
गठबंधन का लालच देकर अंधेरे में रखा, शिवसेना शिंदे गुट का भाजपा पर आरोप
महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता में बैठी भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट के बीच में खींचतान जारी है। शिंदे गुट की पुणे इकाई की तरफ से आरोप लगाए गए हैं कि भाजपा ने आखिरी समय तक गठबंधन का लालच देकर उन्हें अंधेरे में रखा, जिसकी वजह से उनके उम्मीदवार फॉर्म जमा नहीं कर पाए।
महाराष्ट्र की राजनीति में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उलझी राजनीति, लोकल चुनावों में और भी ज्यादा खिंचती नजर आ रही है। मुख्य तौर पर महायुति और महा विकास अघाड़ी दोनों ही आपसी तनातनी से जूझ रहे हैं। वर्तमान में पुणे में होने वाले लोकल बॉडी के चुनावों को लेकर शिवसेना शिंदे गुट ने भाजपा पर गुमराह करने का आरोप लगाया है।
शिवसेना की पुणे इकाई के प्रमुख धांगेकर ने कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन की चर्चा की वजह से ही पार्टी सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े होने में समर्थ नहीं हो पाई। उन्होंने कहा, "मैं पहले दिन से कह रहा हूं कि भाजपा हमारे साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्हें लगता है कि पुणे में वह ही एकमात्र ताकतवर पार्टी हैं। दुर्भाग्य से हमारे पदाधिकारी गुमराह हो गए और भाजपा के जाल में फंस गए।"
घांगेकर ने कहा कि लंबी खिंचती गठबंधन की चर्चा और फिर असमंजस की स्थिति के बीच आखिरी समय तक भी सभी उम्मीदवार अपने फार्म जमा नहीं कर पाए। उन्होंने कहा, "हालांकि हमारे 110 उम्मीदवार मैदान में उतरने में कामयाब रहे।"
राज्य और केंद्र में सत्ता में एक साथ बैठीं दोनों पार्टियों के बीच स्थानीय स्तर पर ज्यादा तनाव देखने को मिल रहा है। अपनी आलोचना को एक कदम आगे बढ़ाते हुए धांगेकर ने भाजपा की पुणे इकाई पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि शहर में पार्टी को एक 'मंगलसूत्र चोर' चला रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी गुमराह किया है और यह सिर्फ पैसे और भ्रष्टाचार से चलता है।
धांगेकर ने कहा, "भाजपा में वफादार कार्यकर्ताओं के लिए कोई जगह नहीं है। पार्टी पर बाहर से आए नेताओं का दबदबा है। पुणे के लोग 'मंगलसूत्र चोर' का नेतृत्व स्वीकार नहीं करेंगे। शिवसेना ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो सच में पुणे के लोगों का प्रतिनिधित्व करती है।"





