उज्जैन में तमाम कोशिशें नाकाम, टस से मस ना हुए 'खड़े हनुमान', क्या बोले विशेषज्ञ?
मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को दूसरे जगह ले जाने की नगर निगम की तमाम कोशिशें फेल हो गई हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी मूर्ति टस से मस नहीं हुई है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में खड़े हनुमान जी को हटाने में निगम के पसीने छूट गए हैं। 3 दिन बाद भी प्रतिमा को हटाया नही जा सका है। क्रेन लगाने के बाद भी जब प्रतिमा हटाई नहीं जा सकी तो अधिकारी भी हैरान नजर आए। अब यह घटना कौतूहल का विषय बन गई है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि निगम की इतनी कोशिशों के बाद भी प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। वहीं हिंदूवादी संगठन, युवक कांग्रेस और स्थानीय लोगों ने भी हनुमान चालीसा पाठ के साथ प्रतिमा को हटाने का विरोध किया है। अधिकारियों का कहना है कि अब मंगलवार को मंदिर हटाने की एक और कोशिश की जाएगी।
इसलिए चौड़ी की जा रही सड़क
गौरतलब है कि उज्जैन में महाकुम्भ सिहस्थ 2028 के लिए सड़क के चौड़ीकरण और महाकाल की सवारी को लेकर कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क के चौड़ीकरण की जद में आए प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को सुरक्षित विस्थापित करने की कोशिशें की जा रही हैं। प्रशासन पिछले 5 दिन से प्रतिमा को हटाने की कोशिशें कर रहा है। प्रतिमा को हटाने का काम गुरुवार से किया जा रहा है लेकिन वह टस से मस नहीं हो रही है।
मूर्ति पर लगाया गया टेंट
निगम की ओर से मंदिर के भवन को तोड़ा जा चुका है। यही नहीं हनुमान जी की प्रतिमा को कैनोपी टेंट लगाकर सुरक्षित किया गया है। छोटा सराफा, बड़ा सराफा, नमक मंडी, गोपाल मंदिर, दानी गेट और शिप्रा नदी का यह क्षेत्र प्राचीन उज्जयिनी के महत्वपूर्ण हिस्सों में रहा है। यह क्षेत्र सिंधिया राजवंश के करीब 300 साल पुराने इतिहास, राजा भोज काल के चौबीस खंभा क्षेत्र और बाद के दौर में बने सती गेट की विरासत से जुड़ा है।
ढंकी जा रही थी जगह तभी ब्लास्ट, अपशकुन की चर्चा
संतो का कहना है कि सनातन परंपरा में प्राण-प्रतिष्ठित प्रतिमा का धार्मिक महत्व होता है इसलिए भक्तों की भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान खुद नहीं जाना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि रात को प्रतिमा हटाने के लिए जिस समय स्थान को प्लास्टिक से ढंका जा रहा था तभी प्रतिमा के सामने बिजली के पोल पर स्पार्किंग के कारण ब्लास्ट हो गया और लाइट चली गई थी। इसको लेकर भी शहरवासियों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग बड़ी अनहोनी का भी दावा कर रहे हैं।
प्रतिमा ऐतिहासिक… क्या बोले विशेषज्ञ?
वहीं इस घटना पर विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी का कहना है कि यह प्रतिमा मालवा के बेसाल्ट पत्थर से बनी है। यह मूर्ति करीब एक हजार साल पुरानी राजा भोज काल की प्रतिमा निर्माण परंपरा से जुड़ी हो सकती है। यह ऐतिहासिक धरोहर है। परमार काल और राजा भोज के समय इस तरह के मजबूत बेसाल्ट पत्थर पर मूर्तियां तराशने का चलन था।
ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान
डॉ. सोलंकी ने यह भी कहा कि मंदिर का स्थान भी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। प्रतिमा की सटीक उम्र और स्थापना के समय का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण और विशेषज्ञ जांच की जरूरत है।
वैज्ञानिक तरीके से दूसरी जगह ले जाई जा सकेगी प्रतिमा
प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया पर डॉ. सोलंकी ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के पास पुरानी संरचनाओं को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की विशेषज्ञता है। वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर मूर्ति को बिना नुकसान पहुंचाए स्थानांतरित किया जा सकता है।


