शिवसेना छोड़ने से भी ज्यादा दुख... बाल ठाकरे की जयंती पर मनसे प्रमुख राज ने बताई मन की बात
मनसे चीफ राज ठाकरे ने बाल ठाकरे की जन्म जयंती पर उन्हें याद करते हुए कहा कि शिवसेना छोड़ते समय उन्हें इस बात का दुख ज्यादा था कि अब वह अपने चाचा से बार-बार नहीं मिल पाएंगे। ठाकरे ने अपने चाचा से जुड़ी कई यादों को भी साझा किया।

Raj Thackeray: मुंबई की राजनीति में दशकों बाद एक साथ आए राज और उद्धव ठाकरे ज्यादा कुछ कमाल नहीं दिखा पाए। भारतीय जनता पार्टी ने एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर बीएमसी पर उनके साम्राज्य को खत्म कर दिया। इस चुनाव की वजह से भले ही ठाकरे परिवार को ज्यादा राजनीतिक फायदा नहीं हुआ हो, लेकिन वर्षों से बिखरा परिवार एक साथ नजर आने लगा है। बाल साहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी के अवसर पर मनसे चीफ राज ठाकरे ने सामना में एक लेख के जरिए अपने शिवसेना छोड़ने के दिनों को याद किया।
मनसे चीफ ने लिखा कि उस समय पर उन्हें शिवसेना छोड़ने से ज्यादा दुख इस बात का था कि अब वह बार-बार बाल साहेब ठाकरे से मुलाकात नहीं कर पाएंगे। राज ने दिवंगत चाचा बाल ठाकरे को अपने पीछे खड़े एक पर्वत की तरह बताया। चाचा के साथ अपने गहरे रिश्ते को याद करते हुए राज ने लिखा कि 2005 में जब उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया तो उन्हें इस बात की व्यक्तिगत पीड़ा ज्यादा हुई की अब उन्हें मातोश्री भी छोड़ना होगा।
ठाकरे ने लिखा, “जब मैंने अलग होने का फैसला किया, तब एक बात मुझे लगातार परेशान कर रही थी कि मैं पहले की तरह अपने लोगों से बार-बार मिल नहीं पाऊंगा। मैं पहले ही अपने पिता को खो चुका ता और अब अपने चाचा से भी दूर जा रहा था। यह सोच मुजे अंदर से खाए जा रही थी। पार्टी छोड़ने से ज्यादा दर्दनाक मातोश्री छोड़ना था।” गौरतलब है कि राज ठाकरे ने अपने चचेरे भाई उद्धव पर आरोप लगाकर 2005 में शिवसेना छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने 2006 में मनसे का गठन किया था।
ठाकरे ने लिखा कि 1991 में जब वह अविभाजित शिवसेना की छात्रशाखा के प्रमुख ते और काला घोड़ा मार्च लिखा था, तब बाल ठाकरे ने उनका भाषण एक सार्वजनिक लैंडलाइन फोन के जरिए सुना था। उन्होंने लिखा कि एक बाद जब बचपन में उन्हें जलने की चोट लगी थी, तब उनके चाचा ने दो महीने तक खुद एंटीसेप्टिक लगाकर उनके घाव साफ किए थे।इसके अलावा ठाकरे ने अपने लेख में उस घटना का भी जिक्र किया, जब उनकी कार के करीब से एक ट्रक गुजर गया था, तब चाचा बाल साहेब ठाकरे ने उनको फोन करके उनकी कुशलक्षेम पूंछी थी।
मेहदी हसन और गुलाम अली की गजल सुनते थे बाल ठाकरे: राज ठाकरे
चाचा की आदतों का जिक्र करते हुए राज ने कहा कि वह घोर पाकिस्तान विरोधी होने के बाद भी कभी मेहदी हसन और गुलाम अली की गजलें सुनना नहीं छोड़ते थे। उन्होंने कहा कि मशहूर फिल्मकार राज कपूर ने 1970 में मेरा नाम जोकर फिल्म को भेजकर उनसे कट लगाने का सुझाव मांगा था। इसके अलावा ठाकरे ने यह भी दावा किया कि जब बोफोर्स घोटाले के दौरान अभिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ बच्चन के खिलाफ नकारात्मक प्रचार चल रहा था तब उसका समाधान भी बाल ठाकरे ने ही किया था।

लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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