पुणे में 'कॉर्पोरेट जिहाद' का दावा, पूर्व कर्मचारी बोली- हिंदू लड़कियों को फंसाते हैं...
पुणे की एक आईटी फर्म की पूर्व महिला कर्मचारी ने अपनी सहकर्मी पर 10 महीने तक प्रताड़ित करने, इस्लाम कुबूलने का दबाव बनाने और कंपनी पर जबरन इस्तीफा लेने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुणे की एक टेक कंपनी की पूर्व महिला कर्मचारी ने अपनी कंपनी और सहकर्मी पर धार्मिक उत्पीड़न, कार्यस्थल पर भेदभाव और जबरन इस्तीफा दिलवाने का गंभीर आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि उसे 10 महीने तक प्रताड़ित किया गया और इस्लाम कुबूलने का दबाव बनाया गया। हिंदू जनजागृति समिति के साथ मिलकर महिला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसके बाद यह मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है।
इस्लाम कुबूलने और मुस्लिम युवक से रिश्ते का दबाव
पूर्व कर्मचारी के मुताबिक, उसकी एक महिला सहकर्मी (बॉस) लगातार उस पर इस्लाम धर्म अपनाने और एक मुस्लिम युवक के साथ संबंध बनाने का दबाव डाल रही थी।
आरोप है कि सहकर्मी ने महिला के निजी जीवन पर भी कई बार टिप्पणियां कीं और झांसा दिया कि हिंदू धर्म छोड़ने पर उसे विदेश में बेहतर मौके और शानदार लाइफस्टाइल मिलेगी। जब पीड़िता ने इन बातों का विरोध किया, तो उसने अपनी उस सहकर्मी से बातचीत सिर्फ आधिकारिक काम तक ही सीमित कर दी थी।
'हिंदू महिलाओं को ऐसे फंसाया जाता है...'
पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "जिस तरह से ये लोग हिंदू महिलाओं को फंसाते हैं और फिर उन्हें अपने तरीके से चलने या नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर करते हैं, उसी के कारण मुझे यह प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी। मैंने 10 महीने तक उत्पीड़न और प्रताड़ना झेली है।"
पीड़िता ने दावा किया कि यह धर्म परिवर्तन का एक गुप्त खेल है। उसने कहा, "हमें लगता है कि हम सिर्फ सामान्य बातचीत कर रहे हैं, जबकि वे आपको फंसाने और इस्लाम कुबूल करवाने की कोशिश कर रहे होते हैं। जब हम कंपनी से इस बारे में बात करते हैं, तो वे कहते हैं कि हमारी कंपनी में ऐसा नहीं होता है और मामले को दबा दिया जाता है।"
कंपनी पर शिकायतें अनसुनी करने का आरोप
पीड़िता का दावा है कि उसने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले की शिकायत की थी, लेकिन उसे कोई उचित जवाब नहीं मिला और ना ही कोई कार्रवाई हुई। महिला का आरोप है कि इसके उलट, कंपनी की आंतरिक लोकपाल समिति के सामने उसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कर दी गई। जांच के तरीके पर सवाल उठाते हुए महिला ने कहा कि जांच के दौरान उसके द्वारा दिए गए सबूतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
दबाव डालकर लिया जबरन इस्तीफा
महिला का आरोप है कि अगस्त 2025 में उसे माइक्रोसॉफ्ट टीम्स पर कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ एक मीटिंग में बुलाया गया और दबाव डालकर जबरन इस्तीफा ले लिया गया। इस दौरान उसे अपना पक्ष रखने का कोई निष्पक्ष मौका नहीं दिया गया।
50 लाख रुपये के मुआवजे और नौकरी वापसी की मांग
पीड़िता के वकील विवेक भोसले ने कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने कहा कि यह इस्तीफा प्राकृतिक न्याय और श्रम कानूनों का उल्लंघन करते हुए लिया गया है। इस नोटिस में तीन प्रमुख मांगें की गई हैं:
- महिला को उसकी पुरानी सेवा निरंतरता के साथ वापस नौकरी पर रखा जाए।
- जबरन लिया गया इस्तीफा रद्द किया जाए।
- मानसिक प्रताड़ना और प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान के लिए 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
पुलिस ने शुरू की जांच, 'कॉर्पोरेट जिहाद' का दावा
हिंदू जनजागृति समिति के समन्वयक (महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़) सुनील घनवट ने इसे पुणे की आईटी इंडस्ट्री में चल रहा "कॉर्पोरेट जिहाद" करार दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से इस मामले की गहन जांच कर पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है।
इस बीच, मामला हिंजवडी पुलिस स्टेशन पहुंच गया है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बालाजी पांढरे ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया, "महिला ने शिकायत की है कि उसकी पूर्व महिला बॉस ने उसके खिलाफ कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। आरोपी महिला बॉस फिलहाल बेंगलुरु में तैनात है और जांच में मदद के लिए उसका बयान दर्ज करने को कहा गया है।" पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई चल रही जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।
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