
देवा का क्या मतलब, मैं या भगवान; BMC चुनाव जीतने के बाद उद्धव ठाकरे से ऐसा क्यों बोले फडणवीस?
उद्धव ठाकरे ने बीएमसी के मेयर पद के चुनाव को लेकर कहा कि देवा ने अगर चाहा तो मेयर उनकी ही पार्टी से चुना जाएगा। इसके बारे में जब सीएम फडणवीस से पूछा गया कि उनके बयान में देवा का क्या मतलब था, लोग उन्हें भी प्यार से देवा भाऊ बुलाते हैं।
BMC election results: बीएमसी के चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक सफलता मिली है। इस सफलता से उत्साहित भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट मेयर बनाने की तैयारियों में जुट गए हैं। हालांकि इसी बीच उद्धव ठाकरे की तरफ से बयान आया कि अगर 'देवा' ने चाहा तो मेयर उनकी पार्टी से ही बनेगा। इसके बारे में जब सीएम देवेंद्र फडणवीस से पूछा गया तो उन्होंने कहा तंज कसते हुए कहा कि उन्हें भी लोग प्यार से 'देवा भाऊ' बुलाते हैं।
मीडिया से बात करके हुए सीएम फडणवीस ने कहा, "देव का अर्थ क्या है? मैं या फिर भगवान? क्योंकि मुझे भी लोग प्यार से देवा भाऊ बुलाते हैं... यह वास्तव में सर्वशक्तिमान की ही इच्छा है कि मेयर महायुति से ही हो। मेयर कौन बनेगा, कब चुना जाएगा, कहाँ चुना जाएगा और कितने वर्षों के लिए चुना जाएगा, ये सभी निर्णय मैं, एकनाथ शिंदे और हमारे पार्टी नेता मिलकर लेंगे। इस पर कोई विवाद नहीं है।"
क्या कहा था उद्धव ठाकरे ने?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का यह बयान उद्धव ठाकरे द्वारा शनिवार के दिए एक बयान में आया है। बीएमसी में भाजपा और शिंदे सेना की ऐतिहासिक जीत के बाद भी उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर देवा ने चाहा तो बीएमसी के मेयर का पद उनकी पार्टी के पास ही आएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब चुनाव के बाद यह अनिश्चित है कि आखिर महापौर का पद भाजपा या शिंदे की शिवसेना में से किसके पास जाएगा। ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हुए कहा कि मुंबई में शिवसेना (उबाठा) का महापौर बनाना उनका सपना है और अगर ईश्वर की इच्छा हुई तो यह सपना साकार होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह गलतफहमी है कि उसने शिवसेना (उबाठा) को खत्म कर दिया है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।
ठाकरे ने कहा, ‘‘शिवसेना को भाजपा जमीनी स्तर पर खत्म नहीं कर सकी।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा निष्ठा खरीदने के लिए ‘साम, दाम, दंड, भेद’ का इस्तेमाल कर रही है। उसने (भाजपा ने) मुंबई को गिरवी रखकर विश्वासघात के जरिये जीत हासिल की है। मराठी मानुष इस पाप को कभी माफ नहीं करेंगे। लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि अब शुरू हुई है।’’
आपको बता दें, बीएमसी चुनाव के नतीजों में भाजपा और उनके साथी एकनाथ शिंदे को ऐतिहासिक सफलता मिली है। ठाकरे परिवार के तीन दशक के बीएमसी साम्राज्य को हिलाते हुए भाजपा ने इस पर कब्जा किया है। पिछले तीन दशक से बीएमसी का मेयर मातोश्री में तय होता रहा है, लेकिन इस बार यह भाजपा के नेताओं द्वारा तय किया जाएगा। महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बीएमसी में उसने ठाकरे बंधुओं के गठजोड़ को परास्त किया, तो पुणे में पवार परिवार को तगड़ी पटखनी दी है।





