
80% मराठा खेती पर निर्भर, आरक्षण एकमात्र विकल्प; आंदोलन के बीच क्या बोले शरद पवार
शरद पवार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर 52 प्रतिशत की सीमा तय की है, लेकिन तमिलनाडु में 72 प्रतिशत कोटा को अदालत ने मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की भूमिका पारदर्शी और स्पष्ट होनी चाहिए।
मुंबई में मराठा कोटा आंदोलन के फिर से शुरू हुआ है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार ने शनिवार को कहा कि इन मुद्दों को हल करने के लिए संवैधानिक संशोधन जरूरी है, क्योंकि आरक्षण पर एक सीमा लगी हुई है। उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत मराठा लोग खेती पर निर्भर हैं, लेकिन केवल कृषि उनके भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती, इसलिए आरक्षण ही एकमात्र विकल्प है। पवार ने एक समारोह में कहा कि वे दूसरे सांसदों के साथ संवैधानिक संशोधन की जरूरत पर चर्चा कर रहे हैं।
शरद पवार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर 52 प्रतिशत की सीमा तय की है, लेकिन तमिलनाडु में 72 प्रतिशत कोटा को अदालत ने मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की भूमिका पारदर्शी और स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश को एक समान नीति की जरूरत है ताकि समाज में कोई कटुता न रहे। मालूम हो कि कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शुक्रवार को मराठा समुदाय के लिए ओबीसी कोटा में आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया।
सीएम फडणवीस का क्या कहना
वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उनकी सरकार मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे की मांगों को कानूनी और संवैधानिक ढांचे के भीतर पूरा करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले साल मराठा समुदाय को (सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत) दिया गया 10 प्रतिशत आरक्षण अब भी लागू है। फडणवीस ने कहा कि मराठा समुदाय को शिक्षा और रोजगार प्रदान करने के लिए सबसे अधिक फैसले 2014 और 2025 के बीच लिए गए। यह वह अवधि है जब अधिकतर समय भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारें सत्ता में रही हैं। जरांगे के हजारों समर्थक दक्षिण मुंबई स्थित आजाद मैदान और उसके आसपास डेरा डाले हुए हैं, जहां जरांगे ने फिर से अपना आंदोलन शुरू किया है।





