महाकाल मंदिर में 'हल्दी खेला' पर छिड़ा विवाद, मंदिर समिति कर सकती है बड़ा फैसला
पुजारियों का कहना है कि शिव नवरात्रि में केवल पूजा, आराधना और संकल्प की परंपरा है जो पंचमी से शुरू होता है। शिव पुराण और अन्य शास्त्रों में महाशिवरात्रि पर शिव विवाह इस प्रकार मनाने का जिक्र नहीं है।

मध्य्प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि को लेकर 'हल्दी खेला' पर विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर के पुजारियों ने महिलाओं के हल्दी लगाकर नाचने गाने को लेकर आपत्ति जताई है। पुजारियों का कहना है कि शिव नवरात्रि में केवल पूजा, आराधना और संकल्प की परंपरा है जो पंचमी से शुरू होता है। शिव पुराण और अन्य शास्त्रों में महाशिवरात्रि पर शिव विवाह इस प्रकार मनाने का जिक्र नहीं है। पुजारियों का कहना है कि आजकल लोग इसे शिव विवाह के रूप में मानते हैं इस पर्व पर हल्दी खेलना सनातन परंपरा के विपरीत है। हल्दी लगाने की परंपरा घातक न हो जाए इसलिए इस पर रोक लगाना चाहिए। हालांकि मंदिर समिति के प्रशासक ने कहा कि शिकायतें मिली हैं ऐसे में अन्य पुजारियों से बात कर इस पर रोक लगाने पर विचार किया जाएगा।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व की शुरुआत हो चुकी है ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर भगवान महाकाल को दूल्हा बनाया जाता है और महा शिवनवरात्रि के नौ दिनों तक हर दिन विशेष शृंगार किया जाता है। इस दौरान सुबह मंदिर परिसर में कोटेश्वर भगवान का पूजन-अर्चन होता है। पूजन के बाद रोजाना दर्शन के लिए आने वाली करीब 50 से 100 महिलाएं भगवान शिव के विवाह का उत्सव मनाती हैं। परिसर में महिलाओं द्वारा एक-दूसरे को हल्दी लगाकर नाच-गाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर के पुजारियों ने इसे सनातन परंपरा के विपरीत बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
शिव पुराण में नहीं है उल्लेख
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा का कहना है कि इसको लेकर शिव पुराण और अन्य शास्त्रों में शिवरात्रि पर शिव विवाह और इस प्रकार मनाने का जिक्र नहीं है। हल्दी खेलना सनातन परंपरा के विपरीत है। हल्दी लगाने की परंपरा भी घातक न हो जाए। इसलिए मंदिर समिति से इस पर समय रहते प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
भगवान कोटेश्वर को उबटन अर्पित करने की परंपरा
महेश शर्मा का कहना है कि मंदिर परिसर में कोटेश्वर भगवान को उबटन अर्पित करने की परंपरा है। नौ दिन तक भगवान महाकाल का विशेष शृंगार किया जाता है। महाशिवरात्रि पर भगवान को दूल्हे के रूप में सजाकर सेहरा अर्पित किया जाता है। यही वजह है कि श्रद्धालु इसे शिव विवाह के रूप में मनाने लगे हैं।
महेश शर्मा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शिव नवरात्रि में केवल पूजा, आराधना और संकल्प की परंपरा है। यह पंचमी से शुरू होता है, आजकल लोग इसे शिव विवाह के रूप में मानते हैं। ओर इसे मजाक के रूप में हल्दी लगाने और खेलने के रूप में ले लिया गया। महाकाल मंदिर में नियमित दर्शन के लिए आने वाली महिलाओं ने करीब 11 साल पहले हल्दी खेलने की परंपरा की शुरूआत की थी। महिलाएं ढोल की थाप पर नाचती हैं। इस तरह वे एक-दूसरे को हल्दी लगाकर उत्सव मनाने लगीं।
पुजारियों से चर्चा कर उचित निर्णय
महाकाल मंदिर प्रशासन को भी इस संबंध में शिकायतें मिली हैं कि मंदिर परिसर में परंपरा के विपरीत हल्दी खेलने का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर के अन्य पुजारियों से चर्चा कर जो भी उचित निर्णय होगा वह किया जाएगा हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही प्रशासक इस संबंध में आदेश जारी कर देंगे।
रिपोर्ट विजेन्द्र यादव
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