महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण खत्म होने से भड़की कांग्रेस, उद्धव ने क्यों साध ली चुप्पी?
इस अध्यादेश के तहत मराठा समुदाय को 16% आरक्षण और मुस्लिमों को विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत 5% आरक्षण दिया गया था। इस नीति को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

Muslim Reservation: महाराष्ट्र की भाजपा-शिवसेना सरकार द्वारा मुस्लिम समुदाय को शैक्षिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के 2014 के आदेश को औपचारिक रूप से रद्द करने के फैसले पर प्रदेश की राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने सरकार के इस कदम को बदले की भावना करार दिया है। वहीं, राज्य सरकार का दावा है कि 2014 के आदेश को रद्द करने वाला सरकारी प्रस्ताव केवल एक प्रक्रियात्मक कदम था, क्योंकि यह कोटा पहले से ही लागू नहीं था।
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, “मंत्री या मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते समय आपसे सभी के प्रति निष्पक्ष रहने की अपेक्षा की जाती है। आपसे संविधान का पालन करने की उम्मीद की जाती है। हालांकि, राज्य और केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर रही हैं। उच्च न्यायालय ने भी आंशिक रूप से कोटे के पक्ष में फैसला सुनाया था। सरकार यह सब बदले की भावना से कर रही है।”
यह विवाद 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शुरू हुआ था, जब तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार ने एक अध्यादेश जारी किया था। इस अध्यादेश के तहत मराठा समुदाय को 16% आरक्षण और मुस्लिमों को विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत 5% आरक्षण दिया गया था। इस नीति को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने मराठा आरक्षण को तो खारिज कर दिया था, लेकिन शैक्षिक संस्थानों में मुस्लिम आरक्षण को आंशिक रूप से बरकरार रखा था। इसके बाद सत्ता में आई भाजपा और शिवसेना की सरकार ने उस अध्यादेश को कानून में नहीं बदला, जिसके कारण वह अध्यादेश समय सीमा समाप्त होने के बाद निष्प्रभावी हो गया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा समुदाय की आरक्षण मांग का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि संविधान के अनुसार धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। राज्य सरकार का रुख है कि 2014 के जीआर को रद्द करने वाला ताजा जीआर केवल कानूनी और प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए जारी किया गया है।
उद्धव सेना की चुप्पी
राज्य सरकार के इस कदम का नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (राकांपा - शरद पवार गुट) ने भी कड़ा विरोध किया है। इस मुद्दे पर सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम उद्धव बालासाहेब ठाकरे (UBT) शिवसेना का रुख है। हाल के दिनों में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति नरम रुख अपनाने वाली UBT शिवसेना ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट स्टैंड नहीं लिया है। UBT शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कहा, "इस मुद्दे पर बाहर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है। यह मुद्दा आगामी विधानसभा सत्र में उठाया जाएगा।"
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