Hindi Newsमहाराष्ट्र न्यूज़slight penetration is also rape HC said testimony of minor victims is enough
प्राइवेट पार्ट छूना भी रेप, हाई कोर्ट बोला- नाबालिग पीड़िताओं का बयान ही काफी है

प्राइवेट पार्ट छूना भी रेप, हाई कोर्ट बोला- नाबालिग पीड़िताओं का बयान ही काफी है

संक्षेप:

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने कहा है कि अगर कोई प्राइवेट पार्ट को गलत भावना से छूता भी है तो यह रेप की श्रेणी में ही आता है। पॉक्सो के मामले में कोर्ट ने आरोपी की सजा बरकरार रखी है। 

Tue, 21 Oct 2025 07:23 AMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने कहा है कि अगर कोई बच्चों के साथ थोड़ी भी अश्लील हरकत करता है तो इसे रेप की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। 38 साल के आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि उसने 5 और 6 साल कि बच्चियों के साथ गंदी हरकत की थी। ऐसे में यह पॉक्सो का मामला है। कोर्ट ने आरोपी की 10 साल की सजा को बरकरार रखा है।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

आरोपी पेशे से ड्राइवर है और वह वर्द्धा जिले के हिंगंघाट का रहने वाला है। जस्टिस निवेदिता मेहता ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़िता को किसी भी तरह से सेक्शुअल इंटेंशन से छूने या फिर सेक्स की कोशिश करने से मामला रेप की श्रेणी में आ जाता है।

जानकारी के मुताबिक आरोपी ने अमरूद का लालच देकर बच्चियों के पास बुलाया था और फिर उन्हें अश्लील वीडियो दिखाया। आरोपी ने उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। आरोपी पर पॉक्सो ऐक्ट और आईपीसी की धारा 376 (2) (i) व 511 के तहत केस दर्ज किया गया था। आरोपी पर निचली अदालत ने 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

जस्टिस मेहता ने कहा कि पीड़िताओं और उनकी मां के बयन और फरेंसिक सबूतों से पता चलता है कि उनके साथ यौन उत्पीड़न की कोशिश हुई थी। उन्होंने कहा, घटना के 15 दिन बाद मेडिकल एग्जामिनेशन होने की वजह से पीड़िता के प्राइवेट पार्ट पर चोट का निशान नहीं मिला। इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी ने यौन उत्पीड़न नहीं किया। वहीं आरोपी ने अपनी याचिका में कहा था कि पीड़िता के परिवार के साथ पुरानी दुश्मनी होने की वजह से उसपर निराधार आरोप लगाए गए हैं।

जस्टिस मेहता ने कहा कि घटना के वक्त पॉक्सो ऐक्ट में जो प्रावधान थे, उसी के मुताबिक सजा भी मिलनी चाहिए। अगस्त 2019 में कानून में सुधार केबाद कम से कम 20 साल की सजा का प्रावधान किया गया था। वहीं बेंच ने कहा कि आरोपी को 10 साल की सश्रम कैद पर्याप्त है।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज , धर्म ज्योतिष , एजुकेशन न्यूज़ , राशिफल और पंचांग पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।