
अब चिदंबरम, दिग्विजय, राहुल गांधी को चौराहों पर खड़ा कर..; साध्वी प्रज्ञा के बरी होने पर रो पड़ीं उमा भारती
संक्षेप: उमा भारती ने कहा, उसे जिस तरह से प्रताड़ित किया गया था, वह इतना शर्मनाक था, इतना यातनादायक था, कि बड़ी मुश्किल से कोई स्त्री उस प्रताड़ना को झेल सकती थी। आप सोच नहीं सकते हैं कि आज इस फैसले से मुझे कितनी आंतरिक शांति मिली है।
17 साल पुराने मालेगांव विस्फोट मामले में NIA कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सहित सभी आरोपियों को गुरुवार को बरी कर दिया। इस फैसले पर भाजपा की दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने बहुत खुशी जताई है। अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के दौरान वह बहुत भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू भी निकल पड़े। भारती ने कहा कि इस फैसले से उन्हें असीम शांति मिली है, और साध्वी प्रज्ञा ने जो प्रताड़ना झेली है उसे सहन करना किसी भी महिला के लिए बहुत मुश्किल है। साथ ही उन्होंने पी. चिदंबरम, दिग्विजय सिंह, राहुल गांधी जैसे नेताओं का नाम लेकर कहा कि इस फैसले के बाद 'भगवा आतंकवाद' शब्द को स्थापित करने की कोशिश करने वाले सभी नेताओं के खिलाफ भी असाधारण कार्रवाई होनी चाहिए।
फैसले को लेकर मीडिया से बात करते हुए उमा भारती ने कहा, 'मैं इतनी खुश हूं कि मेरे पास व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। जब प्रज्ञा नासिक की जेल में थीं, तो मुझे महाराष्ट्र पुलिस के एक अधिकारी के माध्यम से पता चला था कि उन्हें बहुत प्रताड़ित किया गया था। जब मैं उनसे मिलने तब गई थी, जब कोई और उनसे मिलने नहीं जाता था। जब मैं प्रज्ञा से मिली तो मैं फूट-फूटकर रोई।' इतना कहते ही भारती एकबार फिर भावुक हो गईं और उनकी आंखों में आंसू आ गए।
उमा भारती ने आगे कहा, 'उनसे मिलकर मैं रो रही थी और वो मुझे चुप करा रही थी। क्योंकि उस अधिकारी से मैंने उनके साथ हुई प्रताड़ना के बारे में जो भी मैंने सुना था, उसने बताया कि वही यह सब उसके साथ हुआ है। उसे जिस तरह से प्रताड़ित किया गया था, वह इतना शर्मनाक और इतना यातनादायक था, कि बड़ी मुश्किल से कोई स्त्री उस प्रताड़ना को झेल सकती थी। आप सोच नहीं सकते हैं कि आज इस फैसले से मुझे कितनी आंतरिक शांति मिली है।'
'चिदंबरम, दिग्विजय को चौराहों पर खड़ा करके…'
भाजपा की फायरब्रांड नेता ने आगे कहा, 'अब मैं यह चाहती हूं कि पी.चिदंबरम, दिग्विजय सिंह, राहुल गांधी, वामपंथी, समाजवादी और कांग्रेस पार्टी के वे सभी नेता जो 'भगवा आतंकवाद' शब्द गढ़ करके उसको सत्यापित कर रहे थे, आज उनको चौराहों पर खड़ा करके कौन सी सजा होनी चाहिए, अब मैं यह जानना चाहती हूं, देश की जनता यह जानना चाहती है। उनके खिलाफ साधारण नहीं असामान्य कार्रवाई करनी चाहिए।'





