Hindi Newsमहाराष्ट्र न्यूज़Chief Minister Devendra Fadnavis amid growing controversy over language Only Marathi is compulsory in Maharashtra
महाराष्ट्र में केवल मराठी अनिवार्य; भाषा को लेकर बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र में केवल मराठी अनिवार्य; भाषा को लेकर बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

संक्षेप:

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य में केवल मराठी भाषा ही अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त छात्रों को अपनी पसंद की तीसरी भाषा चुनने की अनुमति है, लेकिन अनिवार्य केवल एक ही भाषा है। उन्होंने कहा सभी भारतीय भाषाओं का सम्मा करना चाहिए।

Jan 02, 2026 11:33 pm ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बार फिर से भाषा विवाद पर अपना रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में केवल मराठी भाषा ही अनिवार्य है, इसके अलावा दूसरी भाषाओं का स्वागत है, लेकिन कोई अनिवार्य नहीं है। गौरतलब है कि पिछले साल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में शुरू करने के अपने फैसले को तीव्र विरोध प्रदर्शनों के बाद रद्द कर दिया और इस मुद्दे की जांच के लिए एक समिति का गठन किया।

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सतारा में 99वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि राज्य में भाषा की अनिवार्यता का मुद्दा व्यापक रूप से बहस का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री के तौर पर मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है। कोई अन्य भाषा अनिवार्य नहीं है। हालांकि, तीन-भाषा प्रणाली को लेकर मतभेद थे। छात्रों को अपनी पसंद की कोई भी भारतीय भाषा सीखने की स्वतंत्रता है। सवाल सिर्फ यह था कि तीसरी भाषा किस कक्षा से शुरू की जानी चाहिए।’’

विवाद का जिक्र करते हुए फडणवीस ने कहा कि महाविकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान तैयार की गई एक रिपोर्ट में पहली कक्षा से ही हिंदी को अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई थी और उनकी सरकार ने शुरू में इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था।

उन्होंने कहा, लेकिन पहली कक्षा से ही (हिंदी) भाषा को अनिवार्य बनाने को लेकर व्यापक बहस और विरोध हुआ, इसलिए नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हालांकि, मैं यह दोहराना चाहूंगा कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है, कोई अन्य भाषा नहीं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह भी कहना चाहूंगा कि हम अंग्रेजी, फ्रेंच और स्पेनिश जैसी भाषाओं का खुले दिल से स्वागत करते हैं... इन भाषाओं के प्रति हमारा रुख सकारात्मक है क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय भाषाएं हैं। लेकिन भारतीय भाषाओं का विरोध करते हुए अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का स्वागत करना अनुचित है। मेरा मानना ​​है कि हमारी भारतीय भाषाओं को भी वही सम्मान मिलना चाहिए, और यही हमारा रुख है।’’

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak
उपेन्द्र पिछले कुछ समय से लाइव हिन्दुस्तान के साथ बतौर ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली (2023-24 बैच) से पूरी की है। इससे पहले भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, राजनीति के साथ-साथ खेलों में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
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