'महज दुर्घटना नहीं, इसमें साजिश की बू', अजित पवार के प्लेन क्रैश पर MLA भतीजे का गहराया शक; बड़ी मांग
रोहित पवार ने कई टेक्निकल और ऑपरेशनल दिक्कतों पर भी बात की, जिसमें यह भी शामिल था कि क्या एयरक्राफ्ट का ट्रांसपोंडर बंद था, खराब विज़िबिलिटी के बावजूद मुश्किल रनवे क्यों चुना गया, और ऐसे हालात में एयरक्राफ्ट ने लैंडिंग की कोशिश क्यों की।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के विधायक रोहित पवार ने मंगलवार को आरोप लगाया कि पिछले माह हुए उस विमान हादसे में साजिश का संदेह है जिसमें उनके चाचा और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत हो गयी थी। उन्होंने विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा इस हादसे की विस्तृत जांच की मांग की है। हालांकि, रोहित पवार के दादा और NCP संस्थापक शरद पवार ने इस त्रासदी में किसी भी साजिश की आशंका को खारिज करते हुए इसे एक दुर्घटना करार दिया था। रोहित पवार ने एक संवददाता सम्मेलन के दौरान विमान की कमान संभाल रहे कैप्टन सुमित कपूर के पिछले रिकॉर्ड पर सवाल उठाया और अतीत में शराब के सेवन के लिए उनके तीन साल के निलंबन का हवाला भी दिया।
उन्होंने कहा कि अपराध जांच विभाग (CID) के पास इस हादसे की पूरी जांच करने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा व्यापक जांच कराये जाने की मांग भी की, जिनमें भारतीय एजेंसियों के अलावा राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड, नागरिक विमानन सुरक्षा जांच एवं विश्लेषण ब्यूरो, ब्रिटेन की विमान दुर्घटना जांच शाखा (AAIB) शामिल हों। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि दुर्घटनाग्रस्त लियरजेट विमान की मालिकाना कंपनी 'वीएसआर' का डीजीसीए के अधिकारियों पर प्रभाव है और वह ‘कुछ भी करके बच सकती है।’
वीएसआर कंपनी पर जताया शक
रोहित पवार ने कहा कि वीएसआर कंपनी के एक विमान के 2023 में हुए हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट पहले ही पेश कर दी गई है। इसके बावजूद, वीएसआर कंपनी के विमान अब भी उच्चस्तरीय नेताओं द्वारा उपयोग किए जा रहे हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कंपनी का परिचालन लाइसेंस कभी क्यों रद्द नहीं किया गया। रोहित पवार ने कहा कि बुकिंग करने वाली कंपनी एरो, वीएसआर कंपनी और पायलट सुमित कपूर पर गंभीर संदेह हैं।
'महज दुर्घटना नहीं, इसमें साजिश की बू'
उन्होंने आरोप लगाया, ''हमें नहीं लगता कि यह महज एक दुर्घटना थी। इसमें साजिश की बू है।'' रोहित पवार ने दुर्घटना से पहले के घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या अंतिम क्षणों से पहले विमान का ट्रांसपोंडर जानबूझकर बंद कर दिया गया था? रोहित पवार के अनुसार, मूल पायलट -साहिल मदान और यश- कथित तौर पर यातायात के कारण देरी से पहुंचे थे। उन्होंने पूछा, ''तो सुमित कपूर और शांभवी पाठक हवाई अड्डे तक कैसे पहुंचे? क्या वे आसपास ही रहते थे?'' उन्होंने यह भी कहा कि पाठक को कपूर की तुलना में लियरजेट उड़ाने का अधिक अनुभव था। उन्होंने दावा किया कि विमान के एक तरफ झुकने पर कपूर चुप रहे। रोहित ने पूछा, ''उन्होंने (कपूर ने) मुश्किल रनवे 11 की मांग क्यों की और दृश्यता की समस्या के बावजूद लैंडिंग का प्रयास क्यों किया?''
पूरा महाराष्ट्र सवाल कर रहा- एक्सि़डेंट या साजिश?
रोहित ने कहा, “पूरा महाराष्ट्र सवाल कर रहा है कि अजित दादा का प्लेन क्रैश एक एक्सीडेंट था या कोई साज़िश? मैं आप सभी के साथ वह शेयर कर रहा हूं जो मुझे लगता है। कुछ लोग अभी भी दादा के कहीं से आने की उम्मीद कर रहे हैं, कुछ कहते हैं कि एयरक्राफ्ट में 6 लोग थे, वह अजित दादा की डेड बॉडी नहीं थी, यह अभी भी एक बुरे सपने जैसा लगता है।”
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


