लिव-इन रिलेशनशिप पर 10 सख्त नियम बना रही BJP सरकार, तोड़ने पर 3 महीने की जेल भी होगी
मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार इस मॉनसून सत्र यूसीसी विधानसभा में पेश करने वाली है। लिव इन रिलेशनशिप के लिए 10 सख्त नियम हैं। नियम तोड़ने पर तीन महीने की जेल होगी।

मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार इस मॉनसून सत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) ला सकती है। विधानसभा में बिल पास कराने के बाद मध्यप्रदेश यूसीसी लागू करने वाला चौथा राज्य बन जाएगा। सबसे पहले उत्तराखंड राज्य में यूसीसी लागू हुआ था। इसके बाद असम और गुजरात में सरकार ने यूसीसी विधानसभा में पास कराया। एमपी में भाजपा सरकार के प्रस्तावित यूसीसी बिल में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर 10 सख्त नियम हैं। इन नियमों को तोड़ने पर तीन महीने तक की जेल भी हो सकती है।
मध्य प्रदेश के यूसीसी के ड्राफ़्ट में कहा गया है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को उस जिले के रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा जहां वे रहते हैं। अगर रिश्ता खत्म होता है, तो रजिस्ट्रेशन को भी खुद ही रद्द करना होगा। यह भी कहा गया है कि लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन न कराने पर तीन महीने तक की जेल हो सकती है।
मॉनसून सत्र में लाने की है तैयारी
भाजपा सरकार यूसीसी बिल 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश कर सकती है। बिल के ड्राफ़्ट में यह भी कहा गया है कि लिव-इन रिलेशनशिप में आने वाले लोगों के माता-पिता को उनके रिश्ते की सच्चाई बतानी होगी। स्थानीय पुलिस अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी रजिस्टर्ड लिव-इन जोड़ों का रिकॉर्ड रखेंगे।
लिव-इन पार्टनर छोड़ दे तो क्या होगा?
प्रस्तावित यूसीसी में नियमों के तहत जहां जोड़ा बिना रजिस्ट्रेशन के रह रहा है तो उसके पड़ोसी या मकान मालिक को यह अधिकार होगा कि वह मामले की शिकायत पुलिस या प्रशासन को करे। एक और महत्वपूर्ण नियम में कहा गया है कि अगर कोई पुरुष अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़ देता है, तो उसे महिला को गुज़ारा-भत्ता देना होगा।
विरासत कानून में भी बड़े बदलाव
ड्राफ़्ट में विरासत कानूनों में भी बड़े बदलावों का प्रस्ताव है। अभी, किसी मृत पुरुष की संपत्ति आमतौर पर उसकी पत्नी, बच्चों और मां को मिलती है। प्रस्तावित नए नियम के तहत, पिता भी उत्तराधिकारी बन जाएगा और बेटे की संपत्ति में हिस्से का हकदार होगा। ड्राफ्ट में "मां" शब्द की जगह "माता-पिता" शब्द को जोड़ा गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अगर मां जीवित नहीं है, तो भी पिता के अधिकार बने रहें।
समिति ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट
यूसीसी का ड्राफ़्ट तैयार करने के लिए बनाई गई समिति ने राज्य सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। सदन में पेश किए जाने से पहले, प्रस्तावित यूसीसी पर 19 जुलाई को कैबिनेट की एक विशेष बैठक बुलाई गई है।
यूसीसी के तहत लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर 10 बेहद सख्त नियम हैं। एक नजर इन पर डालते हैं-
1- कपल को लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा।
2- कपल को जिस जिले में रहना है, वहीं के रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
3- रिश्ता खत्म होने पर रजिस्ट्रेशन औपचारिक रूप से रद्द कराना भी जरूरी।
4- रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर 3 महीने तक की जेल।
5- लिव-इन में रहने वाले युवक-युवती के माता-पिता को उनके रिश्ते की जानकारी होनी चाहिए।
6- लोकल पुलिस थाने अपने क्षेत्र के सभी रजिस्टर्ड लिव-इन कपल्स का रिकॉर्ड रखेंगे।
7- बिना रजिस्ट्रेशन के लिव-इन में रह रहे कपल के खिलाफ पड़ोसी या मकान मालिक शिकायत कर सकते हैं।
8- प्रशासन को अनरजिस्टर्ड लिव-इन संबंध की जांच का अधिकार
9- बिना रजिस्ट्रेशन रह रहे कपल के खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई का अधिकार।
10- यदि लड़का लिव-इन पार्टनर को छोड़ दे तो उसे महिला को भरण-पोषण देना होगा।
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