पति-पत्नी के बीच आम झगड़े क्रूरता नहीं, दहेज प्रताड़ना केस में कोर्ट का बड़ा फैसला

लाइव हिन्दुस्तान, मुंबई
Follow us on Google News
share

कोर्ट ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में ऐसी घटनाएं अधिक से अधिक पारिवारिक मतभेद या क्षणिक नाराजगी का कारण बन सकती हैं, लेकिन इन्हें इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि आरोपियों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए निशा को उकसाया।'

Common Quarrels Between Husband and Wife are Not Cruelty Court Big Decision in Dowry Harassment Case

महाराष्ट्र के ठाणे की एक कोर्ट ने साल 2018 में 21 वर्षीय पत्नी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में उसके पति और सास-ससुर को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि ''वैवाहिक जीवन में होने वाली सामान्य खटपट को क्रूरता नहीं माना जा सकता।'' अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पंकज ए. पाटकी ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों द्वारा की गई क्रूरता की किसी विशिष्ट घटना या उनके कृत्यों और महिला द्वारा आत्महत्या किए जाने के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने में विफल रहा।

जान गंवाने वाली महिला निशा पेशे से नर्स थी और उसने दिसंबर 2016 में अनिल रंगनाथ गायकवाड़ (31) से विवाह किया था। विवाह के बाद वह ठाणे में पति तथा सास सोजर गायकवाड़ (56) और ससुर रंगनाथ गायकवाड़ (71) के साथ रहती थी। निशा ने 14 मई, 2018 को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद वर्तक नगर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए (क्रूरता) और 306 (आत्महत्या के लिए उकसावा) के तहत मामला दर्ज किया था।

निशा के परिजनों का आरोप था कि उसे घरेलू कामकाज को लेकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उससे सोने की चेन की मांग की जाती थी और उसके कपड़े पहनने पर भी पाबंदियां लगाई जाती थीं। परिजनों के अनुसार, गायकवाड़ परिवार उस पर साड़ी पहनने का दबाव डालता था।

न्यायाधीश पाटकी ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में विशिष्टता के अभाव और उसके गवाहों के बयानों में विरोधाभास का उल्लेख करते हुए कहा, ''वैवाहिक जीवन में होने वाली सामान्य खटपट, घरेलू स्तर के सामान्य मतभेद या मामूली झगड़े तब तक क्रूरता नहीं माने जा सकते, जब तक कि संबंधित आचरण कानून में निर्धारित आवश्यक तत्वों को पूरा न करता हो।''

निशा आहत हो गई थीं और आत्महत्या कर ली

अदालत ने यह भी कहा कि दंपति सास-ससुर से अलग, उसी मकान की दूसरी मंजिल पर रहते थे। बचाव पक्ष ने दलील दी कि वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण परिवार नासिक में एक रिश्तेदार की शादी में शामिल नहीं हो सका, जिससे निशा आहत हो गई थीं और आत्महत्या कर ली। अदालत ने कहा, ''ऐसी घटनाएं किसी भी परिवार में सामान्य रूप से होती हैं। ऐसा नहीं था कि केवल निशा को ही समारोह में जाने से रोका गया था।

तीनों आरोपियों को बरी कर दिया

स्वयं आरोपी भी अपने रिश्तेदार की शादी में शामिल नहीं हुए थे। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी घटनाएं अधिक से अधिक पारिवारिक मतभेद या क्षणिक नाराजगी का कारण बन सकती हैं, लेकिन इन्हें इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि आरोपियों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए निशा को उकसाया।'' इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
परिचय, अनुभव एवं शिक्षा
वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।

यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

मीडिया में अवॉर्ड्स.
मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत एक दर्जन से ज्यादा पुरस्कार जीते हैं।

विशेषज्ञता
देश-विदेश की राजनीति पर गहरी पकड़
यूपी-बिहार समेत सभी राज्यों की खबरों को कवर करने का व्यापक अनुभव
विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव, संसद की कार्यवाही को लंबे समय से कवर किया
ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज, एनालिसिस स्टोरीज, एशिया, मिडिल ईस्ट, पश्चिमी देशों की खबरों को कवर करने का एक दशक से ज्यादा का एक्सपीरियंस

और पढ़ें
Hindi Newsमहाराष्ट्र न्यूज़पति-पत्नी के बीच आम झगड़े क्रूरता नहीं, दहेज प्रताड़ना केस में कोर्ट का फैसला