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‘गुलामों का बाजार बन गई है महाराष्ट्र की राजनीति’, उद्धव के मंच से राज ठाकरे ने बोला तीखा हमला

‘गुलामों का बाजार बन गई है महाराष्ट्र की राजनीति’, उद्धव के मंच से राज ठाकरे ने बोला तीखा हमला

संक्षेप:

बालासाहेब ठाकरे की 100वीं जयंती के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर किए गए अपने पोस्ट में राज ठाकरे ने राजनीति के बदलते स्वरूप पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में निष्ठा और सिद्धांतों से समझौता बढ़ता जा रहा है।

Jan 23, 2026 10:38 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, मुंबई
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महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही खींचतान और मेयर पद को लेकर जारी सस्पेंस के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने बड़ा और तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति अब गुलामों का बाजार बन गई है। यह टिप्पणी उन्होंने हालिया नगर निकाय चुनावों के बाद विभिन्न पदों को लेकर चल रही जोड़-तोड़ पर की, खासकर कल्याण-डोंबिवली के घटनाक्रम को लेकर। शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के शुभारंभ कार्यक्रम में बोलते हुए राज ठाकरे ने कहा, “जो कल्याण-डोंबिवली में हुआ, वह घिनौना है।”

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उन्होंने आगे कहा, “महाराष्ट्र की राजनीति गुलामों का बाजार बन चुकी है। कल्याण-डोंबिवली में जो हुआ, वह बेहद घिनौना है। यह सब आखिर जा कहां रहा है?” उन्होंने मंच से अपना सोशल मीडिया (X) पोस्ट भी पढ़ा और कहा, “राजनीति में कभी-कभी लचीला होना पड़ता है।” उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब दो दिन पहले उनकी पार्टी (MNS) के पांच नगरसेवकों ने ठाणे जिले की कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन दिया था। इस कदम से राजनीतिक हलकों में राज ठाकरे द्वारा भाई उद्धव ठाकरे को धोखा देने संबंधी अटकलें तेज हो गईं और महापौर पद के चुनाव से पहले सहयोगी दलों की ओर से उनकी खूब आलोचना हुई।

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उद्धव और संजय राउत से हो चुकी है बात

मंच से राज ठाकरे ने साफ किया कि कल्याण-डोंबिवली के मुद्दे पर उनकी उद्धव ठाकरे और संजय राउत से बातचीत हो चुकी है। उन्होंने शिवसेना से अलग होकर MNS बनाने के अपने पुराने फैसले को भी याद किया और कहा, “यह बात 20 साल पुरानी है। मैंने भी बहुत कुछ सीखा और मुझे लगता है उद्धव ने भी सीखा है। अब उस सबको पीछे छोड़ देना चाहिए।”

20 साल बाद ठाकरे परिवार की सियासी नजदीकी

गौरतलब है कि करीब दो दशक की दूरी के बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे हाल ही में बीएमसी चुनाव में साथ आए थे। हालांकि वे चुनाव जीत नहीं पाए, लेकिन मराठी बहुल इलाकों में गठबंधन को जबरदस्त समर्थन मिला। दोनों दलों को कुल 71 सीटें मिलीं। हालांकि, उनमें MNS को सिर्फ 6 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।

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कल्याण-डोंबिवली बना नया रणक्षेत्र

अब सियासत का केंद्र कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) बन गया है, जहां MNS ने उद्धव ठाकरे के कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन दे दिया है। यहां शिंदे गुट 62 के बहुमत आंकड़े को पार करने की कोशिश में है और अपने सहयोगी बीजेपी को किनारे रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। अगर शिंदे इसमें कामयाब होते हैं, तो यह जीत बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के गढ़ में बड़ी राजनीतिक सफलता मानी जाएगी।

स्थानीय फैसला या बड़ा संदेश?

MNS नेता राजू पाटिल को शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे से बातचीत करते देखा गया था। MNS का दावा है कि शिंदे सेना को समर्थन देने का फैसला स्थानीय इकाई ने लिया, न कि पार्टी हाईकमान ने। इस फैसले से उद्धव ठाकरे के नाराज़ होने की खबरें सामने आईं। यहां तक अटकलें थीं कि राज ठाकरे शायद शिवसेना (UBT) के कार्यक्रम में शामिल न हों। लेकिन सभी कयासों को गलत साबित करते हुए राज ठाकरे शानमुखानंद ऑडिटोरियम पहुंचे और बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के कार्यक्रम में शामिल हुए। राज ठाकरे के बयान ने साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में सिद्धांतों से ज्यादा सौदेबाज़ी हावी है और आने वाले दिनों में नगर निकाय सत्ता संघर्ष और तेज़ होने वाला है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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