हम यहां भी निपटना जानते हैं और मैदान में भी; MP विधानसभा में एक-दूसरे पर क्यों चीखने लगे सीएम और नेता विपक्ष
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि साल 2023 के विधेयक में जनगणना और परिसीमन के बाद आरक्षण लागू करने का प्रावधान था, जिसका कांग्रेस ने समर्थन किया था, लेकिन अब इसे टालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चाहे तो विशेष सत्र बुलाकर इसे तुरंत लागू कर सकती है।

मध्य प्रदेश विधानसभा में हाल ही में एक दिन का विशेष सत्र आयोजित किया गया था, जिसमें 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम के क्रियान्वयन को लेकर लाया गया शासकीय संकल्प भारी हंगामे और लंबी बहस के बाद पारित हो गया। इस एक दिवसीय विशेष सत्र में विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल ने महिला अधिकारों के मुद्दे पर सरकार को घेरा और विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट भी किया। इस दौरान एक पल ऐसा भी आया जब मुख्यमंत्री मोहन यादव और नेता विपक्ष के बीच वाकयुद्ध शुरू हो गया और दोनों एक-दूसरे पर जमकर चीखते-चिल्लाते दिखाई दिए। इस दौरान सीएम ने सिंघार के तेज बोलने पर आपत्ति जताई और बेहद नाराजगी भरे लहजे में कहा कि 'आपके चिल्लाने से कुछ नहीं होने वाला है। आपसे 10 गुना ज्यादा चिल्ला सकते हैं। कपड़े फाड़ने से भी कुछ नहीं होगा। सरकार अपने बलबूते पर भाजपा के लोगों ने बनाई है, इसलिए कोई डरा नहीं सकता है।'
दरअसल सोमवार को भोपाल में विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत में कांग्रेस द्वारा वर्तमान सीटों पर तत्काल प्रभाव से 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने संबंधी अशासकीय संकल्प लाया गया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष द्वारा चर्चा के लिए अस्वीकार कर दिया गया। इसी दौरान जब मुख्यमंत्री विपक्ष के इस संकल्प पर पहले चर्चा करने पर आपत्ति जता रहे थे तो तभी नेता प्रतिपक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए सरकार के प्रस्ताव की कोई सूचना विपक्ष को नहीं मिलने की जानकारी दी, और विपक्ष के संकल्प पर चर्चा कराने की मांग की। इसी बीच मुख्यमंत्री ने सिंघार के जोर से बोलने पर आपत्ति जताई और दोनों नेताओं के बीच जोरदार बहस हो गई।
विपक्ष ने पेश किया था अशासकीय संकल्प
विपक्ष के अशासकीय संकल्प पर पहले चर्चा कराने की मांग को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने अस्वीकार कर दिया और उन्होंने कहा, 'जो भी अशासकीय संकल्प या अन्य प्रकार की चर्चाओं की मांग की गई है, मैं उस अनुरोध को अस्वीकार करता हूं, और आप सबसे अनुरोध करता हूं की चर्चा को हम आगे बढ़ाएं। उमंग सिंघार ने कहा, 'माननीय अध्यक्ष महोदय, संसदीय मंत्री जी ने बताया कि सरकार का विषय परिसीमन के बाद आरक्षण का है, जबकि हमारा अशासकीय संकल्प है कि परिसीमन कब होगा, कब जनगणना होगी, इसलिए लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को आज से आरक्षण मिलना चाहिए।'
दोनों नेताओं के बीच कुछ यूं हुई गर्मागर्म बहस
विपक्ष के संकल्प का विरोध करते हुए मुख्ममंत्री मोहन यादव ने कहा, 'प्रस्ताव तो हमारा पहले आया, हमारे प्रस्ताव पर ही सारी बात हुई। ऐसे में जब वो संकल्प लाया तो विपक्ष की यह बात कितनी झूठी है कि पहले उनका संकल्प लाया गया। ये कौन सी बात हुई, पहले हमारा प्रस्ताव आया, उस प्रस्ताव पर संशोधन की बात आई, उसी आधार पर ये सारे लोग बैठे हैं, तो उसी की बात हम कर रहे हैं। इसमें क्या गलत है।'
सिंघार ने कही नियम बताने की बात
इसी बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सीएम को टोकते हुए बोले, 'माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने नियम बता दिया माननीय मुख्यमंत्री जी को, मैं वापस बताऊं क्या, मैं पॉइन्ट ऑफ ऑर्डर की बात कर रहा हूं, मैं वापस से नियम बताऊं मुख्यमंत्री जी को। हमें सूचना ही नहीं मिली, अगर आपका प्रस्ताव पहले आया है तो सदन से या विधानसभा से हमें सूचना क्यों नहीं मिली।'
सीएम बोले- हम यहां पर भी निपटना जानते हैं और मैदान में भी
तभी सिंघार को बीच में टोकते हुए मुख्यमंत्री बोलते हैं, 'आपके चिल्लाने से कुछ होने वाला नहीं है, आपसे कई गुना ज्यादा चिल्ला सकते हैं। आपके चिल्लाने से कुछ नहीं होने वाला है। आपसे 10 गुना ज्यादा चिल्ला सकते हैं। कपड़े फाड़ने से भी कुछ नहीं होगा। सरकार अपने बलबूते पर भाजपा के लोगों ने बनाई है। इसलिए कोई डरा नहीं सकता है। डराने की कोई बात करेगा, ये बात मंजूर नहीं करेंगे। डराने की बजाय अपनी बात को कहने का तरीका आना चाहिए। माननीय अध्यक्ष महोदय चिल्लाने से कुछ नहीं होगा। चिल्लाना दस गुना ज्यादा जानते हैं, मैदान में भी जानते हैं। ये बात गलत तरीके से कही जा रही है, ये नियम कानून के साथ चलने वाला सदन है। हम डरने वाले नहीं हैं, अगर कोई डराएगा, हम निपटने के लिए तैयार हैं।'
सिंघार बोले- बाकी भाजपा नेताओं से क्या उम्मीद करें
उधर इसी वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए उमंग सिंघार ने बुधवार को लिखा, 'मुख्यमंत्री जी अपने पुराने स्वभाव को छोड़ नहीं पा रहे हैं सदन में ऐसी अभद्र भाषा और अमर्यादित रवैया, वो भी प्रदेश के मुखिया हो कर, तो फिर बाकी भाजपा नेताओं से क्या उम्मीद करें?' (एजेंसी इनपुट के साथ)
लेखक के बारे में
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