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हम मरने जा रहे हैं, पुलिस वाले ने 1 लाख लिए, अब और मांग रहा; MP में युवक ने वीडियो बना लगा ली फांसी

हम मरने जा रहे हैं, पुलिस वाले ने 1 लाख लिए, अब और मांग रहा; MP में युवक ने वीडियो बना लगा ली फांसी

संक्षेप:

मध्य प्रदेश में पुलिसिया और निजी ब्लैकमेलिंग के कुचक्र में फंसकर एक युवक ने फांसी लगा ली है। उसका शव सड़क किनारे कदंब के पेड़ पर लटका मिला। मरने से पहले उसने सुसाइड नोट लिखा और वीडियो भी बनाया। उसने हेड कांस्टेबल और चार अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

Jan 09, 2026 08:05 pm ISTSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, मैहर
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"साहब, हम मरने जा रहे हैं... इन लोगों ने हमें बहुत प्रताड़ित किया है। पुलिस वाले 'कोल जी' ने आज ही 1 लाख रुपए लिए हैं, अब 1 लाख और मांग रहे हैं। कहते हैं पैसे दो, वरना झूठा मुकदमा कर दूंगा..."मौत को गले लगाने से पहले मोबाइल कैमरे के सामने अपना दर्द बयां करते हुए अनंतराम पटेल ने जब यह वीडियो बनाया होगा तो उसकी बेबसी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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मध्य प्रदेश में मैहर जिले के अमरपाटन थाना क्षेत्र में पुलिसिया और निजी ब्लैकमेलिंग के कुचक्र में फंसकर एक युवक ने फांसी लगा ली है। शुक्रवार सुबह उसका शव सड़क किनारे कदंब के पेड़ पर लटका मिला। मामले में अमरपाटन थाने के प्रधान आरक्षक लक्ष्मी रावत और चार अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगे हैं। युवक ने मरने से पहले 4 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

सुसाइड नोट में खुली 'वसूली' की पोल

मृतक अनंतराम ने अपने वीडियो और सुसाइड नोट में अपनी मौत का जिम्मेदार 5 लोगों को बताया है। अनंतराम ने वीडियो में कहा, "पुलिस वाले 'कोल जी' (सुसाइड नोट में नंबर लिखा है) ने 8 जनवरी को मुझसे 1 लाख रुपए लिए। अब 1 लाख और मांग रहे हैं। धमकी देते हैं कि पैसे नहीं दिए तो केस दर्ज कर दूंगा।" (परिजनों का आरोप है कि यह नंबर प्रधान आरक्षक लक्ष्मी रावत का है)। मृतक ने रामगोपाल (कठहा गांव), रेशमा, सुधा और हिमांशु पर झूठे केस में फंसाकर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। रामगोपाल ने हमसे 2 लाख लिए हैं। रेशमा ने 40 हजार लिए हैं। सुधा 50 हजार ली है। हिमांशु ने 50 हजार लिए हैं।

रात में सरकारी गाड़ी से आई थी पुलिस

अनंतराम के चचेरे भाई संदीप पटेल ने पुलिस की भूमिका पर रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे किए हैं। संदीप ने बताया कि गुरुवार रात अमरपाटन थाने की डायल-112 गाड़ी उनके घर आई थी। गाड़ी में ड्राइवर और प्रधान आरक्षक लक्ष्मी रावत सवार थे। रावत शराब के नशे में धुत था। पुलिस ने अनंतराम के 14 साल के बेटे को गाड़ी में बैठाया और पूछा कि खेत कहां है? फिर वे खेत गए और अनंतराम को अपने साथ ले गए। पुलिसकर्मी ने घर की महिलाओं से भी बदसलूकी की और संदीप का मोबाइल बंद करवा दिया जब वह वीडियो बनाने लगा। परिजनों का सवाल है कि जब पुलिस उसे रात में ले गई तो सुबह उसकी लाश पेड़ पर कैसे मिली?

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दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

मृतक के चचेरे भाई संदीप ने मांग की है कि दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस चले और परिवार से वसूले गए पैसे दोगुना करके वापस दिलाए जाएं। शुक्रवार सुबह शव मिलने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस को शव उतारने से रोक दिया। उनका कहना था कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, शव नहीं उठेगा। फिलहाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के समझाने के बाद परिजन मान गए हैं।

मामले की जांच में जुटी पुलिस

एडिशनल एसपी चंचल नागर ने बताया कि हमें सूचना मिली थी कि सुआ गांव में एक युवक ने आत्महत्या कर ली है। उसने सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट भी डाली थी। मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। नोट में जिन बातों और नामों का उल्लेख किया गया है, उनकी गंभीरता से जांच की जाएगी। जो भी दोषी होगा उस पर सख्त कार्रवाई होगी।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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