अगर पुलिस ठीक से जांच कर रही होती तो...; HC जाएगा ट्विशा का परिवार, सास की जमानत पर भी सवाल
भोपाल में अपने ससुराल में मृत पाई गई ट्विशा शर्मा का परिवार अब हाई कोर्ट का रुख करने की तैयारी में है। पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर पुलिस ठीक से जांच कर रही होती तो आरोपियों के फोन पुलिस के पास होते। साथ ही उन्होंने ट्विशा की सास की अग्रिम जमानत पर भी सवाल उठाए हैं।

भोपाल में अपने ससुराल में मृत पाई गई ट्विशा शर्मा का परिवार अब हाई कोर्ट का रुख करने की तैयारी में है। पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर पुलिस ठीक से जांच कर रही होती तो आरोपियों के फोन पुलिस के पास होते। साथ ही उन्होंने ट्विशा की सास की अग्रिम जमानत पर भी सवाल उठाए हैं।
भोपाल की एक सेशन कोर्ट द्वारा ट्विशा शर्मा का दूसरा पोस्टमॉर्टम दिल्ली के एम्स में कराने की मांग वाली याचिका खारिज किए जाने के बाद पीड़ित परिवार अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख करने की तैयारी में है। परिवार हाई कोर्ट से ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करने और इस मामले में दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग करेगा।
कानून विशेषज्ञों से भी सलाह ली
पीड़ित परिवार की ओर से पेश वकील अंकुर पांडे ने दावा किया कि ट्विशा शर्मा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत दी विधायिका द्वारा पारित अधिनियम और उसके तहत बनाए गए कानूनी प्रावधानों के विपरीत है। वकील पांडे ने कहा कि हमने गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत के आदेश की जांच की। हाई कोर्ट के कानून विशेषज्ञों से भी सलाह ली गई। यह जमानत कानून के स्थापित सिद्धांत के विपरीत दी गई है। गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत की राहत विधायिका द्वारा पारित अधिनियम और उसके तहत बनाए गए कानूनी प्रावधानों के विपरीत दी गई है। इसलिए, हम जमानत रद्द करवाने के लिए हाई कोर्ट जा रहे हैं।
दूसरी पोस्टमार्टम कराने का निर्देश मांगेंगे
उन्होंने आगे कहा कि वे दूसरी पोस्टमार्टम कराने के लिए भी निर्देश मांगेंगे। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दूसरी पोस्टमॉर्टम की अर्जी को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया था कि शव को दिल्ली नहीं भेजा जा सकता, क्योंकि वह अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। वकील ने कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दूसरी बार पोस्टमॉर्टम कराने की हमारी अर्जी सिर्फ इस आधार पर खारिज कर दी कि शव को दिल्ली नहीं भेजा जा सकता। यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
शव को राज्य से बाहर भेजा जाए
मजिस्ट्रेट ने थाना प्रभारी को निर्देश दिया कि वे पता लगाएं कि क्या मध्य प्रदेश में शव को माइनस 80 डिग्री सेल्सियस पर सुरक्षित रखने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। एसएचओ आज मजिस्ट्रेट के सामने इस संबंध में अपना जवाब पेश करेंगे। हम हाई कोर्ट का रुख कर रहे हैं और दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग करेंगे। साथ ही यह भी अनुरोध करेंगे कि यदि मध्य प्रदेश में शव को आवश्यक तापमान पर सुरक्षित रखने की कोई सुविधा नहीं है तो शव को राज्य से बाहर भेजा जाए।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स को लेकर सवाल
उन्होंने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान पेश किए गए कथित कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 12 और 13 मई के रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि घटना के बाद कई लोगों से लगातार बातचीत हो रही थी। एडवोकेट पांडे ने कहा कि गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके वकील ने 12 और 13 मई के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स पेश किए थे। उनकी जांच करने पर पता चला कि घटना के बाद कुछ खास लोगों को लगातार कॉल किए जा रहे थे।
फोन नंबरों से जुड़े लोगों की पहचान की मांग
पीड़ित परिवार को शक है कि जांच को प्रभावित करने में कुछ प्रभावशाली लोगों का हाथ हो सकता है। परिवार की मांग है कि इन फोन नंबरों से जुड़े लोगों की पहचान की जाए। एडवोकेट पांडे ने कहा कि अगर पुलिस ठीक से जांच कर रही होती तो आरोपियों के फोन पुलिस के पास होते और जांच एजेंसी कॉल डिटेल्स वेरिफाई कर लेती। चूंकि ऐसा नहीं किया जा रहा है, इसलिए वे खुद ही कोशिशें कर रहे थे।
जांच के लिए एसआईटी बनाई गई
बता दें कि नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा ने दिसंबर 2025 में भोपाल के रहने वाले समर्थ सिंह से शादी की थी। 12 मई को उनकी मौत हो गई। उनके परिवार ने उनके ससुराल वालों पर मानसिक प्रताड़ना और दहेज के लिए परेशान करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने उनके पति और सास गिरिबाला सिंह (रिटायर्ड जज) के खिलाफ केस दर्ज किया है। मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
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