गर्भवती पत्नी की पत्थर से कुचलकर की थी हत्या; MP हाई कोर्ट ने क्यों घटा दी सजा

लाइव हिन्दुस्तान, भोपाल
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पत्नी की हत्या करने के बाद पति ने खुद उसके रिश्तेदारों को फोन करके हत्या की बात स्वीकार की थी। इसके बाद उसने खुद पुलिस कंट्रोल रूम और अन्य लोगों को फोन किया था।

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए गर्भवती पत्नी की हत्या के दोषी को कुछ राहत दी है। कोर्ट ने उसकी जेल की सजा कम कर दी है। कोर्ट ने माना है कि ये हत्या गंभीर और अचानक उकसावे में की गई थी। हत्या तक की गई जब पत्नी ने उससे कहा कि था कि वह उसके जैसे हजार पति रख सकती है। 18 जून को पास किए गए आदेश में जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि पत्नी की ये टिप्पणी पति के सम्मान और अहमियत पर की किया गया अप्रत्यक्ष हमला थी जो उसका आपा खोने के लिए काफी था।

कोर्ट ने कहा, पत्नी की इस टिप्पणी को गंभीर उकसावा माना जा सकता है क्योंकि इस तरह की बात का मतलब है इंसान या पति के तौर पर उसकी कोई अहमियत नहीं है। घटना 2021 की है जब 18-19 की दरमियानी रात को छिंदवाड़ा के कुलबहेरी नदी के पास किरण की मौत हो गई थी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक अभियोजन पक्ष के अनुसार, अपीलकर्ता पति शिव ने खुद किरण के रिश्तेदारों को फोन करके बताया था कि उसने अपनी पत्नी की पत्थर मारकर हत्या कर दी है। जब उससे पूछा गया कि उसने ऐसा क्यों किया, तो उसने कथित तौर पर कहा कि किरण ने उससे कहा था कि वह उसके जैसे हजार पति रख सकती है। ये सुनकर उसे गुस्से में आ गया और पत्थर से उस पर हमला कर दिया।

अभियोजन पक्ष ने ये भी कहा कि घटना के तुरंत बाद शिव ने पुलिस कंट्रोल रूम और अन्य गवाहों को खुद फोन किया था, जिनमें उसने अपनी पत्नी की हत्या करने की बात स्वीकार की थी। मेडिकल सबूतों से पता चला कि किरण, की मौत कई चोटों के कारण हुई, जिनमें उसकी पसलियों और छाती की हड्डी में फ्रैक्चर शामिल थे। वह 7 महीने की गर्भवती थी।

किस आधार पर मिली राहत

हाई कोर्ट ने सजा को बरकरार रखते हुए पाया कि यह घटना पहले से सोची-समझी नहीं थी। कोर्ट ने ध्यान दिया कि शिवा ने पास ही पड़ा एक पत्थर इस्तेमाल किया, घटना के बारे में तुरंत पुलिस और किरण के रिश्तेदारों को बताया और अपराध को छिपाने की कोशिश नहीं की।

कोर्ट ने यह भी पाया कि सबूतों से यह साबित नहीं होता कि शिवा ने किरण पर कई पत्थरों से बार-बार हमला किया था। कोर्ट ने गौर किया कि सिर्फ एक पत्थर ज़ब्त करके फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था, जबकि कुछ चोटें नदी के किनारे पड़े नुकीले पत्थरों से भी लग सकती थी, जहां यह घटना हुई थी। इन सब बातों पर गौर करते हुए कोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से मंजूर कर लिया। कोर्ट ने सजा के आधार को बदलकर IPC की धारा 304 पार्ट II कर दिया और शिवा की सजा को घटाकर सात साल की कठोर कैद कर दिया। हालांकि उसका जुर्माना बरकरार रखा।

Aditi Sharma

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अदिति शर्मा

अदिति शर्मा डिजिटल मीडिया की एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें लाइव हिंदुस्तान, TV9 भारतवर्ष और न्यूज नेशन जैसे संस्थानों में 9 वर्षों का अनुभव है। BCA और MMC की शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ, वे तकनीक और पत्रकारिता के मूल्यों का सटीक संतुलन बनाती हैं। उनकी विशेषज्ञता राजनीति, अपराध और शोध-आधारित लेखन में है, जहां वे सकारात्मक प्रभाव डालने वाली विश्वसनीय पत्रकारिता को प्राथमिकता देती हैं।


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