
'ऐसे लोगों को मौत की सजा होनी चाहिए, नया कानून बनाओ', अजित पवार ने किस बात पर कहा
स्थानीय निकाय चुनावों से पहले पवार परिवार और ठाकरे भाइयों के एक साथ आने के बारे में पूछे जाने पर डिप्टी सीएम ने जवाब दिया। एनसीपी चीफ अजित पवार ने कहा, ‘मैं इसे बहुत सकारात्मक तरीके से देखता हूं। यह अच्छी बात है।’
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के प्रमुख अजित पवार ने देशद्रोह करने वालों के लिए मौत की सजा की मांग की है। मंगलवार को उन्होंने कहा, 'मेरा सेक्युलर माइंडसेट है। मुझे बस इतना कहना है कि हमारा देश इतना बड़ा है और इस देश में जो भी रहते हैं, वे सब भारतीय हैं।' पवार ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति देश के खिलाफ देशद्रोह करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उसे मौत की सजा दी जानी चाहिए और इसके लिए एक नया कानून बनाया जाना चाहिए।
स्थानीय निकाय चुनावों पर अजित पवार ने कहा, 'जब से मैं राजनीति में हूं, 1999 से हमने जितने भी चुनाव लड़े, उनमें हमारा कांग्रेस के साथ गठबंधन था। हम संसद में साथ काम कर रहे थे और साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे थे। हम अपने-अपने चुनाव चिन्हों पर चुनाव लड़ रहे थे। विधानसभा चुनावों में भी ऐसा ही होता था। लेकिन लोकल बॉडी चुनावों में, अपने-अपने पार्टी कार्यकर्ताओं की मदद और उन्हें ताकत देने के लिए, हम हमेशा एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते थे। भाजपा और शिवसेना के साथ भी ऐसा ही हुआ। पिछले 2017 के चुनावों में मुंबई और ठाणे में, वे एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे इसलिए यह सोचने की जरूरत नहीं है कि यहां कुछ बहुत अलग हो रहा है।'
ठाकरे भाइयों के साथ आने पर क्या कहा
तीन प्रमुख महानगरपालिकाओं (पुणे नगर निगम, पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम और बृहन्मुंबई नगर निगम)) के स्थानीय निकाय चुनाव पर अजित पवार प्रतिक्रिया दे रहे थे। उन्होंने कहा, 'अगर लोगों ने वहां के मु्द्दों को देखते हुए मतदान किया तो नतीजे अलग आएंगे। मैंने ऐसा चुनाव कभी अपनी जिंदगी में नहीं देखा कि किसी को अपनी तरफ खींचने के लिए कुछ ना कुछ देने की कोशिश बहुत से उम्मीदवार कर रहे हैं।' स्थानीय निकाय चुनावों से पहले पवार परिवार और ठाकरे भाइयों के एक साथ आने के बारे में पूछे जाने पर डिप्टी सीएम ने कहा, 'मैं इसे बहुत सकारात्मक तरीके से देखता हूं। यह अच्छी बात है। कार्यकर्ताओं के कारण ही पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने का तय हुआ क्योंकि कार्यकर्ताओं को पता था कि अगर वे एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे, तो वोट बंट जाएंगे। वो अब नहीं होगा। कार्यकर्ता चुनाव जीतना चाहते हैं।'





