कहीं भी नमाज पढ़ने का नहीं कर सकते दावा; HC ने मुस्लिमों को दिया झटका, पूछा- धर्म ऊपर या सुरक्षा?

Mar 05, 2026 08:30 pm ISTPramod Praveen पीटीआई, मुंबई
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अदालत टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर मेन्स यूनियन की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दावा किया गया था कि छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक अस्थायी शेड पिछले साल अधिकारियों ने गिरा दिया था जहां वे नमाज पढ़ते थे।

कहीं भी नमाज पढ़ने का नहीं कर सकते दावा; HC ने मुस्लिमों को दिया झटका, पूछा- धर्म ऊपर या सुरक्षा?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने रमजान के दौरान शहर के हवाई अड्डे के पास अब ढहाये जा चुके एक अस्थायी शेड में नमाज पढ़ने की इजाजत मांग रहे टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों को कोई राहत देने से इनकार करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सुरक्षा धर्म से ऊपर है। जस्टिस बीपी कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने कहा कि रमजान इस्लाम का जरूरी हिस्सा है, लेकिन इसे मानने वाले किसी भी जगह, खासकर हवाई अड्डे के आस-पास, जहां सुरक्षा को लेकर उच्च स्तर की चिंता है, नमाज पढ़ने का धार्मिक अधिकार होने का दावा नहीं कर सकते। हवाई अड्डा सुरक्षा के पहलू पर बार-बार जोर देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि वह सावधानी को नजरअंदाज नहीं करेगा।

अदालत टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर मेन्स यूनियन की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दावा किया गया था कि छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आस-पास एक अस्थायी शेड पिछले साल अधिकारियों ने गिरा दिया था जहां वे नमाज पढ़ते थे। याचिका में अनुरोध किया गया था कि उन्हें उसी जगह का इस्तेमाल करने दिया जाए या उसी इलाके में कोई दूसरी जगह दी जाए जहां वे नमाज पढ़ सकें।

नमाज पढ़ने के लिए सही नहीं पाई गई

इस मामले में अदालत ने पिछले हफ्ते पुलिस और हवाई अड्डा प्राधिकरण को यह देखने का निर्देश दिया था कि क्या कोई और जगह दी जा सकती है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को रिपोर्ट जमा करते हुए कहा कि सात अन्य स्थलों का सर्वेक्षण किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और हवाई अड्डा विकास योजना संबंधी पहलुओं की वजह से, इनमें से कोई भी जगह याचिकाकर्ताओं के नमाज पढ़ने के लिए सही नहीं पाई गई।

मुद्दा हवाई अड्डे की सुरक्षा से जुड़ा

अदालत ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा कि वह याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं दे सकती, क्योंकि मुद्दा हवाई अड्डे की सुरक्षा से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को कोई अन्य जगह तलाशनी होगी। उसने कहा कि उस स्थान से एक किलोमीटर के दायरे में एक मदरसा है जहां वे नमाज पढ़ सकते हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को हवाई अड्डे के नजदीक नमाज पढ़ने की जगह नहीं दी जा सकती क्योंकि सुरक्षा संबंधी कारक हैं। पीठ ने कहा कि जब सुरक्षा की बात आती है तो कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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