 12:36 AM
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महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है। इसके साथ ही 19 सीटों वाले इस प्रदेश में छह सीटों पर 27 फरवरी को चुनाव होने वाले हैं।  यह चुनाव कई राजनीतिक दिग्गजों के लिए संन्यास की राह बनाएगा। वहीं, कुछ को झटका भी लग सकता है। ऐसी खबरें हैं कि इस बार भाजपा नारायण राणे और प्रकाश जावड़ेकर को मैदान में नहीं उतार रही है। अगर ऐसा होता है तो नारासण राणे के राजनीतिक करियर का यह अंत हो सकता है। इसके अलावा प्रकाश जावड़ेकर के लिए यह किसी झटके से कम नहीं होगा। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे और वी मुरलीधरन, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (भाजपा), अनिल देसाई (शिवसेना), वंदना चव्हाण (एनसीपी) और कुमार केतकर (कांग्रेस) का कार्यकाल 2 अप्रैल को खत्म हो रहा है। 

यह भी गौर करने वाली बात है कि शिवसेना के भी दो गुट हो चुके हैं। एक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली और दूसरी उद्धव ठाकरे वाली। अनिल देसाई, जो ठाकरे के करीबी माने जाते हैं, उनके मुंबई से लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना है। दूसरी तरफ दो गुटों में बंटी एनसीपी के पास भी इतनी ताकत नहीं है कि पुणे की मेयर रह चुकी वंदना चव्हाण को राज्यसभा में वापस ला सके। इसके बजाए अजित पवार अपने बेटे पार्थ या फिर करीबी व रायगढ़ सांसद सुनील ततकरे को चुनाव लड़ा सकते हैं। अगर ततकरे राज्यसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरते हैं तो रायगढ़ सीट भाजपा के खाते में जा सकती है, जो वहां से पूर्व विधायक धैर्यशील पाटिल को उम्मीदवार बना सकती है। 

इसी तरह वरिष्ठ पत्रकार और संपादक केतकर को दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना नहीं है। प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहाकि इसके बारे में दिल्ली से ही फैसला होगा। वहीं, भाजपा मजबूत स्थिति में है, इसके बावजूद मुरलीधरन के अलावा किसी अन्य की उम्मीदवारी निश्चित नहीं है। इंडिया टुडे के मुताबिक एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि राणे और जावड़ेकर मैदान से हट सकते हैं। संभावनाएं ऐसी है कि राणे का छोटा बेटा नीतेश बाद में प्रदेश सरकार की कैबिनेट में शामिल कर लिया जाए। पूर्व मंत्री विनोद तावड़े का नाम भी चर्चा में हैं। अगर राज्यसभा नहीं, तो तावड़े को लोकसभा के लिए उत्तरी मुंबई से टिकट दिया जा सकता है। दूसरी तरफ शिंदे गुट शिवसेना की बात करें तो उनके पास 39 विधायकों के अलावा 10 निर्दलीयों का समर्थन है। शिंदे गुट के विधायक अनिल बाबर का जनवरी में निधन हो गया था। 

शिंदे पूर्व कांग्रेसी मंत्री मिलिंद देवड़ा को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट कर सकती है। माना जा रहा है कि देवड़ा दिल्ली में शिंदे गुट का चेहरा होंगे। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सदस्य हैं। बाबर की मौत और भाजपा के गोवर्धन शर्मा व कांग्रेस सुनील केदार के डिसक्वॉलीफिकेशन के चलते तीन सीटें खाली हैं। भाजपा के पास 13 निर्दलीय विधायकों के समर्थन के साथ 105 सदस्य हैं जबकि शिवसेना के ठाकरे गुट के पास 16 विधायक हैं। एनसीपी में शरद पवार खेमे के पास करीब 11 विधायकों का समर्थन है, जबकि निर्दलीय सहित 44 विधायक भतीजे अजित गुट के हैं। कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए करीब 42 वोट हासिल करने होंगे। 

शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने कहा कि वे उम्मीदवार को मैदान में उतारकर जबरदस्ती चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि उनके पास संख्या बल नहीं है। चुनाव की स्थिति में शिवसेना के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट का व्हिप भी उन पर लागू होगा। इसकी वजह यह है कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने शिंदे के वफादार भरतशेत गोगावाले को शिवसेना का चीफ व्हिप नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। इस व्हिप की अवहेलना करने पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 16 विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू की जाएगी। वहीं, भाजपा चौथे उम्मीदवार को भी मैदान में उतारने की सोच में है। पार्टी नेताओं का दावा है कि राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के कुछ नेता और विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। पहले से ही ऐसी अफवाहें हैं कि मुंबई का एक कांग्रेस विधायक अपने पूर्व मंत्री पिता के साथ अजित के नेतृत्व वाली एनसीपी में शामिल हो सकता है।

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