खंडवा में याकूब खान ने विधि विधान के साथ की हिन्दू धर्म में घर वापसी, बताई इसकी वजह

Mar 20, 2026 05:30 pm ISTSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, खंडवा, मध्य प्रदेश
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अशोक पालीवाल ने कहा की यह मंदिर सभी के लिए खुला है। याकूब खान जैसे भक्त हमारे यहां आते हैं और ईश्वर भक्ति की राह अपनाते हैं। अब तक महादेवगढ़ में 30 से अधिक लोग घर वापसी कर चुके हैं।

खंडवा में याकूब खान ने विधि विधान के साथ की हिन्दू धर्म में घर वापसी, बताई इसकी वजह

मध्य प्रदेश के खंडवा स्थित महादेवगढ़ मंदिर में गुरुवार को एक खास आयोजन हुआ, जिसमें नगर निगम में चालक के पद पर कार्यरत याकूब खान ने हिन्दू नववर्ष के दिन कृष्ण भाव में रमकर घर वापसी की। याकूब खान की उम्र 41 वर्ष है और बचपन से ही उन्हें भगवान कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति रही है। उन्होंने इस अवसर पर अपने जीवन को ईश्वर भक्ति के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया।

बचपन से कृष्ण भक्ति की कहानी

याकूब खान ने बताया कि उनके जीवन में बचपन से ही भगवान कृष्ण की छवि विशेष स्थान रखती थी। उन्होंने कहा, कृष्ण की भक्ति मेरे जीवन का मार्गदर्शन रही है। अब मैं पूरी तरह से अपने जीवन को उनके चरणों में समर्पित करना चाहता हूं। याकूब ने आगे बताया कि उनका परिवार विशेषकर दादाजी सलामतउल्ला, जो खंडवा जिले के बोरगांव में एक मदरसे के संचालक हैं, उनके इस निर्णय के विरोधी थे।

महादेवगढ़ मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना

महादेवगढ़ मंदिर के संचालक अशोक पालीवाल ने बताया कि याकूब खान ने उनसे मुलाकात कर अपने मन की बात साझा की। इसके बाद मंदिर में तत्काल विधि-विधान के अनुसार पूजा अर्चना कर, वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ याकूब की घर वापसी करवाई गई। अशोक पालीवाल ने कहा की यह मंदिर सभी के लिए खुला है। याकूब खान जैसे भक्त हमारे यहां आते हैं और ईश्वर भक्ति की राह अपनाते हैं। अब तक महादेवगढ़ में 30 से अधिक लोग घर वापसी कर चुके हैं।

अन्य मुस्लिम भक्तों की तरह खुद को किया समर्पित

याकूब खान ने बताया कि इतिहास में कई मुस्लिमों ने भगवान कृष्ण के प्रति अद्वितीय प्रेम और भक्ति दिखाई। इनमें रसखान नामक कवि भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने जीवन में कृष्ण भक्ति को प्रमुखता दी। याकूब ने कहा कि वह भी अपने शेष जीवन को इसी प्रकार कृष्ण भक्ति में समर्पित करेंगे।

परिवार में विरोध और व्यक्तिगत निर्णय

याकूब खान के परिवार ने उनके इस निर्णय का काफी विरोध किया। उन्होंने बताया कि मेरे दादाजी ने मुझे इस राह पर आने से रोका, लेकिन मेरी आत्मा ने मुझे इस मार्ग पर चलने का निर्देश दिया। मैं अपने जीवन के शेष समय में पूरी निष्ठा के साथ कृष्ण भक्ति करना चाहता हूं। अशोक पालीवाल ने बताया कि मंदिर में आने वाले भक्त चाहे किसी भी धर्म या समुदाय से हों, उनके लिए दरवाजे हमेशा खुले हैं। याकूब खान का यह कदम समाज में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है कि सच्ची भक्ति और आध्यात्मिक मार्ग किसी जाति या धर्म की सीमा में बंधा नहीं होता।

याकूब खान ने कहा निकालेंगे कांवड़ यात्रा

खंडवा महादेवगढ़ में याकूब खान का यह कदम धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भक्तों की अच्छी संख्या मौजूद रही, जिन्होंने याकूब की इस पहल का स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। याकूब ने बताया कि वह कांवड़ यात्रा भी निकालेंगे और हिंदू धर्म को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।

Sourabh Jain

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Sourabh Jain

सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


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