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Hindi News महाराष्ट्रकांग्रेस के पूर्ण रणनीतिकार ने ही कराई अशोक चव्हाण की BJP में एंट्री, लिखी थी शिवसेना में भी बगावत की स्क्रिप्ट

कांग्रेस के पूर्ण रणनीतिकार ने ही कराई अशोक चव्हाण की BJP में एंट्री, लिखी थी शिवसेना में भी बगावत की स्क्रिप्ट

जून-जुलाई 2022 में शिंदे समेत कई विधायक शिवसेना से अलग हो गए थे। बाद में भारत निर्वाचन आयोग यानी ECI ने शिंदे की अगुवाई वाले खेमे को शिवसेना नाम और तीर कमान चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी।

कांग्रेस के पूर्ण रणनीतिकार ने ही कराई अशोक चव्हाण की BJP में एंट्री, लिखी थी शिवसेना में भी बगावत की स्क्रिप्ट
Nisarg Dixitलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईMon, 19 Feb 2024 01:30 PM
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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज रहे अशोक चव्हाण अब भाजपाई हो चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस का 'हाथ' छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। अब कहा जा रहा है कि उनका यह प्लान काफी पुराना था, लेकिन इसपर अंतिम मुहर उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ एक पूर्व कांग्रेस नेता के आवास पर हुई बैठक में लगी।

कैसे भाजपा में आए चव्हाण?
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, चव्हाण लंबे समय से भाजपा में जाने की योजना बना रहे थे।  इसके बाद उन्होंने फडवणीस के साथ राजनीतिक कार्यकर्ता अशीष कुलकर्णी के आवास पर बैठक की थी।

कौन हैं आशीष कुलकर्णी
दरअसल, कुलकर्णी कभी शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के भरोसेमंद रहे थे। हालांकि, बाद में उन्होंने नारायण राणे के साथ शिवसेना से किनारा कर लिया था। इसके बाद वह कुछ समय के लिए कांग्रेस में पहुंचे और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के लिए रणनीतिकार के तौर पर काम किया। कांग्रेस के बाद उन्होंने फडणवीस के साथ काम करना शुरू किया।

हालांकि, यहां भी साथ ज्यादा लंबा नहीं चला और कहा जाता है कि राजनीतिक कद बढ़ाने के लिए वह एकनाथ शिंदे कैंप में शामिल हो गए थे।

कैसे लिखी शिवसेना में बगावत की स्क्रिप्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिंदे के साथ-साथ उन विधायकों की पहचान करने वालों में कुलकर्णी भी थे, जो दल बदलने के बारे में सोच रहे थे। कहा जाता है कि तब की अविभाजित शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे के खेमे से 40 विधायकों को लाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। जून-जुलाई 2022 में शिंदे समेत कई विधायक शिवसेना से अलग हो गए थे।

बाद में भारत निर्वाचन आयोग यानी ECI ने शिंदे की अगुवाई वाले खेमे को शिवसेना नाम और तीर कमान चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी थी। जबकि, ठाकरे की पार्टी का नाम शिवसेना (UBT) हुआ और उन्हें चुनाव चिह्न मशाल मिला।

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