हम भी दुर्गा या काली की तरह रौद्र रूप धारण कर सकते हैं; MP की आदिवासी महिलाओं की चेतावनी

Subodh Kumar Mishra एएनआई, छतरपुर
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केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट और रुंझ-मझगुवा बांध से प्रभावित आदिवासी परिवार पिछले 11 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार को सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने 'पंचतत्व आंदोलन' किया। आदिवासी महिलाएं नदी के किनारे इकट्ठा हुईं और सरकारी प्रोजेक्ट के खिलाफ नारे लगाए और तख्तियां दिखाईं।

हम भी दुर्गा या काली की तरह रौद्र रूप धारण कर सकते हैं; MP की आदिवासी महिलाओं की चेतावनी

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट और रुंझ-मझगुवा बांध से प्रभावित आदिवासी परिवार पिछले 11 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार को सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने 'पंचतत्व आंदोलन' किया। आदिवासी महिलाएं नदी के किनारे इकट्ठा हुईं और सरकारी प्रोजेक्ट के खिलाफ नारे लगाए और तख्तियां दिखाईं।

एक प्रदर्शनकारी महिला ने कहा कि हमारे जंगल, जमीन और घर हमसे छीने जा रहे हैं। हमें विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा है। 10 दिन बीत चुके हैं, आज 11वां दिन है। अभी तक कोई भी अधिकारी यहां नहीं आया है। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हम यहां से नहीं हटेंगे। अगर वे हमारी अनदेखी करते रहे तो हो सकता है कि हम उग्रवाद की राह पर चल पड़ें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि दुर्गा या काली की तरह हम भी रौद्र रूप धारण कर सकते हैं।

देश की प्रमुख सिंचाई परियोजना

केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना देश की एक प्रमुख सिंचाई परियोजना है, जिसमें भूमिगत दबाव वाली पाइप सिंचाई प्रणाली अपनाई गई है। इस परियोजना का निर्माण मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में केन नदी पर किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचा और 2.13 किलोमीटर लंबा दौधन बांध तथा 2 सुरंगें (ऊपरी स्तर 1.9 किमी और निचला स्तर 1.1 किमी) बनाई जाएंगी।

दो राज्यों को सिंचाई और पेयजल की सुविधाएं

इस बांध में 2853 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा किया जाएगा। जारी विज्ञप्ति के अनुसार, केन नदी का अतिरिक्त पानी दौधन बांध से निकलने वाली 221 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के माध्यम से बेतवा नदी में भेजा जाएगा, जिससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सिंचाई और पेयजल की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

7 लाख किसान परिवारों को फायदा

इस प्रोजेक्ट के तहत एक प्रेशराइज़्ड माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम के जरिए 10 जिलों (जिनमें पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी और दतिया शामिल हैं) के 2 हजार गांवों में 8.11 लाख हेक्टेयर इलाके की सिंचाई की जा सकेगी। इसमें यह भी बताया गया है कि इस प्रोजेक्ट से लगभग 7 लाख किसान परिवारों को फायदा होगा।

दो राज्यों के 65 लाख लोगों को पीने का पानी

सरकार के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के 44 लाख लोगों और उत्तर प्रदेश के 21 लाख लोगों को पीने का पानी मुहैया कराएगा। इसके अलावा, यह प्रोजेक्ट 103 MW हाइड्रोपावर और 27 MW सोलर एनर्जी भी पैदा करेगा। इसका पूरा फायदा मध्य प्रदेश को मिलेगा।

ऐतिहासिक तालाबों को बचाने का काम

इस प्रोजेक्ट में चंदेल काल के ऐतिहासिक तालाबों को बचाने का काम भी शामिल है। मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में चंदेल काल के 42 तालाबों की मरम्मत/नवीनीकरण करके बारिश के मौसम में पानी जमा किया जा सकता है। इससे ग्रामीण इलाकों को फायदा होगा और जमीन के नीचे के पानी का स्तर बढ़ेगा।

बुंदेलखंड इलाके में पानी का संकट खत्म हो जाएगा

इस प्रोजेक्ट के बनने से किसानों की जिंदगी में खुशहाली और समृद्धि आएगी, साथ ही सिंचाई की आधुनिक तकनीक से फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा। इसके अलावा बुंदेलखंड इलाके में पानी का संकट खत्म हो जाएगा। रोजगार के लिए होने वाला पलायन भी रुकेगा। वहीं, एएनआई से बात करते हुए एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि सरकार बांध बनाने के लिए आदिवासी समुदायों को विस्थापित कर रही है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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