जंतर-मंतर ही नहीं, यहां भी 15 दिन से भूख हड़ताल पर हैं कई लोग, सरकारी प्रोजेक्ट का क्यों कर रहे हैं विरोध

लाइव हिन्दुस्तान, छतरपुर
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एक तरफ देस की राजधानी दिल्ली में पेपर लीक को लेकर भूख हड़ताल चल रही है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली से 650 कीलोमीटर की दूरी पर मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट के खिलाफ कुछ और लोग हैं, जो भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।

छतरपुर में केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे ग्रामीण

एक तरफ देस की राजधानी दिल्ली में पेपर लीक को लेकर भूख हड़ताल चल रही है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली से 650 कीलोमीटर की दूरी पर मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट के खिलाफ कुछ और लोग हैं, जो भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल का आज 21वां दिन है, जबकि छतरपुर के लोग केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे लोगों की भूख हड़ताल का आज 15वां दिन है।

अनोखे तरीके से कर रहे विरोध प्रदर्शन

छतरपुर में केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट के विरोध में लोग अलग-अलग तरह के तरीके अपना रहे हैं। यहां जल सत्याग्रह, चिता सत्याग्रह के साथ प्रदर्शनकारी महिलाएं सांकेतिक फांसी पर भी दिखाई दे रही हैं। इस दौरान कई महिलाएं गले में फांसी डालकर खड़ी हैं, तो कई महिलाएं अपने बच्चों को लेकर चिता पर लेटी हुई हैं। इन महिलाओं का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर पिछले 11 दिनों से अनशन पर हैं। इस दौरान अमित के साथ प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप है कि 11 दिनों में मात्र एक बार उनका मेडिकल टेस्ट किया गया।

क्या है मांग

छतरपुर के कुपी गांव के पास बराना नदी के किनार प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप है कि इस रिवर लिंक प्रोजेक्ट के लिए उनका पुनर्वास ठीक से नहीं हुआ और विस्थापन से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट, जो 'नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान' के तहत देश का पहला नदी जोड़ो प्रोजेक्ट है, का मकसद केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी में पहुंचाना है ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखा-प्रवण बुंदेलखंड इलाके में सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि, इस प्रोजेक्ट का विस्थापन, पुनर्वास और जंगलों व वन्यजीवों (जिसमें पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा भी शामिल है) पर इसके असर से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों के कुछ वर्गों और पर्यावरण समूहों ने विरोध किया है।

Mohammad Azam

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संक्षिप्त विवरण

मोहम्मद आजम पिछले 3.5 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में बतौर कंटेंट प्रोडूसर काम कर रहे हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: मोहम्मद आजम पिछले तीन सालों से ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। कम समय में आजम ने पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया की बारीकियां सीखी हैं और अब भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट न्यूज टीम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

आजम ने ग्रेजुएशन तक विज्ञान की पढ़ाई की है, लेकिन राजनीतिक विषयों में रुचि उनको पत्रकारिता की तरफ खींच लाई। आजम ने अपना पोस्ट ग्रेजुएशन देश के अग्रणी संस्थानों में से एक भारतीय जनसंचार संस्थान से पूरा किया। विज्ञान बैकग्राउंड होने के चलते आजम को फैक्ट आधारित पत्रकारिता करने में महारत हासिल है।


राजनीतिक पत्रकारिता में आजम

आजम की देश की राजनीति में काफी रुचि है। आजादी के पहले से लेकर आजादी के बाद की राजनीतिक घटनाओं की कई किताबों का अध्ययन होने के चलते अच्छी समझ है। यही कारण रहा कि आजम ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत राजनीतिक बीट से की। राजनीति के साथ आजम क्राइम और सोशल मीडिया पर वायरल चल रही खबरों में भी अच्छी महारत हासिल है।


पत्रकारिता का उद्देश्य

आजम का मानना है कि पत्रकारिता जनपक्षीय होनी चाहिए। पत्रकारिता के दौरान अपनी भावनाओं को काबू में रखकर तथ्य आधारित पत्रकारिता आजम को जिम्मेदार बनाती है। पत्रकारिता में आजम तथ्य आधारित सूचनाएं पहुंचाने के साथ ही, साहित्यिक लेखन में भी महारत हासिल है।


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