Hindi Newsमहाराष्ट्र न्यूज़Chemistry professor arrested in Pune for forging Union ministers signature and giving himself an award
दोस्तों में बढ़ानी थी इज्जत, प्रोफेसर ने केंद्रीय मंत्री के फर्जी साइन करके खुद को दिया अवार्ड; गिरफ्तार

दोस्तों में बढ़ानी थी इज्जत, प्रोफेसर ने केंद्रीय मंत्री के फर्जी साइन करके खुद को दिया अवार्ड; गिरफ्तार

संक्षेप:

महाराष्ट्र में एक कैमिस्ट्री प्रोफेसर ने दोस्तों और साथियों के बीच में अपनी प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्री के फर्जी साइन करके खुद को ही एक अवार्ड दे दिया। हालांकि अवार्ड का नाम हाल ही में बदल दिया गया था, इसलिए वह शक के घेरे में आ गया।

Sep 23, 2025 04:56 am ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

महाराष्ट्र से एक अजीब मामला सामने आया है। यहां पर एक निजी कॉलेज में रसायन विज्ञान के एक प्रोफेसर ने अपने दोस्तों और साथी शिक्षकों के बीच अपनी इज्जत बढ़ाने के लिए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी डॉक्टर जितेंद्र सिंह के फर्जी साइन किए और एक लेटर हेड के जरिए खुद को एक प्रतिष्ठित अवार्ड भी दे दिया। इस फर्जी पत्र के माध्यम से प्रोफेसर ने अपने साथियों के बीच में दावा किया कि उसे प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार दिया जा रहा है। जानकारी सामने आए पर प्रोफेसर के उस दावे की जांच की गई, जिसके फर्जी निकलने के बाद उसे भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4) और 336 (जालसाजी) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

वघोली पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “आरोपी व्यक्ति कि पहचान वीरेंद्र कुमार यादव के रूप में हुई है। शुरुआती जाँच से पता चलता है कि संदिग्ध व्यक्ति ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के फर्जी साइन और उनके लेटर हेड का इस्तेमाल करके एक फर्जी पत्र तैयार किया था। इस फर्जी पत्र में कहा गया था कि संदिग्ध का नाम प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार के लिए तय किया गया है।”

उन्होंने आगे बताया कि संयोग से, पिछले कुछ वर्षों से इस पुरस्कार का नाम बदलकर राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार कर दिया गया है, इसकी वजह से लोगों को शक हुआ। अब तक की जाँच से पता चला है कि संदिग्ध ने यह पत्र किसी सरकारी या वैधानिक संस्था को नहीं सौंपा था, लेकिन उसने अपने दोस्तों और सहकर्मियों के बीच अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए इसे जरूर दिखाया था।

पुलिस अधिकारी ने बताया, "हमारा मानना है इसका मकसद प्रमोशन, सैलरी में बढ़ावा, लोगों के बीच में इज्जत बढ़ाना या फिर इसका और अधिक दुरुपयोग करना भी हो सकता है। हम सभी पहलुओं पर जांच कर रहे हैं। इस अपराध का सबसे गंभीर पहलू एक केंद्रीय मंत्री के हस्ताक्षर के साथ लेटरहैड जारी करके जालसाजी करना है।"

अधिकारी के मुताबिक, आरोपी ने इस फर्जी पत्र को न केवल अपने दोस्तों को दिखाया बल्कि सोशल मीडिया पर भी शेयर किया। इसके बाद मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के पास इस पत्र की सूचना पहुंची। वहां से उन्होंने इसकी जांच शुरू की। हमारी जांच में पता चला कि यह सब फर्जी है इसके बाद एनसीएल के अधिकारियों ने मामला दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी की गई। फिलहाल हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि आरोपी ने यह पत्र कैसे बनाया और क्या इस में उसके साथ कोई और भी शामिल था।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak
उपेन्द्र पिछले कुछ समय से लाइव हिन्दुस्तान के साथ बतौर ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली (2023-24 बैच) से पूरी की है। इससे पहले भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, राजनीति के साथ-साथ खेलों में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज , धर्म ज्योतिष , एजुकेशन न्यूज़ , राशिफल और पंचांग पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।