जिस बात का डर था वही निकला; इंदौर में मौतों की वजह कंफर्म हो गई
जिस बात का डर था वह सच निकला। इंदौर में एक के बाद एक कई लोगों की मौत प्रदूषित पानी की वजह से हुई है, इसकी लैब रिपोर्ट में पुष्टि हो गई है। इंदौर के भागीरथपुरा में फैले डायरिया की वजह से 13 लोगों की मौत का दावा स्थानीय लोग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने 4 की पुष्टि की है।

जिस बात का डर था वह सच निकला। इंदौर में एक के बाद एक कई लोगों की मौत प्रदूषित पानी की वजह से हुई है, इसकी लैब रिपोर्ट में पुष्टि हो गई है। इंदौर के भागीरथपुरा में फैले डायरिया की वजह से 13 लोगों की मौत का दावा स्थानीय लोग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने 4 की पुष्टि की है। वहीं, करीब 200 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। करीब 1400 लोग 'जहरीले' पानी से प्रभावित हुए हैं।
जांच रिपोर्ट से यह पुष्टि हो गई है कि मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी के उस हिस्से में जिंदगी को खतरे में डालने वाली पानी की आपूर्ति हो रही थी, जबकि शहर को पिछले 8 सालों से देश का सबसे साफ शहर घोषित किया जा रहा है। इंदौर के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने गुरुवार को पत्रकारों को बताया कि मेडिकल कॉलेज की लैब से तैयार रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि भारीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन में लीकेज की वजह से पानी प्रदूषित हो गया था जिसकी वजह से डायरिया फैल गया। उन्होंने टेस्ट रिपोर्ट में सामने आए और अधिक तथ्यों को साझा नहीं किया।
पाइपलाइन में लीकेज और ऊपर बने टॉयलेट से आया संकट
अधिकारियों का कहना है कि पानी आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन में एक पुलिस आउटपोस्ट के पास लीकेज पाया गया है, जहां इसके ऊपर एक टॉयलेट का निर्माण किया गया है। उन्होंने बताया कि लीकेज की वजह से इलाके का पानी प्रदूषित हो गया था। एडिशनल चीफ सेक्रेट्री संजय दुबे ने कहा, 'हम भागीरथपुरा में पूरे पाइपलाइन की बारीकी से जांच करके यह पता लगा रहे हैं कि कहीं और भी तो लीकेज नहीं।' उन्होंने कहा कि जांच के बाद पाइपलाइन से साफ पानी की आपूर्ति की गई है। फिर भी एहतियात के तौर पर लोगों को पानी उबालकर पीने को कहा गया है। दुबे ने कहा, 'हमने इनके सैंपल भी लिए हैं और टेस्टिंग के लिए भेजा है।'
338 का घर पर इलाज, 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती
वरिष्ठ नौकरशाह ने कहा कि भागीरथपुरा से सबक लेकर पूरे राज्य के लिए एसओपी जारी की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटना ना हो। दुबे मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर भागीरथपुरा में स्थिति का जायजा लेने पहुंचे थे। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि भागीरथपुर में 1,714 घरों की जांच गुरुवार को की गई। 8571 लोगों का परीक्षण किया गया। 338 लोगों में उल्टी और दस्त के हल्के लक्षण मिले, जिनका घर पर ही इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 8 दिन में 272 लोगों को अस्पतालों में भर्ती किया गया है जिनमें से 71 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। 201 मरीज अस्पतालों में हैं जिनमें से 32 आईसीयू में हैं।
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Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
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