
लेडी डॉक्टर के सुसाइड को लेकर खुलासे; पुलिस से कई दिनों से चल रहा था टकराव, पत्र आया सामने
लेडी डॉक्टर ने यह बयान अगस्त 2025 में सौंपा था। 23 अक्टूबर की रात को फलटण के होटल के कमरे में वह फंदे से लटकी मिली। उसकी मौत को लेकर सुसाइड नोट में बलात्कार के आरोप भी दर्ज हैं, जो उसके हाथ की हथेली पर लिखा गया था।
महाराष्ट्र के सतारा में सरकारी महिला डॉक्टर की आत्महत्या का मामला गरमाया हुआ है। अब पता चला कि वह स्थानीय पुलिस के साथ तीखे टकराव में उलझी हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, फलटण उप-जिला अस्पताल की डॉक्टर ने कई पुलिस अधिकारियों के नाम पर शिकायतें दर्ज की थीं, जबकि पुलिस ने उसके खिलाफ भी बदले की शिकायत की थी। इन आरोपों की जांच कर रही समिति को दिए 4 पेज के बयान में डॉक्टर ने उत्पीड़न के कई उदाहरण दर्ज कराए थे। उसने लिखा था कि उसे बीड़ कनेक्शन के कारण निशाना बनाया जा रहा है। पीड़िता ने चेतावनी दी थी कि अगर मेरे साथ कुछ होता है तो पुलिस जिम्मेदार होगी।

लेडी डॉक्टर ने यह बयान अगस्त 2025 में सौंपा था। 23 अक्टूबर की रात को फलटण के होटल के कमरे में वह फंदे से लटकी मिली। उसकी मौत को लेकर सुसाइड नोट में बलात्कार के आरोप भी दर्ज हैं, जो उसके हाथ की हथेली पर लिखा गया था। डॉक्टर ने दावा किया कि एक पुलिस अधिकारी ने उसके साथ कई बार रेप किया और एक अन्य व्यक्ति ने उसे परेशान किया। उसने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि एक सांसद ने कई बार मेडिकल रिपोर्टों में हेराफेरी करने का दबाव डाला। जब उसने मना किया, तो उसे धमकी दी गई।
डॉक्टर-पुलिस के बीच टकराव का क्या कारण
डॉक्टर और पुलिस के बीच टकराव के कुछ कारण थे। आरोपी व्यक्तियों की पुलिस हिरासत सुनिश्चित करने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्टों में हेराफेरी का दबाव डाला जा रहा था। 19 जून 2025 को फलटण के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी को पत्र लिखा गया था। डॉक्टर ने पुलिस अधिकारियों के उपनामों का उपयोग करते हुए शिकायत की कि उसे आरोपी व्यक्तियों के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने का दबाव डाला जा रहा था। नामित अधिकारियों में पुलिस सब-इंस्पेक्टर गोपाल बडने भी शामिल थे, जिन पर उसने बलात्कार का आरोप लगाया था। जब उसकी शिकायत की अनदेखी की गई, तो 13 अगस्त को डॉक्टर ने एसडीपीओ को RTI आवेदन दायर किया, जिसमें 19 जून की शिकायत पर की गई कार्रवाई का विवरण मांगा गया।
सतारा सिविल सर्जन को लिखित शिकायत
जुलाई में फलटण पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने सतारा सिविल सर्जन को लिखित शिकायत सौंपी। उन्होंने डॉक्टर पर आरोपी व्यक्तियों के लिए जानबूझकर अनफिट सर्टिफिकेट जारी करने का आरोप लगाया, जिससे गिरफ्तारी और हिरासत में देरी हो रही थी। सतारा सिविल सर्जन ने इस मामले की जांच के लिए 2 सदस्यीय समिति गठित की। अगस्त में इस समिति को दिए लिखित बयान में डॉक्टर ने पुलिस के खिलाफ अपने आरोप दोहराए और राजनीतिक दबाव का भी आरोप लगाया। उसने दावा किया कि एक सांसद के निजी सहायक ने उसे फोन किया और उसे बीड़ जिले से होने के कारण आरोपी का पक्ष लेने का आरोप लगाया। उसने एमपी का नाम नहीं बताया।





