जूते में छिपाए गए पेपर, ₹80,000 में हुई डील! ऐसे लीक हुआ महाराष्ट्र TET एग्जाम?
TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं और गोपनीयता बनाए रखने के लिए हर पेपर के दो-दो सेट (कुल 4 सेट) छापे गए थे, ताकि परीक्षा के दिन रैंडमली कोई एक सेट चुना जा सके। लेकिन शातिर चोरों ने तीन दिनों के भीतर चारों के चारों सेट उड़ा दिए।

महाराष्ट्र में सरकारी शिक्षक बनने के लिए आयोजित होने वाली सबसे सुरक्षित परीक्षाओं में से एक 'टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट' (TET) 2026 के पेपर लीक मामले में एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा की तमाम बड़ी परतों को धता बताते हुए आगरा की एक प्रिंटिंग प्रेस से परीक्षा के प्रश्नपत्रों को जूते में छिपाकर बाहर तस्करी (स्मगल) किया गया था। इस परीक्षा में राज्य भर के 1,028 केंद्रों पर 6 लाख से ज्यादातर उम्मीदवार शामिल होने वाले थे, लेकिन इस सुरक्षा चूक ने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांचकर्ताओं को सबसे ज्यादा हैरान इस बात ने किया कि इतने बड़े स्तर की परीक्षा के पेपर बेहद मामूली लालच के लिए बेच दिए गए। पुलिस जांच में सामने आया कि प्रिंटिंग प्रेस के आरोपी कर्मचारियों को इस काम के लिए मात्र 8,000-8,000 रुपए नकद दिए गए थे और भविष्य में एक जमीन का प्लॉट देने का वादा किया गया था।
TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं और गोपनीयता बनाए रखने के लिए हर पेपर के दो-दो सेट (कुल 4 सेट) छापे गए थे, ताकि परीक्षा के दिन रैंडमली कोई एक सेट चुना जा सके। लेकिन शातिर चोरों ने तीन दिनों के भीतर चारों के चारों सेट उड़ा दिए।
मास्टरमाइंड की नई रणनीति: सीधे 'प्रिंटिंग प्रेस' पर निशाना
जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड एक फरार पूर्व कोचिंग शिक्षक बिजेंद्र गुप्ता है। बिजेंद्र ने पेपर लीक करने का एक बिल्कुल नया और खतरनाक तरीका निकाला था।
आमतौर पर पेपर लीक करने वाले गिरोह पेपर सेट करने वाले प्रोफेसरों या बड़े अधिकारियों को निशाना बनाते हैं। लेकिन बिजेंद्र गुप्ता सीधे उन प्रिंटिंग प्रेसों के छोटे कर्मचारियों को अपने पाले में कर लेता था, जहां अलग-अलग राज्यों के गोपनीय पेपर छपने आते थे।
परीक्षा के नियम के मुताबिक, प्रश्नपत्र किस प्रेस में छप रहे हैं, इसकी जानकारी सिर्फ 'महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद' (MSCE) के प्रमुख को होती है। यह प्रेस आगरा की माहिम पात्रन प्राइवेट लिमिटेड थी। लेकिन बिजेंद्र की रणनीति ने इस सबसे बड़े सुरक्षा घेरे को ही बाईपास कर दिया।
कैसे अंजाम दिया गया "शू-स्मगलिंग" को?
तस्करी के इस खेल को तीन लोगों ने मिलकर अंजाम दिया। सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विजय मराठे के अनुसार, इस काम को एक सुनियोजित चेन के तहत किया गया।
- कुशवाह पैकिंग के दौरान चुपके से पेपर का एक सेट निकालता था।
- माहौर पेपर को मोड़कर अपने जूते के अंदर छिपाता और प्रेस से बाहर ले जाता।
- शर्मा ने जूते से पेपर निकालकर कूरियर/हैंडओवर किया।
- सोनू कुमार फरार आरोपी, जिसने मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता तक पेपर पहुंचाया।
CCTV कैमरे भी थे बंद
जांच के दौरान पुलिस को एक और बड़ी लापरवाही हाथ लगी। जिस समय प्रेस के भीतर इन बेहद गोपनीय प्रश्नपत्रों की छपाई चल रही थी, उस दौरान वहां लगे सीसीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। अगर कैमरे चालू होते, तो जूते में पेपर छिपाने की यह करतूत रंगे हाथों पकड़ी जा सकती थी। हालांकि, प्रिंटिंग प्रेस मैनेजमेंट ने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार करते हुए कहा है कि उनकी सुरक्षा में पूर्व सैनिक तैनात थे।
सोशल मीडिया नहीं, 80,000 रुपए में बिकीं सिर्फ 'फिजिकल कॉपियां'
हाल ही में हुए NEET पेपर लीक से इतर, इस मामले में प्रश्नपत्रों को टेलीग्राम या वॉट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल नहीं किया गया। मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता ने महाराष्ट्र के कोचिंग सेंटरों के नेटवर्क के जरिए हर पेपर को 80,000 रुपए में बेचा। इसके बाद आगे के दलालों ने अपना-अपना कमीशन जोड़कर इसे छात्रों तक पहुंचाया। इसमें सिर्फ कागज की कॉपियां ही हाथ से हाथ बेची गईं।
मास्टरमाइंड का पुराना इतिहास
बिजेंद्र गुप्ता कोई नौसिखिया नहीं है, वह इससे पहले साल 2023 में हुई 'ओडिशा संयुक्त प्रवेश परीक्षा' (OJEE) के पेपर लीक मामले में भी गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस ने उसकी पत्नी सुमन कुमारी को भी उसे भागने में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
अब क्या करेगी महाराष्ट्र सरकार?
इस बड़ी फजीहत के बाद महाराष्ट्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों की सिफारिश करने के लिए राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
भविष्य में ऐसी चोरियों को रोकने के लिए सरकार अब दो मुख्य विकल्पों पर विचार कर रही है:
- महाराष्ट्र सीईटी सेल की तर्ज पर पूरी परीक्षा को ऑनलाइन (कंप्यूटर पर) कराना।
- प्रश्नपत्रों को प्रिंट करके केंद्रों तक भेजने के बजाय, परीक्षा शुरू होने के कुछ समय पहले सीधे डिजिटल एन्क्रिप्टेड तरीके से केंद्रों पर भेजना।


