ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत नहीं हुई खारिज, कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

Ratan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, जबलपुर
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Twisha Sharma death case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को लेकर लंबी और तीखी बहस हुई। गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत नहीं हुई खारिज, कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को लेकर लंबी और तीखी बहस हुई। जस्टिस देवनारायण मिश्रा की अदालत में मृतका के परिवार, राज्य सरकार और सीबीआई की ओर से बेल रद्द करने की मांग की गई, जबकि गिरिबाला सिंह की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ दहेज प्रताड़ना या सबूतों से छेड़छाड़ का कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं है। फिलहाल गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। जानिए, कोर्ट रूम में सभी पक्ष के वकीलों ने क्या दलीलें दीं।

शुरूआती जांच से पहले ही मिल गई जमानत

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतका के पिता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत में कहा कि यह एक “असामान्य मौत” का मामला है, जिसमें शादी के छह महीने के भीतर महिला की मौत हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआती जांच पूरी होने से पहले ही अग्रिम जमानत दे दी गई। लूथरा ने कहा कि ट्विशा के माता-पिता को शुरुआती इनक्वेस्ट प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया और FIR दर्ज करने में भी देरी हुई।

ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश

उन्होंने अदालत में ट्विशा और उसकी मां के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट का हवाला देते हुए दावा किया कि मृतका ससुराल में मानसिक प्रताड़ना झेल रही थी। लूथरा ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष ने CCTV और DVR फुटेज तक पहुंच बनाकर अपना नैरेटिव तैयार किया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मृतका की छवि खराब करने की कोशिश की।

राज्य और सीबीआई के वकील ने बेल पर उठाए सवाल

वहीं राज्य की ओर से पेश एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह और सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ट्रायल कोर्ट द्वारा बेल दिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। AG ने अदालत को बताया कि FIR 15 मई को तड़के दर्ज हुई और उसी दिन बेहद जल्दबाजी में अग्रिम जमानत दे दी गई। उनका आरोप था कि ट्रायल कोर्ट ने ऐसे दस्तावेजों पर भरोसा किया जो केस डायरी का हिस्सा ही नहीं थे।

यह सिर्फ एक बेल का मामला नहीं है

अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया और बेल मिलने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले को प्रभावित करने की कोशिश की। तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि यह सिर्फ एक बेल मामला नहीं, बल्कि न्यायिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि “न्याय सिर्फ होना नहीं चाहिए, बल्कि दिखना भी चाहिए।”

गिरिबाला के पक्ष में क्या दलीलें दी गईं

दूसरी तरफ गिरिबाला सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील नित्या रामकृष्णन ने कहा कि अभियोजन पक्ष तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उन्होंने अदालत को बताया कि घटना के तुरंत बाद पुलिस घर पहुंच गई थी, घर सील कर दिया गया था और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया गया।

रामकृष्णन ने कहा कि गिरिबाला सिंह 63 वर्षीय महिला हैं और उनके खिलाफ दहेज मांग का कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि व्हाट्सऐप चैट में भी सास के खिलाफ सीधे आरोप नहीं हैं और मृतका की नाराजगी मुख्य रूप से पति से जुड़ी थी। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि अग्रिम जमानत लेना उनका कानूनी अधिकार है और सिर्फ आरोपों के आधार पर बेल रद्द नहीं की जा सकती।

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लेखक के बारे में

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रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

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